Wednesday, February 20, 2013

Comparing Gujrat Riots and Nelli Massacre

नीचे दी गयी पूरी जानकारी इन्टरनेट पे उपलब्ध तमाम लेखों से सीधे सीधे उठा के चेप दी गयी है .....बिना किसी अपराध बोध और हीन भावना के ........

                                         On 27 February 2002, 58 Hindus including 25 women and 15 children, Hindu pilgrims (Kar Sevaks) returning by the Sabarmathi express train from Ayodhya,were burnt alive in a railway coach by a large Muslim mob.Post Godhra , tension gripped parts of Gujarat state .  Fearing communal clashes the administration imposed a curfew in several areas. Rapid Action Force was  deployed in Godhra's sensitive area and around Godhra station ..On 1 March the Indian government dispatched around 1,000 paramilitary personnel to Gujarat and asked the army to be on standby to maintain law and order in the state. The Army began flag marches in the worst-affected areas and shoot-at-sight orders were issued in 34 curfew-bound cities and towns in Gujarat
151 towns and 993 villages in fifteen to sixteen of the state's 25 districts were affected by the post-Godhra violence, which was particularly severe in about five or six districts. The violence raged largely between 28 February and 3 March, and after a drop, restarted on 15 March, continuing till mid June.
Attacks by large Hindu mobs began in the districts of Ahmedabad, Vadodara, Saberkantha and, for the first time in its history, Gandhinagar on 28 February. Violence spread to the largely rural districts of Panchmahals, Mehsana, Hansot, Kheda, Junagadh, Banaskantha, Patan, Anand and Narmada the next day. Over the next two days, Bharuch and Rajkot and later Surat were hit.
790 Muslims and 254 Hindus were ultimately killed and 223 more people were reported missing.523 places of worship were damaged: 298 dargahs, 205 mosques, 17 temples, and 3 churches .
Attacks on Hindus in Danilimda, Modasa, Himmatnagar, Bharuch, Sindhi Market, Bhanderi Pole, and other localities in the city of Ahmedabad in Gujarat were perpetrated by Muslim mobs.There was a significant loss of property.Late in March, more than one hundred Hindus in Dariyapur and Kalupur, including 55 dalits, fled their homes to stay in makeshift shelters after being attacked by Muslims mobs.
There have been 249 convictions till now in 19 cases. This includes 184 Hindus and 65 Muslims- 31 for Godhra and 34 for post-Godhra.
                                                numerous Enquiries and commissions have been investigating the roits .to name a few Shah-Nanawati commission , Human Rights Commission , Bannerjee committee , concerned Citizens tribunal Etc. allmost all the News Channels and News papers have been carrying stories and debates over these riots and have been blaming Modi for failing to contain the violence . An interesting observation with regard to media handling of Gujarat riots is that at the time of riots, the media reports had been pointing out the steps taken by Modi administration to curb riots and how even the combined strength of Indian Army which Modi had requested with few hours of riots having broken, and State Police could not control the situation. However, later, the media editorials became critical of Modi, sidelining the facts they'd already published .

The Nellie massacre of MUSLIMS  took place in Assam during a six-hour period in the morning of 18 February 1983. It claimed the lives of 2,191 people (unofficial figures run at more than 5,000) from 14 villages. On February 18, 1983, At around 8:30 am, suddenly the village was attacked by mobs from three sides surrounding the villagers and pushing them towards river Kopili. People armed with sharp weapons, spears, and a few guns, advanced towards Nellie in an organized manner. The attackers encircled the whole village and left open the side that ends towards river Kopili. There were attackers in boats too. Killing started at around 9 am and continued till 3 pm. Most of the victims were women and children.
The official Tiwari Commission report on the Nellie massacre is still a closely guarded secret (only three copies exists).The 600 page report was submitted to Assam Government in 1984 and the Congress Government (headed by Hiteswar Saikia) decided not to make it public, and subsequent Governments followed suit.Assam United Democratic Front and others are making legal efforts to make Tiwari Commission report public, so that reasonable justice is delivered to victims, at least after 25 years after the incident.
Police filed 688 criminal, of which 378 cases were closed due to "lack of evidence" and 310 cases were charge sheeted. But the government decided to drop all the cases to honor the ASSAM ACCORD signed by PRIME MINISTER RAJIV GANDHI . As a result, not a single person was ever tried or punished in a court of law.
The Nellie Massacre is said to be the worst and the most brutal massacres , ever , in recorded human history where 5000 people , mostly women and children , all MUSLIMS were killed by congress goons .But the National media , ELECTRONIC AS WELL AS PRINT ,very conveniently chooses to remain silent and has been continuously hounding Modi for Gujarat roits


Monday, February 18, 2013

नेल्ली मुस्लिम नरसंहार की 30वीं सालगिरह

                                       18  फरवरी 1983 ...........30 वीं बरसी है आज , नेल्ली नरसंहार की .........उस दिन आज से 30 साल पहले , दिन दहाड़े  6 घंटे के भीतर 14 गावों के 2191 मुसलामानों को बेरहमी से मार डाला गया था . उन दिनों वहाँ असम में राष्ट्रपति शासन  था .... इंदिरा गांधी  का शासन .......चुनाव का मौसम था .क्षेत्र में 400 कम्पनी CRPF  और 11 ब्रिगेड फ़ौज तैनात थी ......... KPS GILL...... IG पुलिस थे ........2 ट्रक पुलिस तो गाँव के एकदम बगल में थी ........सुबह 8.30 पे भीड़ ने 3 तरफ से हमला किया और लोगों को घेर के कोपिली नदी की तरफ ले गए . हमलावर नदी में नाव पर भी सवार थे ........सुबह 9 बजे से 3 बजे ,  मार काट चलती रही ......शाम तक 2191 लोग ( सरकारी आंकड़ा ) मारे गए .
                      तिवारी जांच कमीशन  बैठा ,   कांग्रेस की हितेश्वर सैकिया सरकार ने उसे सार्वजनिक ना करने का निर्णय लिया ........वो रिपोर्ट आज तक बाहर नहीं आयी है .............पुलिस ने कुल 688 लोगों  के खिलाफ मामला दर्ज किया पर सबूतों के आभाव में 378 केस केस drop कर दिए गए . 310 लोग chargesheet हुए पर उन सबके मुक़दमे राजीव गांधी ने असम समझौते के तहत वापस ले लिए .......आज तक किसी को कोई सज़ा नहीं हुई .न कोई राजदीप , न कोई barkha dutt ......न harsh mandar , न seetalwaad , न markandey kaatju ....न कोई SIT , न सुप्रीम कोर्ट .....कहाँ है वो secular लोगों की फ़ौज .....वो  जो हमेशा याद दिलाते हैं मुसलामानों को ......गुजरात दंगों की .......
                             इसके ठीक डेढ़ साल बाद इसी कांग्रेस सरकार में , राजीव गाँधी के नेतृत्व में , राजधानी दिल्ली में सिखों का कत्ले आम हुआ .......6 हज़ार सिख मारे गए ........सेक्युलर मीडिया चुप है ......minorities के खुदा चुप हैं ......मुसलमान चुप हैं .....हमने तो कभी नहीं सुना की अमेरिकी सरकार ने राजीव गांधी को visa न दिया हो इस मुद्दे पर ........89 में भागलपुर में एक हज़ार से ज्यादा ज़्यादा मुसलमान मारे गए ........कितनों को हुई सज़ा ........
                             देश  में नरसंहारों का इतिहास कांग्रेस की  देन है  ........इन्होने हमेशा लाशों की राजनीती की है ....दूसरों को भी सिखाई है .

NOTE : समस्त जानकारी internet  पे पहले से उपलब्ध सूचनाओं का हिंदी अनुवाद है .आज फेसबुक पे अरुंधती राजपाल के status अपडेट पढ़ के इसे लिखने का सुयोग बना .


इतनी बड़ी डील में दान दहेज़ तो चलता ही है

                                         कल अखबार में छप ही गया . वैसे छुपता भी कब तक .सच को बाहर तो आना ही होता है . समय से ताज़ा ताज़ा बाहर आ जाए तो ठीक वरना सड़ के बाहर आता है .बहुत बुरा महकता है तब .सो कल अखबार में सच छाप गया की 2005 में इटली के राष्ट्रपति जी जब भारत आये थे तभी सब घोटाला हुआ हेलीकाप्टर में . अब यूँ तो मैं हूँ तो बड़ा कमीना आदमी पर  यकीन मानिए , कमीने से कमीने आदमी में भी अंतरात्मा होती है . वो भी कभी तो सच बोल ही देता है . सो आज पूरा सच उगल दूंगा .
                                  और सच ये है की ये हेलीकाप्टर घोटाला में अपना पूरा हाथ है .हम ही सब किया हूँ . वो इटली का राष्ट्रपति जब आया था तो उसका सब आदमी लोग हमसे ही मिला था . और मिलता भी किस से . हमारे अलावा और कौन मदद कर सकता था या प्रभाव डाल सकता था . दरअसल इटली से हमरा पुराना सम्बन्ध रहा है . बचपन से ही प्रेम था इटली से . इतना प्रेम था के बचपन में खूब इटली दोसा खाते थे . खाते रहे .वो तो बहुत साल बाद हमरा भरम टूटा . जब हम एक जगह एक प्लेट इटली मांगे तो हमारे साथ जो स्कूल की  लडकी बैठी थी वो बोली , धत्त पागल ,  इटली थोड़े हे होता है ....... इसे तो इडली कहते हैं .......और अपना तो दिल ही टूट गया . उसके बाद ज़िन्दगी में कभी इडली को हाथ नहीं लगाया . जिसे इतने प्रेम से इटालियन डिश  समझ के खाते रहे वो तो घटिया मद्रासियों का , चावल का घोल निकला . उन दिनों इतना आक्रोश था मेरे मन में की मुझे अगर कानून की जानकारी होती तो मैं इन रेस्तौरेंट वालों को मिलते जुलते भ्रामक नाम रख के धोखा देने और पैसे ठगने का मुकदमा कर देता . खैर फिर मैंने पूरी रिसर्च कर के ओरिजिनल इटालियन डिश खोजी , पिज्जा ....और उसे खाना शुरू किया .दिन रात सुबह शाम .....य्य्य्य्य्ये पिज़्ज़ा पे पिज़्ज़ा ...इतनी दीवानगी थी इटली के प्रति ......पता लगा की godfather इटालियन माफिया पे लिखी गयी है तो सौ बार पढ़ डाली . godfather  फिल्म के तीनों भाग सैकड़ों बार देख मारे .सो इटली से हमारा सीधा सीधा भावनात्मक रिश्ता है सदियों पुराना . उस दिन जब राष्ट्रपति जी आये वहाँ से तो बोले , यार अजीत सिंह किसी तरह रिश्ता करवाओ .....तुम्हारी तो इतनी चलती है यहाँ ....मैंने खीसें निपोरते हुए कहा , क्यों शर्मिन्दा कर रहे हैं ...... जाइये हो जाएगा ....... सो बिचौलियों ने लडकी दिखाई .....दान दहेज़ तय हुआ ....और रिश्ता तय हो गया .......
                                  अब ये साला एक टुच्चा सा अखबार है , पीछे पडा है .......और ये CAG वाले .......ये साले किसी का घर बसते नहीं देख सकते . अब शादियों में दान दहेज़ तो चलता ही है . कानून का क्या है .कानून तो हर चीज़ के लिए बने हैं . और देखो भाई हमने तो लड़के और लडकी वालों को मिलवा भर दिया . और इतना भर कह दिया की लडकी अच्छी है . अब उन लोगों में क्या बात हुई , कितना दान दहेज़ लिया दिया , कितना माल मत्ता इधर उधर हुआ हमें नहीं पता . हम ठहरे एक नंबर के ईमानदार शरीफ और त्यागी किस्म के आदमी . हमको या हमारे बच्चों को या उनके यारों दोस्तों को इसमें नहीं लपेटना चाहिए .

Monday, February 11, 2013

कुम्भ में जानवरों का जमावड़ा

                                  आज से कई दशकों बाद , जब देव दानव फेसबुक का विश्लेषण करेंगे तो इसे इतिहास की महानतम घटना के रूप में  देखा जाएगा ........बड़ा महात्म्य है फेस बुक का ......सब फायदों के बाद इसका जो सबसे बड़ा फायदा है वो ये कि  भाई लोग यहाँ गरिया के अपनी भड़ास निकाल लेते हैं .......अब जब आपकी भड़ास निकल गयी तो आपको सुकून , चैन , सुख , शान्ति instant प्राप्त हो जाता है ......मुझे पूरा विश्वास है कि  फेसबुकिये सबसे कम हिंसक प्राणी होते होंगे . उनका पारिवारिक जीवन अन्य प्राणियों से अपेक्षाकृत सुखमय होगा ....वे निश्चित रूप से अपनी बीवियों से कम पिटते होंगे .....या अपनी बीवियों को कम पीटते होंगे .....क्योंकि अपना सारा aggression तो वो फेसबुक पे निकाल देते हैं . यूँ भी हमारे जीवन में गालियों का बड़ा महत्व है ........अपने सर्वाधिक प्रिय मित्र दोस्त या सम्बन्धियों को ही हम गाली देते हैं .......हमारे यहाँ UP में तो शादियों में बाकायदा गाली गायी जाती है ......बनारस में गाली महोत्सव होता है ........पर जो गाली महोत्सव निर्बाध रूप से फेसबुक पे चल रहा है , ऐसे जैसे अखंड रामायण का पाठ चलता है  मंदिरों में .........उसकी कोई मिसाल नहीं है इतिहास में ........ सच कहूं तो  फेसबुक इस श्रृष्टि में , गरियाने का सबसे बड़ा मंच है ..........रोजाना एक नया मुद्दा मिल ही जाता है गरियाने को .......रोजाना नयी फिल्म रिलीज़ हो जाती है . और जब कोई न हो गरियाने को तो सोनिया गाँधी , राहुल बाबा , दिग्विजय सिंह , नरेन्द्र मोदी तो हैं ही .
                              अब कुम्भ को ही ले लीजिये . 36 लोग मर गए भगदड़ में . लगे हैं लोगबाग . गरिया रहे हैं ....... हिन्दुओं  पे लाठी चार्ज कर दिया ज़ालिम सरकार ने . अम्बुलेंस टाइम पे नहीं भेजी . रेलगाड़ियाँ कम चलाई . रेल ने सर चार्ज लिया . अखिलेशवा शादी में क्यों गया . मुलायमा तो है ही मुल्ला यम . हिन्दू अस्मिता का प्रश्न है . मंत्री जी ,  रेल गाडी नहीं है तो माल गाडी लगा दो .......मुसलमानों के लिए तो हवाई जहाज लगा देते हो .......यहाँ मालगाड़ी  नसीब नहीं ........  रेल मंत्री पवन बंसल  को dracula बना के पेश  किया जा रहा है , हिन्दू  मेले का अध्यक्ष मियां आज़म खान को क्यों बनाया ...... पुलिस ने भीड़ का नियंत्रण ठीक से नहीं किया ....... वगैरा वगैरा ........
                             हमारे पड़ोस में एक शराबी रहता है ......जो कमाता है छान फूंक देता है ...... बच्चे भूखों मरते हैं ....... एक दिन घर आया तो देखा , बच्चे रो रहे हैं भूख से . उसने बीवी को डांट  लगाई , बचवा सब रो क्यों रहे हैं .....भूख लगी है .....तो फिर खाना क्यों नहीं बनाया ? आटा तक तो है नहीं घर में . अरे आटा  नहीं है ? तो क्या हुआ ....pizzahut से pizza मांगा लेती ........ भाई लोग गरिया रहे हैं की भीड़ को मैनेज नहीं किया .....ज्यादा रेल क्यों नहीं चलायी ....... साली रेल न हुई pizzahut का पिज़्ज़ा हो गया .....आर्डर दो .......30 मिनट में हाज़िर .........जनाब भारत देश में जो सामान्य , रोज़मर्रा का लोड है न हमारे सिस्टम पे .....उसी  में मरा जा रहा है देश .....न सड़कों पे जगह है ...न रेल में जगह है ....न फुटपाथ पे .......इलाहबाद , बनारस के रेलवे स्टेशन और सडकें तो सामान्य दिनों में ऐसे खचा खच भरे होते हैं कि तिल रखने की जगह नहीं होती .........रेलवे एक नयी  गाडी चलाने से पहले 100 बार सोचती है ....कैसे चलायें ....पहले ही इतना लोड है ........ऊपर से आप कुम्भ में एक दिन में 3 करोड़ आदमी उतार दो इलाहबाद में .......अब उन सबके लिए रेल चलाओ  ...... फिर वो इलाहबाद के 3 स्टेशनों से ट्रेन पकड़ेंगे ........माफ़ कीजियेगा 3 करोड़ आदमी कह गया ......3 करोड़ जानवर ....आदमी तो वो होता है जिसे  थोड़ी अक्ल होती है ......चलने फिरने , उठने बैठने का सलीका होता है ........CIVIC SENSE होता है ..........भीड़ भाड़  में कैसे व्यवहार करना है ........ व्यवस्था को कैसे बना के रखना है ........ कोई मुसीबत आने पर क्या करना है ..........थूकना कहाँ है ....चाटना कैसे है .....हमने अपने देश के इन 120 करोड़ जानवरों को इंसान बनाने के लिए किया ही क्या है .........discovery channel में दिखाते हैं , wilder beasts का जब माइग्रेशन होता है तो वो सब नदी पार करते हुए भीड़ भाड़ में एक दुसरे को कुचलते हुए निकल जाते हैं ....अपने पीछे लाशों के ढेर छोड़ते ..........
                                     3 करोड़ लोगों के लिए जो भी , जैसी भी व्यवस्था कर दी जाए वो कम ही पड़ेगी . तो इन सीमित साधनों में बहुत समझदारी से ही काम चलाया जा सकता है ......... उन लोगों को संयम से ही काम लेना पडेगा .....किसी भी कीमत पे व्यवस्था बना के रखनी ही पड़ेगी ......पर हम भारतीय कहीं पर भी धैर्य .......PATIENCE  नहीं रखते हैं .......3 करोड़ impatient लोगों में हादसा होना लाजमी है ....हो गया . दूसरी बात रही कुम्भ मेले की ....और इसमें इतने ज्यादा लोगों के participation  की . मुझे main stream media से हमेशा ये शिकायत रही है की वो लोगों को educate  करने का काम नहीं कर रहा है ........ जिन दकियानूसी अंधविश्वास , अंध श्रद्धा  ढोंग ढकोसले में हम लोग उलझे हुए हैं वो समय के साथ कम होना चाहिए , परन्तु ये तमाम अंधविश्वास बढ़ रहे हैं ...ढोंग , ढकोसले और  आडम्बर पूर्ण ये आयोजन और इनका पैमाना बढ़ता जा रहा है .  देश में आज तक जितनी भी कुरीतियाँ और कुप्रथायें  रही उन सबको justify करने के लिए ठेकेदारों के पास धार्मिक आध्यात्मिक और सामाजिक कारण रहे , पर भारत में जो समाज सुधार आन्दोलन हुए उनमे कबीर से ले कर महात्मा गांधी तक ने जनजागरण कर के उस दलदल से लोगों को बाहर निकाला  ....... इसी देश में सती प्रथा थी . बाल विवाह , विधवा विवाह , छुआ छूत , स्त्री शिक्षा , कन्या भ्रूण ह्त्या , मूर्ति पूजा , नर बलि , दास प्रथा , बंधुआ मजदूर ,  बाल मजदूर .....ये तमाम चीज़ें धर्म ,आस्था और समाज से ही तो जुडी थीं . समाज सुधारकों ने popular sentiment के विपरीत जा कर ....... लोगों को educate किया .....आज MSM क्या कर रहा है ......... श्रद्धा और आस्था के नाम पे कुम्भ जैसे बेवकूफाना आयोजनों को प्रमोट कर रहा है ....और तो और sosial मीडिया भी इन बेवकूफों की चाटुकारिता में लगा है ........
                                       कुम्भ का ( और इस प्रकार के बाकी सारे ) चूतियापा बंद होना चाहिए . ये ढकोसले के अलावा कुछ नहीं .

Sunday, February 10, 2013

चौथे खम्बे के ऊपर रंडी का कोठा

                              केंद्र सरकार की नौकरी  की बदौलत मुझे जो थोडा बहुत हिन्दुस्तान देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ उसमे बुन्देलखंड भी था . वहाँ मुझे साल दो साल रहने का मौक़ा भी मिला .........वो भी गाँव में . शहर में रह के आप असली हिन्दुस्ता नहीं देख समझ पाते . मेरी नयी नयी शादी हुई थी . दिल्ली और पटियाला की नौकरी को लात मार के , जालंधर शहर की  एक दबंग लडकी को ले के , मैं जिला गाजीपुर पहुँच गया . देश प्रेम और मातृ भूमि से प्रेम जैसे चूतिया चक्करों में पड़ के अक्सर लोग ऐसी बेवकूफियां कर जाते हैं . वहाँ जा के मेरी बीवी ने उसे एक निहायत ही घटिया , थर्ड क्लास और बैकवर्ड जगह घोषित कर दिया ....जिसका कुछ नहीं किया जा सकता . .......क्योंकि ये साले पंजाब से 50 साल पीछे है .........अब अपने लिए तो भैया ये सुप्रीम कोर्ट का आर्डर था जिसकी कोई अपील तक नहीं हो सकती थी . तब तक मेरा तबादला MP के छतरपुर जिले में हो गया . वहाँ पहुंचा , कुछ दिन रहा , घूमा फिरा . दूर दूर तक गया . फिर लौट के घर पहुंचा तो मैंने अपनी बीवी का कालर पकड़ लिया . जालंधर शहर की तीन गलियाँ घूम ली तो क्या सारा  हिन्दुस्तान देख लिया ......... वहाँ जा के देखो ......बुंदेलखंड में ........ साले गाजीपुर से भी 50 साल पीछे  हैं . अब जो  क्षेत्र गाजीपुर से भी पीछे होगा वो कैसा होगा . जैसे ताजमहल को देखे बिना उसकी ख़ूबसूरती का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता उसी प्रकार बुदेलखंड को देखे बगैर उसकी ख़ूबसूरती का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता . मैं आपको सिर्फ एक उदाहरण दे के समझा देता हूँ ...एक वाक्य में .......सन दो हज़ार में , जब मेरी तनख्वाह 6000 रु थी तो बुंदेलखंड के एक गाँव में एक किसान अपना 25 एकड़ का एक प्लाट 2500 , शब्दों में लिखूं तो मात्र ढाई हज़ार रु प्रति एकड़ में बेचने को तैयार हो गया था  . उस समतल ज़मीन में 60 फुट पे पानी था और दो फसल होती थी .....जिसमे एक सोयाबीन की कैश क्रॉप है ........अब आपके मन में एक स्वाभाविक सवाल आया होगा कि ली क्यों नहीं .......ली थी भैया ....और उसकी एक लम्बी , मजेदार और दर्दनाक कहानी है .....जिसे फिर कभी लिखूंगा .......
                                  फिलहाल मुद्दे पे वापस आते हैं ....और मुद्दा है बुंदेलखंड का पिछडापन ........ और इसे मैं एक और वाक्य में समझा देता हूँ ....किसी ज़माने में एक आदर्श बुन्देलखंडी ज़मींदार के अगर 5 लड़के होते थे , तो उनमे एक किसान , एक पुलिस वाला , एक वकील , एक पहलवान और एक डाकू बनता था ............उस इलाके में survive करने और फलने फूलने का यही एक फार्मूला था ........ अब आपको शायद थोडा बहुत अंदाजा हुआ होगा की क्यों बुन्देल खंड में 10-15 साल पहले  ज़मीन  मात्र 2500 रु एकड़ बिकती थी .अब आते हैं असली मुद्दे पे जिसके लिए मैंने ये बुंदेलखंड वाली इतनी लम्बी चौड़ी भूमिका बनाई है ........जी हाँ ये तो भूमिका थी .........
                                          हिन्दू अखबार के स्वघोषित " ग्रामीण " पत्रकार पी साइनाथ का एक लेक्चर फेसबुक के माध्यम से youtube पे देखने का सुअवसर मिला . उसके बाद एक एक कर के उनके सारे लेक्चर देख सुन डाले .....इन्टरनेट के रोगी जो ठहरे ............P SAINATH , हिन्दू के एडिटर हैं , देश के सर्वाधिक इमानदार और प्रतिष्ठित पत्रकारों में उनकी गिनती होती है और वो साल में  250 से 300 दिन भारत के ग्रामीण अंचल में बिताते हैं ......और देश में गरीबी , भुखमरी और किसानों की आत्महत्या जैसे मुद्दों को कवर करते हैं .....पिछले 2-3 साल से वो देश के MSM यानि  MAIN STREAM MEDIA की कारगुजारियों का भंडाफोड़ भी कर  रहे हैं . उन्होंने हिन्दू अखबार में  PAIDNEWS पे एक लंबा खुलासा किया है .
1)  तकरीबन सभी मीडिया हाउस सीधे सीधे किसी न किसी  कारपोरेशन की नाजायज़ औलाद हैं . वो यूँ की ये बड़ी बड़ी कम्पनियां ....ये FORTUNE 500 CORPORATIONS .......सब प्रकार के धंदे करती हैं . एग्रीकल्चर , एविएशन ,शुगर ,STOCK MARKET ,FINANCE , FASHION ,EVENT MANAGEMENT , MINING ,REAL  ESTATE  FILM INDUSTRY , MEDIA  ......... और और इसके अलावा INDUSTRY और COMMERCE में जो कुछ हो सकता है वो सब कुछ ............
2) इन CORPORATIONS को अपने सभी प्रकार के बिजनेस को बचाने और बढाने के लिए जो कुछ भी तिकड़म , छल प्रपंच करना होता है वो करती हैं . मसलन सरकारों से अपनी मन पसंद नीतियाँ बनवाना ...अपना मनपसंद BUDGET पास करवाना , अपनी मनपसंद सरकार बनवाना और उस मनपसंद सरकार में अपनी पसंद के लोगों को मंत्री बनवाना ............ये सब कुछ हम लोग अपने देश में RADIA TAPES में देख सुन चुके हैं ..........
3 ) पेड न्यूज़ के खुलासे में पता चला की हमारा MSM ..यानी हमारे ये अखबार , ये मनपसंद न्यूज़ चैनेल , नेताओं और पार्टियों से पैसे ले के  उनके पक्ष में झूठी खबरें छापते हैं .....उनकी हवा बनाते हैं ...और उन्हें चुनाव हरवाते  जितवाते हैं .
4 ) अपनी PARENT COMPANY के अन्य धन्दों को लाभ पहुंचाने के लिए झूठ बोलते हैं ....झूठी खबरें फैलाते हैं .......और अपनी कठपुतली सरकार को BLACKMAIL करके अपना काम निकालते हैं .
5)  सबसे कष्टदायी बात जो वो बताते हैं वो ये की आज कल किसी मीडिया हाउस  के पास फुल टाइम पत्रकार नहीं जो कृषि , गरीबी , भुखमरी , स्वस्थ्य , शिक्षा और किसानों की आत्महत्या जैसे मुद्दों को कवर करे .........जबकि सबके  पास FASHION , GLAMOR और GOSSIP को कवर करने के लिए 5-7 फुल टाइम पत्रकार  हैं ........... मुंबई में हुए लक्मे फैशन वीक को कवर करने के लिए मीडिया के 512 अधिकृत पत्रकार नियुक्त थे ......और उस फैशन वीक का थीम था ....COTTON .......और उसी मुंबई से मात्र एक घंटे की दूरी पे एक सप्ताह में दो दर्ज़न से अधिक COTTON GROWER किसानों ने आत्महत्या कर ली थी ....और उन आत्महत्याओं को कुल 6 पत्रकार कवर कर रहे थे ............आंकड़े कहते हैं की भारत देश के मात्र .025 % लोग DESIGNER कपडे पहनते हैं ........जबकि गरीबी , भुखमरी , कुपोषण देश के 75% लोगों का मुद्दा है ........हमारे  मीडिया ने .025% लोगों के लिए 512 पत्रकार लगा रखे हैं और  असली भारत के लिए एक भी नहीं . देश के 75% लोग न कोई न्यूज़ बनाते हैं न उन्हें कवरेज चाहिए ........
                         बुन्देलखंडी किसान के 5 बेटे .......किसान , वकील , पुलिसवाला , पहलवान और डकैत ..........उसे एक बेटा और पैदा कर के पत्रकार बनाना पड़ेगा
भारत देश में लोकतंत्र के चौथे खम्बे के ऊपर रंडी का कोठा खुल गया है ..........देश का बुंदेलखंड बनना तय है

Saturday, February 9, 2013

Afzal Guru Cries Foul .......he's been cheated

                                            दीन  के शहीद हो के  अफज़ल मियाँ जल्दी जल्दी चले जा रहे थे ....ज़न्नत पहुँचने का चाव था ......वहाँ बताया था कि  ज़न्नत में 72 हूँरें होंगी .....कमसिन .....कुंवारी .......6 से 9 साल की  ....... वहाँ पहुंचे तो हॉल खचाखच भरा था .......मुग़ल सराय के रेलवे प्लेटफार्म की तरह ........ कांव कांव मची थी ....शोर शराबा ....भीड़ भड़क्का .....भाई लोग लड़ झगड़ रहे थे ......... हर चीज़ के लिए मारा मारी थी .............हूर एक भी न थी  ....अलबत्ता कुछ लौंडे थे ......गिलमान .........पर वो भी कमसिन नहीं .........बूढ़े ठांठ  .....न दूध की नदियाँ , न पानी की नहरें ..........हॉल के कोने में एक टूटी लगी थी ............न कोई रिसेप्शन न कोई रिसीव करने वाला .........उन्हें मुगालता हुआ ....कहीं साले गलत तो नहीं ले आये ....देव दूतों से बोले .... अबे कहाँ ले आये ...अरे मियाँ हमारी तो ज़न्नत की बुकिंग है .......ये कहाँ ले आये दोज़ख में ........देव दूत बोले ........हुज़ूर सही लाये हैं ......... ज़न्नत ही  है ....अफज़ल भाई का माथा घूम गया ........ ये तो सरासर धोखा है ......वहाँ मौलवी तो साला ज़न्नत की बड़ी rosy picture paint करता था ........ i will sue you ......cosumer court में ले जाऊंगा .......मुझे बेवक़ूफ़ समझा है क्या ........
                            देव दूतों ने समझाया ....हुज़ूर गुस्सा थूक दीजिये ......... शांत हो जाइये .......किसी ने झूठ नहीं बोला  है , किसी ने धोखा नहीं दिया है ..........हुज़ूर यही ज़न्नत है .......मौलवी ने जो प्लान दिखाया था , सब सही था .....आपको वही पैकेज मिलना था ..........पर क्या है कि  इधर भीड़ थोड़ी बढ़ गयी है .........रोजाना हज़ारों आ रहे हैं शहीद हो के ......... ज़न्नत में दरअसल जगह कम पड़  गयी है ........ अब कहाँ से लायें रोजाना इतनी हूरें ........ ऊपर से इतना सख्त क्वालिटी कण्ट्रोल .......कुवांरी , कमसिन ,वो भी एक आध नहीं  चाहिए ....हर आदमी को 72 ......पुराने ज़माने में तो उठा लाते थे हिन्दुस्तान से ........पर अब ज़माना बदल गया है हुज़ूर .......अब नहीं मिलने की हूर परी ....... जो एक आध लौंडा मिले उसी से काम चला लीजिये ........ वो भी आपस में शेयर कर के ........ वीकली टर्न मिल जाती है .......बाकी खाना पीना मिल ही जाता है ...हाँ पानी की थोड़ी shortage  है ....... अब हम भी क्या करें हुज़ूर ...हमने तो कई बार लिख के भेजा  है ...... कि  ये मिस सेलिंग न करें ......  इतना बड़ा package promise ना करें .........perks कम कर दें ....पर हमारी सुनता कौन है ....... अब मियाँ अफज़ल गुरु वहाँ एक कोने में मायूस बैठे हैं .....सालों को consumer कोर्ट में घसीटूंगा .

कौम के शहीद और पार्टियों के वोट बैंक ...........

                                        अफज़ल गुरु को चुप चाप फांसी दे दी आज . बड़ा हल्ला है .सरकार और कांग्रेस अपनी पीठ ठोक रहे हैं . उधर श्रीनगर और काश्मीर के कई  हिस्सों में कर्फ्यू है ....हुर्रियत ने तीन दिन का बंद रखा है .....मुझे आज तक ये समझ नहीं आया की ये साला तीन दिन के बंद का क्या मतलब है ... 30 दिन क्यों नहीं ? या मैं कहता हूँ 3 साल के लिए बंद करो यार ....वैसे एक बार जम्मू वालों ने 2-3 महीने का बंद रखा था . एक मामले में कश्मीरी बड़े बेबाक हैं ....वो हिन्दुस्तान को अपने ठेंगे पे रखते हैं . और सरेआम रखते हैं .सरेआम पकिस्तान के गुण गाते हैं .लाल चौक में पकिस्तान का झंडा फहराते हैं . वहाँ की  सड़कों पे सरेआम , ( सिर्फ)  शाहिद अफरीदी और शोएब अख्तर के पोस्टर बिकते हैं  .श्रीनगर के लाल चौक पे एक बड़ा मशहूर क्रिस्चियन स्कूल है .पुरानी बात है .मुझे वहाँ के प्रिंसिपल ने ये किस्सा सुनाया था . वर्ल्ड कप  में इंडिया पकिस्तान का मुकाबला होने वाला था उस दिन .MORNING ASSEMBLY में यूँ ही पूछ लिया प्रिंसिपल ने  kids we have the match today .....who do you think is going to win ? ........और सभी बच्चों की एक साथ आवाज़ आयी ....पाकिस्तान ..... प्रिंसिपल कहते हैं ....मैं हक्का बक्का रह गया . तो कहने का मतलब ये है की कश्मीर तो है ही पकिस्तान .....उसे तो हम यूँ ही ज़बरदस्ती अपनी फ़ौज के बल पे साथ रखे हुए हैं .
                                         अब आइये ज़रा पंजाब की बात करते हैं . आज टीवी पे चर्चा चल रही है .बलवंत सिंह राजोआना को कब होगी फांसी . मुझसे बड़ी भूल हो गयी . कृपया क्षमा करेंगे .....वे भाई बलवंत सिंह राजोआना हैं ......सो हमारे भैया जी , मुख्य मंत्री बेअंत  सिंह ह्त्या काण्ड में फांसी की सजा पाए हुए हैं . पिछले दिनों उन्हें फांसी देने की तारीख भी मुक़र्रर हुई थी . फिर यहाँ पंजाब में बड़ा बवाल मचा . पूरा सिख समाज सड़कों पे उतर आया . दो दिनों के भीतर ही अस्सी और नब्बे के दिनों की याद दिला दी . अजीब सी  बेचैनी थी .हवा से दहशत की बू आती थी .अकाल तखत ने राजोआना को कौम का ज़िंदा शहीद घोषित कर दिया ..........ज़िंदा शहीद .....और फिर सुप्रीम कोर्ट ने फांसी पे रोक लगा दी . राजोआना  पटियाला सेंट्रल जेल में बंद है .उसे सिख समाज में हीरो का दर्ज़ा हासिल है . मज़े की बात ये है की उस दौरान पूरी BJP लीडरशिप को सांप सूंघ गया था .किसी के मुह से कोई आवाज़ नहीं निकली। किसी ने ये नहीं पूछा की भैया ये क्या हो रहा है .आप लोग सरेआम एक आतंकवादी का महिमा मंडन कर रहे हो ....उसे हीरो बना रहे हो ? golden temple complex में इंदिरा गांधी के हत्यारों को पूजा जा रहा है ? है कोई पूछने वाला ? अकाल तख़्त में OPERATION BLUE STAR में मरने वाले आतंकवादियों का  मकबरा बन रहा है .......अकाली दल और भाजपा खामोश हैं .....
                उधर काश्मीर घाटी में हुर्रियत ने अफज़ल गुरू को कौम का शहीद , जंगे आजादी का शहीद करार दिया है . दिल्ली का बटला हाउस एनकाउंटर हमें याद है . पूरी कांग्रेस लीडरशिप को उन तथाकथित मासूम  आतंकवादियों के लिए रोते बिलखते हम देख ही चुके हैं . सुनते हैं राज माता उनकी फोटो देख के रो पडी थी . आतंकवादियों की लाश से वोट निकाले जा रहे हैं  ?
                   आजकल यहाँ  पंजाब , में जब घर से बाहर निकलता हूँ तो सड़क पे एक आदमी , अक्सर मुझे सरेआम बन्दूक दिखाता है ....धमकाता है .......कहता है .....लगदा है फेर आणा पऊ .....( I think i will have to come back ) वो आदमी है ....कौम का एक और शहीद ......जरनैल सिंह भिन्ड्रा वाले ....जी हाँ , श्री मान जी की फोटो सरे आम लोग अपनी गाड़ियों के पीछे लगा के घूम रहे है ...एक हाथ में तलवार है ....दुसरे में AK 47 .......अब मुझे ये समझ नहीं आ रहा की मैं यूँ ही खाम खां डर रहा हूँ या वाकई मुझे डरना चाहये ?
                                         मुल्क आतंक वाद से लड़ाई बड़ी बेमन से लड़ रहा है ...सोच सोच के लड़ रहा है ....आतंकवाद से लड़ते समय इस बात पे ध्यान ज्यादा है की वोट न टूटे .........

Friday, February 8, 2013

पहलवान और मुसलमान

                                    दोस्तों , पहलवान होने का भी बड़ा नफ़ा नुकसान है . ता उम्र पहलवानी की कराई है .हमसे बेहतर कौन जानता है . पहले पहलवानी की दस साल , फिर पहलवानी की ही नौकरी कर ली ....पहलवानी के ही कोच हो गए . फिर अपने लड़कों को भी पहलवान ही बना दिया .सो पहलवानी तो अपने रग रग में समाई हुई है . सो पहलवानी के नफे नुक्सान की बात यूँ उठी की हम लोगों को कोई सीरियसली नहीं लेता .शायद मैं गलत कह गया .हकीकत इसके उलट है , की हमको लोग ज़्यादा सीरियसली ले लेते हैं . उसका एक कारण ये है की हमें किसी को ये बताने की ज़रुरत नहीं पड़ती की हम पहलवान हैं .लोग शरीर देख के ही समझ जाते हैं .रही सही कसर हमारे टूटे हुए कान निकाल देते हैं . कान देख के लोग बाग़ समझ जाते हैं .  फिर खान पान , रहन सहन , उठाना बैठना , चाल ढाल , हसना बोलना ........पहलवानों की हर बात निराली है ....... अक्खड़ अलमस्त स्वभाव , बेफिक्र जीवन ......शारीरिक ताकत की वजह से उपजी एक स्वाभाविक आक्रामकता ....ऊपर से कुश्ती खेल की मूलभूत आवश्यकता है आक्रामक होना ........ इन सब के साथ पहलवानों के साथ कुछ पूर्वाग्रह भी जुड़े हुए है ...मसलन उन्हें अनपढ़ गवाँर मान लिया जाता है .......उनके बाहरी व्यक्तित्व से ही उनके बारे में पूर्वानुमान लगा लिए जाते हैं ........ हमारे हिंदी साहित्य में तो किसी भी गुंडे बदमाश लठैत को पहलवान दिखाने या कहने की परम्परा रही है ....हाल में रिलीज़ हुई फिल GANGS OF WASSEYPUR में सारे बदमाश पहलवान कहाए हैं ......सो ये पहलवानों  से जुड़े पूर्वाग्रह हैं जो सदियों से चले आ रहे हैं ...........ऊपर से कुछ अपनी इमेज खुद पहलवानों ने खराब की है ....अपने क्रिया कलापों से .......मैं इस से जुडी एक सच्ची story सुनाता हूँ ........
                   सन 1984 में मेरे पिता जी ने मुझे दिल्ली के एक अखाडे में पहलवानी करने के लिये भेज ..........उसी समय दिल्ली में 84 वाला दंगा हो गया ......... दंगे के तुरंत बाद कुछ ऐसी परिस्थितिया बनी की हमारे अखाड़े के कुछ लड़के दिल्ली में प्लॉट्स के कब्जे छुडाने लगे .....फिर कब्जा छुडाते छुडाते खुद कब्जे करने लगे .....फिर चुनाव हुए तो HKL BHAGAT जैसे नेताओं के साथ घूमने लगे ......... अजय चौटाला जैसे नेताओं से प्रश्रय पाने लगे और देखते ही देखते कुछ पहलवान दिल्ली और हरियाणा के बहुत बड़े बदमाश  बन गए .विष बेल जब बढ़ने लगती है तो बहुत तेजी से बढ़ती है .......... नौबत यहाँ तक आ गयी की बड़े बड़े गैंग बन गए .......... और पहलवान दिल्ली और हरियाणा में इतने बदनाम हो गए की शरीफ लोगों ने अपने बच्चों को पहलवानी करवान बंद कर दिया ....थानेदारों को निर्देश दिया गया की अपने इलाके के सभी अखाड़ों और पहलवानों की सूची बनाएं .......एक बार हरियाणा के एक गाँव में लोगों ने कुछ शरीफ पहलवानों को यूँ ही पीट दिया ......वो ग्रामीण शरीफ लड़कों को भी गुंडा ही मान बैठे थे ......5-7 साल तक यही माहौल रहा .....पहलवानों की इतनी बदनामी हो गयी थी  की इन्हें पुलिस आते जाते भी परेशान करती थी ........फिर उनमे से कई आपस में लड़ मर कर ख़तम हो गए .....कुछ का पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया ......कई आज भी जी खा रहे हैं .......वो दस साल का समय भारतीय कुश्ती का सबसे बुरा समय रहा .....फिर धीरे धीरे माहौल सुधरा ....कुश्ती के समझदार coaches और उस्ताद खलीफाओं ने सख्ती की ...अपने लड़कों  में अनुशासन पे बल दिया ...... धीरे धीरे पहलवानों के शैक्षणिक स्तर  में भी सुधार हुआ ....... अनुशासन सुधरा तो कुश्ती के स्तर में भी सुधार हुआ ......... सुधरे माहौल में लड़के राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय स्तर पे पदक जीतने लगे .....और फिर देखते ही देखते सुशील और योगेश्वर दत्त जैसे नायकों ने कुश्ती और पहलवानों को वो मान सम्मान दिलाया की आज कुश्ती भारतीय समाज में सर्वाधिक लोकप्रिय खेल हैं और सुशील और योगेश्वर की  लोकप्रियता सचिन और धोनी के बराबर हो गयी है .......आज देश अपने पहलवानों पे गर्व करता है .....परन्तु ये भी एक कड़वा सच है की आज भी दिल्ली और हरियाणा का सबसे बड़ा माफिया दिचाऊ गाँव का कृष्ण पहलवान ही कहलाता है और GOW में गुंडे बदमाशों को पहलवान कहा गया है ..........
                                 आज देश में मुसलमानों की  दशा भी पहलवानों  जैसी हो गयी है ........जैसे पहलवान अलग पहचाना जाता है वैसे ही मुसलमान भी .......पहनावा , दाढी ,मूछ , तुर्की टोपी , भाषा , लहजा ...हर चीज़ से अलग पहचान बनती है ...........सदियों तक मुस्लिम आक्रान्ताओं , लुटेरों और शासकों के अत्याचार , कत्ले आम और लूट पाट  भारतीय हिन्दू समाज झेलता रहा है .धार्मिक असहिष्णुता मुस्लिम समाज की मूल समस्या रही है .......रही सही कसर सार्वभौमिक इस्लामिक आतंकवाद ने पूरी कर दी है  ..........सो पूरे विश्व में मुसलामानों की इमेज तो खराब है ही .......देखो भैया इमेज न एक दिन में खराब होती  है न सुधरती है ........ मुस्लिम आतंकवाद और असहिष्णुता और धार्मिक जड़ता ने आम मुसलमान की इमेज भी खराब की है और इसका खामियाजा उसे भुगतना ही पड़ता है . मुस्लिम समाज ने अपनी इमेज एक जाहिल समाज की बना ली है .......जो progressive नहीं है ......आज भी मदरसे में ही पढना चाहता है ....ज़रा ज़रा सी  बात पे सड़क पे आ के फसाद शुरू कर देता है .......अपनी औरतों पे अत्याचार करता है .......काश्मीर में लड़कियों के band पे ban  लगाने से मुसलामानों की क्या इमेज बनी ? ये माना की सभी मुसलमान ऐसे नहीं ....कुछ progressive भी हैं पर उनकी संख्या इतनी कम है और वो बेचारे इतने मूक हैं की उनकी आवाज़ सुनायी ही नहीं देती ........ शाहरूख खान की पीड़ा समझ आती है ..... उन्हें सिर्फ मुसलमान होने के नाते अमेरिका के हवाई अड्डों पे तलाशी और लम्बी पूछताछ से गुजरना पड़ता है .
                                       जैसे पहलवानी में सुशील और योगेश्वर जैसे नायक पैदा हुए और उन्होंने पूरे देश में पहलवानों की इमेज बदल दी वैसे ही मुसलामानों को पूरे विश्व में अपने अन्दर से नायक पैदा करने होंगे जिस से की उनकी खराब हुई इमेज ठीक हो सके .

Wednesday, February 6, 2013

उम्मीद की किरण नज़र आयी है .........

                                        आज दिन की शुरुआत बहुत बुरी रही .वो कोई बीमारी है जो इन्टरनेट और फेसबुक इत्यादि के अत्यधिक प्रयोग से लग जाती है . उसका प्राथमिक लक्षण ये है कि  अगर बन्दा रात को मूतने के लिए उठे और वापस बिस्तर में ना जा कर नेट पे बैठ जाए तो समझ लो गया . सो अपने को ये काफी पहले हो गयी थी .आज अलस्सुबह फेसबुक खोल के बैठ गए और वहाँ चहुँ ओर व्याप्त गाली गुप्ते के माहौल में हिन्दू अखबार के प्रख्यात पत्रकार श्री P SAINATH का लेक्चर खोल लिया यू ट्यूब पे . इसमें उन्होंने हमारे मिडिया जगत में व्याप्त विभत्स भ्रष्टाचार ,अनाचार और दुराचार पे प्रकाश डाला है . ...... 
"Pay-to-print": How Media Corruption Undermines Indian Democracy .......ये रहा लिंक .....( कृपया copy , paste कर लें ) सवा घंटे के लेक्चर में उन्होंने प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की कारगुजारियां उजागर की हैं . मीडिया houses. की blackmailing , extortion , और तमाम अन्य malpractices के बारे में तफसील से बताया है .....पेड न्यूज़ को समझाया है ......उसके ramifications और repurcussions discuss किये हैं ....... अपने 50 साल के जीवन में पहली बार मैंने खुद को बेचारा , बेसहारा और लाचार महसूस किया . बहुत इमोशनल किस्म का आदमी हूँ ....बेबात आंसू आ जाते हैं ........पर जीवन में पहली बार हताशा और निराशा में रोया .........वो लिंक फेसबुक पे डाला ....और जैसा कि  आम तौर पे होता है , गाली गुप्ते और प्रलाप में व्यस्त भाई लोगों ने देखा तक नहीं ....न कोई लाइक न कमेन्ट ..........उस लड़की को friend request भेजी , जिसने वो लिंक डाला  था .......सारा दिन उदास , निराश और तकरीबन depression में रहा .......
                              पर शाम को उम्मीद की किरण नज़र आयी है ......... दिल्ली के SRCC में नरेन्द्र मोदी का युवाओं को संबोधन सुन के फिर कुछ आशा बंधी है ........ उनके मुह से गुजरात के बारे में सुन के अच्छा  लगा ....... मुझे तो यूँ लगा की ये आदमी तो सिर्फ मुझसे ही बात कर रहा है ....इसे पता है की आज मैं बहुत उदास हूँ . सबसे अच्छी बात ये थी की उन्होंने ये आशा जगाई कि यही व्यवस्था, यही कानून .यही सरकार ,यही अफसर ,यही दफ्तर और यही फाइल सब कुछ कर सकती है . सिर्फ एक अच्छी सरकार हो जो pro people हो और good governance दे ......P2G2  ..........सुबह P Sainaath का लेक्चर सुन समझ के आज पूरे प्रसारण में मीडिया की हरमजदगी भी साफ़ दिख रही थी  ....समझ आ रही थी ........ अब मैं फिर उठ बैठा हूँ ....चलने को तैयार .....बहुत दूर जाना है .
 फैज़ की ये नज़्म रूह में जान दाल देती है 

हम देखेंगे
लाज़िम है के हम भी देखेंगे
वो दिन की जिसका वादा है
जो लौहे-अज़ल पे लिखा है

जब जुल्मो-सितम के कोहे-गरां
रूई की तरह उड़ जाएंगे
हम महकूमों के पांव तले
ये धरती धड़-धड़ धड़केगी
और अहले-हिकम के सर ऊपर
जब बिजली कड़-कड़ कड़केगी

जब अर्ज़े-खुदा के काबे से
सब बुत उठवाए जाएंगे
हम अहले-सफा मर्दूदे-हरम
मसनद पे बिठाए जाएंगे
सब ताज उछाले जाएंगे
सब तख्त गिराए जाएंगे

बस नाम रहेग अल्लाह का
जो गायब भी है, हाज़िर भी
जो मंज़र भी है, नाज़िर भी
उठ्ठेगा अनलहक़ का नारा
जो मैं भी हूं और तुम भी हो
और राज़ करेगी खल्क़े-खुदा
जो मैं भी हूं और तुम भी हो

अहले-सफा pure people; अनलहक़ I am Truth, I am God. Sufi Mansoor was hanged for saying it; अज़ल eternity, beginning (opp abad); खल्क़ the people, mankind, creation; लौह a tablet, a board, a plank; महकूम a subject, a subordinate; मंज़र spectacle, a scene, a view; मर्दूद rejected, excluded, abandoned, outcast; नाज़िर spectator, reader


Tuesday, February 5, 2013

सैर कर दुनिया की गाफिल , जिंदगानी फिर कहाँ

                                                   मेरे दो दोस्तों ने ग़दर मचा रखा है . एक हैं Tarun Goyal . श्री मान जी इंजिनियर हैं .ऐसे वैसे नहीं , सचमुच के .........क्योंकि आजकल तो BTech करने वालों ने भी ग़दर मचा रखा है .......जिसे देखो वही BTech लिए घूम रहा है .....घर घर खुल गए हैं इंजीनियरिंग कालेज ....साली BTech की तो कोई इज्ज़त ही नहीं रही ........MBA से भी गए गुजरे हो गए . खैर मुद्दे पर वापस आते हैं . तो तरुण गोयल साहब इंजिनियर बन के अब घूमने निकल पड़े हैं . घुमक्कड़ी का भूत सवार हो गया है . सुना है की अभी 6 महीने हिमालय पे घूम के आये हैं .....फिर सुनते हैं की पकिस्तान चले गए थे .......बेचारे माँ बाप ....... क्या बीतती होगी उनके दिल पे ........एक दुसरे हैं जनाब नीरज जाट जी ........वो तो बड़े बदनाम घुमक्कड़ हैं ......... कई बार मैं सोचता हूँ की ये METRO वाले इसे बर्दाश्त कैसे करते होंगे . इतनी छुट्टी इसे मिलती कैसे होगी ......... नीरज जाट  के ब्लॉग पे उनकी अलमस्त घुमक्कड़ी पे कई कमेंट्स पढने को मिलते हैं .........टूरिस्ट किस्म के लोग उन्हें समझ नहीं पाते .....लिखते हैं की क्या फ़ालतू का घूम रहे हो ....वो बेचारे सफ़ाइयाँ देते फिरते हैं ....अरे भाई टूरिज्म और घुमक्कड़ी में फर्क होता है ......क्या फर्क होता  है .......
                                       इसके अलावा एक और लड़की है जिसने मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री में ग़दर मचा रखा है . वो है स्नेहा खानवलकर . पिछले साल रिलीज़ हुई अनुराग कश्यप की बहु चर्चित फिल्म gangs of wasseypur में उन्होंने म्यूजिक दिया है जिसकी चहु ओर प्रशंसा हो रही है . पिछले दिनों उनका एक इंटरव्यू देख रहा था मैं . वो बता रही थी की अपनी फिल्मों का म्यूजिक तैयार करने के लिए वो सारे हिन्दुस्तान और सारी दुनिया में घूमती हैं . फिर वो बताती हैं की उनका बचपन इंदौर में बीता , एक साधारण मिडिल क्लास परिवार में , और उन्हें बचपन में बिलकुल घूमने को नहीं मिला .उम्र इंदौर में ही बीत गयी . फिर जब फिल्म इंडस्ट्री  में काम करने का मौक़ा मिला तो profession की मांग ही ऐसी थी जहां उन्हें  दुनिया जहान की music , sounds और beats को जानने की ज़रुरत थी . और वो थी कूप मंडूक .सो वो निकल पडी दुनिया घूमने .अकेली ही . उन्हें दिबाकर बनर्जी की फिल्म oye lucky .........lucky oye में एक रागिनी कंपोज़ करनी थी , जिसके लिए वो 6 महीना पंजाब में घूमती रही .....सैकड़ों गायकों से मिली पर वो रागिनी मिलती भी कैसे .....क्योंकि वो तो हरियाणवी थी ......तू राजा की राज दुलारी ........फिर अंत में उन्हें वो हरियाणा में मिली .........सो वो GOW के लिए पूरा UP  ,Bihar  ,Mauritius, Trinidad & Tobago हर उस जगह पे घूमी जहां हिंदी और भोजपुरी भाषी बसते हैं . और वो शहरों में नहीं बल्कि गाँव गाँव , गली गली , बस्तियों और झोपड़ियों में घूमती फिरी , और इस मेहनत के बाद जो म्यूजिक उन्होंने तैयार किया उसने दुनिया का दिल जीत लिया .
                                      दुनिया में ज़्यादातर लोग घूमना फिरना पसंद करते हैं . पर वो टूरिस्ट होते हैं . घुमक्कड़ नहीं . दरअसल टूरिस्ट तो बड़ा बेचारा किस्म का जीव होता है . अवध के नवाब वाजिद अली शाह जैसा . जब अवध पे अंग्रेजों ने हमला किया तो नवाब साहब सिर्फ इसलिए न भाग पाए क्योंकि महल में कोई उन्हें जूते पहनाने वाला न था . लखनऊ की बात चली तो  मुझे एक बड़ा मजेदार किस्सा याद आता है .उन दिनों हम लखनऊ में रहते थे .एक शाम मैंने यूँ ही धर्मपत्नी के कान में धीरे से कहा .....नैनीताल चलोगी ?और उसने मुंडी हिला दी . तो फिर चल 5 मिनट में तैयार हो जा . 9 बजे की ट्रेन है . 8.30 बज चुके थे .2 मिनट में बैग में कपडे ठूसे , और भाग लिए पकड़ा .........किसी तरह भागते हुए स्टेशन पहुंचे ....... उन दिनों वो लालकुआं एक्सप्रेस चारबाग़ छोटी लाइन से चला करती थी . वहाँ पहुंचे तो गार्ड हरी झंडी दिखा रहा था और ट्रेन चल पड़ी थी .......... किसी तरह भागते पड़ते गार्ड के डब्बे में ही चढ़ गए .....वो बेचारा भी हमें देख के ही डर गया ........खैर 5 मिनट बाद ट्रेन जब ऐशबाग रुकी तो उतर के अगले डिब्बे में गए .....TTE के कान में गुरु मंत्र मारा और उसने 2 सीट दे दी . सुबह लालकुआ उतरे , टैक्सी पकड़ के नैनी ताल गए . दो दिन वहाँ मस्ती से घूमे फिरे  और लखनऊ वापस ...........ये तो हुई घुमक्कड़ी ...... अब अगर इसे टूरिज्म का रूप दिया जाए तो कहानी कुछ यूँ होती ......धर्म पत्नी 2 महीने से मेरा सर खाती .....घूमने चलो घूमने चलो .....अच्छा कहाँ जाना है ....नैनीताल .......नहीं   .... मसूरी ....नहीं ....शिमला ....नहीं .....ऊटी ....15 दिन में तो जगह decide होती ....फिर reservation........  मिलता न मिलता ......AC 3 टियर ....नहीं 2 टियर ....स्लीपर में नहीं जाउंगी ....जान दे दूंगी ....ख़ुदकुशी कर लुंगी ......स्लीपर में नहीं जाउंगी ........चलो जी , अब रिजर्वेशन हो गया ....अब होटल बुक करो ........टैक्सी .....पैकिंग ...कपडे ....लहंगा ....घाघरा .......सैंडल ........ वहाँ नाश्ते में maggi खाई ....दिन में शाही पनीर के साथ लच्छा पराँठा ........घोड़े पे चढ़े , फोटो खिचाया , शाल खरीदा ....घर वापस .....हो गया टूरिज्म .

कहने का मतलब की टूरिस्ट बेचारा घूमते फिरते भी अपने comfort zone से बाहर नहीं निकलना चाहता . आम तौर पे टूरिज्म से रहस्य , रोमांच , मस्ती और फक्कडपन गायब होता है . घुमक्कड़ बड़ा मस्त जीव होता है . वो बिना कारण के घूमता है।  बिना प्लानिंग के घूमता है . बिना बजट के घूमता है . सो के, बैठ के, खडा हो के, लटक के , छत पे बैठ के यात्रा करता है . ट्रक ,बस, साइकिल ,बैलगाड़ी, ट्रेक्टर, जहां मर्जी लटक लेगा .....लिफ्ट मांग लेगा . गंदे कपडे पहने , दाढ़ी बढाए ,कही भी सो जायेगा , खा लेगा . किसी का भी मेहमान हो जायेगा . जाना था कही ,और पहुँच गया कही और ........स्थानीय लोगों से मिलेगा जुलेग ....स्थानीय भोजन खायेगा .......वहाँ की सभ्यता और संस्कृति को महसूस करेगा . लोक रीत और लोक संगीत जानेगा ......टूरिस्ट जेब भर के घर से निकलता है और खाली हाथ घर लौट आता है ...........घुमक्कड़ खाली हाथ घर से निकल पड़ता है और अनुभवों का खजाना लिए वापस लौटता है।  अक्सर लोग कहा करते हैं की travelling is the best education ........पर अवश्य उनका आशय घुमक्कड़ी से होगा न की टूरिज्म  से .

                                            मैं जब Tarun Goyal , Neeraj Jat और Sneha khanwilkar की घुमक्कड़ी के किस्से पढता हूँ तो मुझे बीते जमाने के मूर्धन्य साहित्यकार राहुल सांकृत्यायन का ख्याल आता है जिन्होंने पूरी दुनिया पैदल ही घूम डाली , 36 भाषाओं के ज्ञाता हुए और हिंदी एवं बौद्ध साहित्य के प्रकांड विद्वान् हुए . उन्होंने अपने पूरे जीवन का निचोड़ ही यायावरी ....यानी घुमक्कड़ी को बताया . उन्होंने घुमक्कड़ी के धर्म को सभी धर्मों का आधारभूत धर्म कहा है और पर्यटन की प्रकृति को संसार का सबसे बड़ा सुख बताया है। आपके अनुसार घुमक्कड़ी की महिमा किसी शास्त्र से कम नहीं है। राहुल जी ने संसार के अनेक महापुरूषों की सफलता का रहस्य घुमक्कड़ी को ही बताया है और कोलंबो, डार्विन, वास्कोडिगामा, बुद्ध, महावीर, शंकराचार्य, रामानुज, गुरू नानक आदि का उदाहरण सभी क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ योगदान के लिये दिया है। वस्तुत: आपके विचारों का आशय यह है कि नई-नई जगहों पर नये-नये देशों मे घूमने से व्यक्ति विभिन्न लोगों और उनकी सभ्यता तथा संस्कृति के संपर्क में आता है और इस प्रकार बहुत कुछ सीखने एवं जानने का मौका उसे मिलता है।   किसी शायर ने ठीक ही कहा है ............
                          सैर कर दुनिया की गाफिल  , जिंदगानी फिर कहाँ 
                           जिंदगानी गर रही तो , नौजवानी फिर कहाँ 

Monday, February 4, 2013

मुस्लिम वोट का समाज शास्त्र

बात यूँ है की इतने बड़े मुल्क में ले दे के दो ही तो समाज शास्त्री थे . एक अपने नंदी साहब और एक मैं . अब नंदी साहब तो रहे नहीं .वो तो वहाँ जयपुर में literfest में फ़ौत  हो गए .........अच्छे भले ठीक ठाक थे .अच्छा खासा lecture दे रहे थे . पर वहीं न जाने क्या हुआ , बेचारे के मुह में कपड़ा ठूंस दिया लोगों ने . दम घुट गया बेचारे का . इंतकाल फरमा गए . अब ले दे के मैं बचा हूँ ,सारी  जिम्मेवारी अब मेरे ही ऊपर है . चिंतन मनन करने की .  जब से सच्चर कमिटी की रिपोर्ट आई है लोगबाग परेशान हैं . और मुद्दा सचमुच है भी परेशानी का . सच्चर साहब ने कह दिया की मुसलमान हर field में पिछड़ा है . हर parameter से पिछड़ा है . अब सच्चर साहब ने कोई नई बात तो कही नहीं .सब जानते हैं .हम भी जानते हैं मुसलमान भी जानता है .कि वो पिछड़ा है .क्यों पिछड़ा है , ये पूरी तरह समाज शास्त्र का विषय है। डाक्टर को मरीज से सच बोलना पड़ता है . और सच बोलने पे लोग बाग़ बेचारे के मुह में कपड़ा ठूंस देते हैं .
                                       असहिष्णु समाज में सच बोलना खतरे से खाली नहीं . पर अगर समस्या को हल करना है तो सच तो बोलना ही पड़ेगा . और सच ये है की मुसलमान के पिछड़ने का पहला कारण अशिक्षा .जो  पढ़ लिख जाएगा वो पिछड़ा रह ही नहीं सकता . मुसलमान का मदरसा बंद करो और उसे अनिवार्य रूप से modern education दो . जो नहीं मानता उसे चार हाथ लगा के , साले को बाँध के पढ़ाओ . दूसरा ...परिवार नियोजन ......... बीवी एक बच्चे दो . जिस परिवार में 14 बच्चे होंगे वो क्या खाक तरक्की करेगा .तीसरा , पर्दा .....मुसलमान औरत को परदे से बाहर निकालो और उसे पढाओ . चौथा .....मुसलमान को समाज की मुख्य धारा में शामिल करो . उसे बताओ की अब तू कुछ दिन मियाँ जी न बन , भाई साहब बन जा . उसकी लुंगी उतार के पैंट पहनाओ . तुर्की टोपी उतारो . शेव करो . साले को फ्रेंच कट रखाओ .ये लम्बी लम्बी मूछ रखाओ .पर ये दाढ़ी बढ़ा के  मूछ मुड़ाने वाला सिस्टम बंद करो . उसे समझाओ की तू कुछ दिन के लिए आदमी बन जा . तुझे देख के ये पता न लगे की तू मुसलमान है . तू एक आम हिन्दुस्तानी बन जा . उसकी जुमे की नमाज़ बंद कराओ . बोलो मस्जिद में नहीं , जा घर में पढ़ . जुमे को वो मौलाना की तक़रीर का जो वीकली डोज़ है उसे बंद करो . हर हफ्ते बेचारे को गरम कर देते हैं ...........कुछ दिन ठंडा होने दो . जिस दिन मुसलमान ठंडा हो गया , पढ़ लिख गया , समाज की मुख्य धारा में शामिल हो गया , उस दिन अपने आप अगड़ा हो जायेगा , खायेगा पीएगा तगड़ा हो जाएगा .
                                         देखो भैया , हम तो डाक्टर हैं .हमने तो blood test किया था . जो रिपोर्ट आई पढ़ के सुना दी . दवाई का पुर्जा लिख दिया . लो करा लो इलाज .पर इसमें एक दिक्कत है . वो यूँ की मुसलमान तो बेचारा परेशान है .उसका तो पेट जल रहा है .वो तो करा भी लेगा इलाज . पर उसके जो बाप लोग बैठे हैं न , ठेकेदार बन के , वो नहीं कराने देंगे . मौलाना न उसे पढने देगा , न नसबंदी कराने देगा , न उसकी बीवी को बुर्का उतारने देगा न उसकी तुर्की टोपी उतरने देगा . बुरका और टोपी उतारते ही इस्लाम खतरे में जो पड़  जाता है . पकिस्तान में पूरी किरकिट टीम को दाढ़ी रखवा दी मौलाना ने . और अगर मौलाना इन चार इलाज पे मान भी जाए तो ये जो उसके बाप बैठे हैं न . लालू , मुलायम , नितीश कुमार और सोनिया गांधी जैसे लोग  , ये नहीं होने देंगे .क्योंकि पढ़ा लिखा अगड़ा तगड़ा मुसलमान इन्हें सूट नहीं करता . क्योंकि इन्हें चाहिए मुसलमान का वोट , वो भी थोक में . अब थोक में कौन वोट देगा . भेंड बकरियों के रेवड़  हुआ करते हैं  . शेर तो अकेला ही मस्त पड़ा रहता है जंगल में . जाहिल , अनपढ़ ,दबा कुचला और डरा सहमा  आदमी ही Ghettos में झुण्ड बना के रहता है . हमारी पोलिटिकल लीडरशिप को भी डरा सहमा मुसलमान ही सूट  करता है। वो जो बीजेपी और RSS से डरा रहे , और कांग्रेस ,सपा , बसपा,और JDU को थोक में वोट देता रहे . और मुसलमान को डराने का सबसे बड़ा हथियार इन लोगों ने मोदी को बना दिया है .......... वो देखो .......मोदी आ रहा है ....... तुम्हे कच्चा खा जाएगा . बीजेपी ......तुम्हे कच्चा खा जाएगी .....इसलिए हमें वोट दो ........ और बेचारा मुसलमान इनके झांसे में आ के इन्हें एकमुश्त वोट डाल आता है।
                                      बचपन में landline फोन हुआ करते थे . हमारे शहर में एक लाला जी हुआ करते थे . उनको हम लोग फोन करके छेड़  देते थे। और फिर वो शुरू हो जाते . ये मोटी  मोटी  गालियाँ देते . चीखते चिल्लाते . हमें बड़ा मज़ा आता .अपना तो फ्री का entertainment था . फिर हमने उनका नंबर अपने और कई दोस्तों  को दे दिया। कुछ दिन पूरे शहर ने उनके मजे लिए . पर कुछ महीनों बाद वो कुछ बीमार पड़  गए और उन्होंने गद्दी पे बैठना छोड़ दिया . अब उस नंबर पे फोन करने पे कोई रेस्पोंस न मिलता . एक आदमी था जो तुरंत फोन काट देता था . हमारा entertainment बंद हो गया . हमने भी फोन करना बंद कर दिया .
                                       डरा सहमा मुसलमान , जाहिल बन कर, जब तक इन पार्टियों को एकमुश्त वोट देता रहेगा , ये तब तक उसे जाहिल ही बना के रखेंगी .डरा सहमा जाहिल मुसलमान कांग्रेस को सूट करता है .पढ़ा लिखा अगड़ा तगड़ा मुसलमान BJP को सूट करता है .  गुजरात में मुसलमान ने मोदी और बीजेपी के राज में रह के देख लिया है .अब वहाँ उसे बीजेपी और मोदी से डर नहीं लगता। इसी लिए वहाँ 32% मुसलामानों ने बीजेपी को वोट दिया है . जिस दिन वो कांग्रेस को एक मुश्त वोट देना बंद कर देगा , इनके किसी काम का नहीं रहेगा . और इनके चंगुल से छूट जायेगा .


Ohh India ....A big heap of garbage

                                              दोस्तों ये एक पूर्णतः सत्य घटना है . उन दिनों हम मियां बीवी  यहाँ पंजाब में नज़दीक के एक शहर में insurance  companies  में काम करते थे .हम दोनों के दफ्तर लगभग अगल बगल ही थे . धर्म पत्नी के दफ्तर का मेनेजर और बाकी सब लोग अपने यार दोस्त ही थे , सो अपना तो ज्यादा टाइम अपने दफ्तर में कम और उनके यहाँ ज्यादा बीतता था . एक दिन मैं  दोपहर बाद जब वहाँ पहुंचा तो वहाँ का नज़ारा देखने लायक था .पूरे ऑफिस  में तकरीबन हर टेबल पे जूठी प्लेटें , ग्लास , tissue  papers  और polythenes पड़े थे .  फिर भी सब कर्मचारी निर्विकार भाव से , पूरी तन्मयता के साथ अपने अपने काम में लगे हुए थे . अपने देश वासियों की कर्तव्य निष्ठा , मेहनत और लगन देख के मेरा तो दिल बाग़ बाग़ हो गया . दरअसल पिछली रात ऑफिस  में कोई पार्टी हुई थी . और लोग खा पी के चलते बने थे . कंपनी की ये ब्रांच नई नई ही खुली थी सो कोई पक्का हेल्पिंग स्टाफ नहीं था .अगले दिन सब लोग जब काम पे आये तो पूरा ऑफिस गन्दा ही पड़ा था . भाई लोग आये और सच्चे कर्मयोगी की तरह काम में जुट गए .जब मैं बाद दोपहर वहाँ पहुंचा तो मुझे बड़ा अजीब सा लगा . धर्म पत्नी  भी अपनी टेबल पे विराजमान थीं और कार्य रत थी .मैंने धीरे से उनके कान में कहा " ये क्या माजरा है . इसे तुम साफ़ करती हो या मैं करूँ ...........अगर मैं करूंगा तो तुम लोगों की ज्यादा बेइज्ज़ती होगी . और वो एकदम आज्ञाकारी पत्नी की तरह तुरंत जुट गयी . जैसे ही वो जुटी , दो और साथ लग गए . फिर सारे आ गए .दो मिनट में ही सारा कूड़ा करकट फेंक दिया . फिर झाड़ू उठायी , फिनाइल डाल के पोंछा लगाया और 5 -7  मिनट बाद सारी ब्रांच चम् चम् चमक रही थी . इस दौरान मैं अपने दोस्त मेनेजर के साथ उसके केबिन में बैठा था . वो कुछ शर्मिंदा भी था और बहुत खुश भी था .
                                         आजकल पंजाब को मिनी यूरोप कहा जाता है .क्योंकि लगभग आधा पंजाब तो वहाँ दूर पश्चिमी देशों में जा के बस गया है . वहाँ लोग दिन रात मेहनत  मजदूरी कर के अपना जीवन संवार रहे हैं . पंजाब में जो सम्पन्नता दिखती है उसका ज़्यादातर श्रेय NRI पंजाबियों को ही जाता है . वो घर आ के वहाँ के किस्से सुनाते ही हैं . और हम लोग आश्चर्य चकित हो सुनते हैं . मेरे एक मित्र कनाडा में रहते हैं . एक बार उन्होंने मुझे बताया की मेरे दफ्तर में हम लोगों की साप्ताहिक ड्यूटी लगती है साफ़ सफाई की . जिसकी ड्यूटी होती  है वो उस दिन आधा घंटा पहले आ के पूरी सफाई करता है , झाड़ू पोंछा करता है , टेबल साफ़ करता है , शीशे साफ़ करता है , टॉयलेट्स को भी साफ़ करता है .मज़े की बात ये की सिर्फ कर्मचारी ही नहीं मालिक की भी टर्न आती है .  एक और किस्सा सुनाया उन्होंने . जब किसी के घर में कोई पार्टी या डिनर होता है तो भाई लोग अपनी अपनी दारु ले के आते हैं . खाना पीना खा के फिर सब लोग काम में जुट जाते हैं . कुछ लोग पूरे बर्तन साफ़ करते हैं , सारी  सफाई करते हैं .कहने का मतलब जाने से पहले मेजबान का घर और रसोई एकदम चमा चम् . पाश्चात्य सभ्यता , जिसे हम भारतीय आमतौर से हिकारत से ही देखते हैं , के पास हमें सिखाने के लिए बहुत कुछ है . अफ़सोस की उनके दुर्गुण तो हम तकरीबन सारे सीख ही चुके है पर जो गुण है उनसे पूरी तरह अछूते हैं .देश वासियों को  hygene , cleanliness , garbage disposal की शिक्षा युद्ध स्तर पे दिया जाना बहुत ज़रूरी है . हमारे education सिस्टम में इसे बड़े पैमाने पे शामिल करने की


Sunday, February 3, 2013

तेरा इमोसनल अत्याचार.........

                                                   पुराने ज़माने में हमारे देश में बड़ी सामाजिक किस्म की फिल्में बना करती थी . शरीफ सी हिरोइन होती थी , साडी पहनती थी . सर पे पल्लू रखती थी .और हाँ ब्लाउज भी ठीक वाला होता था .आज जैसा नहीं . अभी हाल की बात है .मैं अपनी बीवी के साथ कही जा रहा था . वहाँ Radisson Hotel के सामने एक नव यौवना दिखी .साड़ी पहने . भैया मैं तो हक्का बक्का रह गया .भला ऐसा भी कभी होता है कि  लड़की ब्रा के ऊपर blouse पहनना ही भूल जाए . फिर मेरी बीवी ने मेरा ज्ञान वर्धन किया कि  नहीं पतिदेव ये जिसे तुम ब्रा समझ रहे हो दरअसल वो ब्लाउज ही है .....नए ज़माने का . सो पुराने ज़माने में फिल्मों में हिरोइन कायदे से ब्लाउज वगैरह पहन के गाना गाती थी . फिल्में ज़्यादातर इमोसनल किस्म की होती थी .रोना धोना मचा रहता था .रो रो के लोगों के रुमाल भीग जाया करते थे .रोने धोने वाली फिल्म  सुपर डुपर हिट होती थी . ऐसा नहीं था की मार धाड़ वाली फिल्म नहीं बनती थी . मार धाड़ में भी इमोसन का डोज़ भरपूर होता था . मसलन बच्चे माँ  से बिछड़ जाते थे . हीरो कमबख्त सब कुछ करता , इश्क लड़ाता , गुंडों को पीटता और लगे हाथ माँ  को भी याद कर के रो लेता था  . पर आजकल अपनी फिल्म इंडस्ट्री में ये जो साले नए लौंडे आये हैं , इन्होने सब भ्रष्ट कर के रख दिया है . cultural भ्रष्टाचार मचा रखा है . इमोशनल अत्याचार का ज़माना नहीं रहा अब . अब realistic फिल्में बनती हैं . हकीक़त के नज़दीक . हीरो तो हीरो ,अब तो हेरोइन भी बहिन मतारी गरिया रही है . बेचारी माँ बहनों के देखने लायक तो रही ही नहीं फिल्में .
                                        पर मुझे इस घोर घुप्प अँधेरे में उजाले की किरण नज़र आती है . पुरानी हेरोइन वाला समय जल्दी लौट के आएगा . सुगबुगाहाट शुरू हो गयी है .सब लोगों को तो नहीं दिखता होगा पर मुझ जैसे मूर्धन्य समाज शास्त्री तो बदलती हवा सूंघ ही लिया करते हैं . मैं इधर देख रहा हूँ की इमोसनल फिल्मों का दौर लौट रहा है .नयी scripts लिखी जा रही हैं .....बनी बनाई फिल्मों में नए scenes जोड़े जा रहे हैं . इमोसन का तडका लग रहा है .  हाल ही में रिलीज़ हुई एक फिल्म  के इस सीन पे गौर फरमाइए ......बेचारी विधवा माँ सफ़ेद साड़ी पहन , पल्लू सर पे लिए , जा रही है . उसका अनाथ , टूअर बेटा पल्लू पकड़ के साथ चल रहा है . वो उस लड़की के घर जा रहे हैं जिसकी हाल ही में gang rape के बाद ह्त्या हो गयी थी . वहाँ एक माँ ने दूसरी को गले लगा लिया . दोनों की आँख से आंसू बह चले . पीछे से रेणुका चौधरी running कमेन्ट्री सुनाने लगी ..........लाइव टेलीकास्ट हो ही रहा था .....फिर लड़की की माँ बोली , मैं आपका दुःख समझ सकती हूँ ......आपने भी इतना कुछ खोया है .......देश के लिए ......... बेक ग्राउंड म्यूजिक .....सारंगी ........ अब मेरे बच्चे आपके बच्चे हैं ........ लड़की के भाई  अनाथ युवराज से लिपट गए ....रोने लगे .....रेणुका चौधरी ने रुमाल थमाया .....विधवा माँ ने दिवंगत लड़की की physiotherapy की किताबों को छुआ .....कपड़ों को सहलाया ......... इमोसन का तडका .......अंग अंग फड़का ...... फिल्म ब्लाक बस्टर ........
                          ऐसी ही एक फिल्म पिछले हफ्ते रिलीज़ हुई थी , जयपुर में . सुनते हैं की उसमे रिलीज़ से एन पहले इमोसन एक्सपर्ट ने एक सीन जोड़ा था .........  हीरो को वीरता पुरस्कार दिया जा रहा है .......वो  माइक पे बोल रहा है ....... सुबक ...सुबक .....कल रात मेरी माँ .....रोने लगी बेचारी ....सुबक ....... और फिर हॉल में बैठे सारे रण बाँकुरे भी , मारे इमोसन के , सुबकने लगे ........ बरखा दत्त भी इमोसनल हो गयी , अनुराधा प्रसाद शुक्ला तो दहाड़ मार के रोने लगीं . फिर बेटा जब स्टेज से भारत रतन ले के उतरा तो माँ ने गले लगा लिया .......कट ...कट ...कट .
                              एक और फिल्म पे नज़र डालिए ........कुछ महीने पहले आज़मगढ़ में रिलीज़ हुई थी . उसमे लीड रोल में अपने सलमान भाई थे ........ नहीं नहीं ....सलमान खान नहीं .....नहीं यार सलमान रुश्दी भी नहीं .....उनको ले के तो  हिन्दुस्तान में  फिल्म बन ही नहीं  सकती .....उसमे हीरो थे अपने सलमान फर्रुखा बादी ........वहाँ उन्होंने बेचारे कुछ victim किस्म के मुसलामानों की सभा में बताया की राजमाता तो दिल्ली में एनकाउंटर की फोटो देख के इमोसनल हो गयी थी  .....मारे इमोसन के रोने लग गयी ....... सो आप लोग अब वोट दे दो . पर वहाँ कनफूजन मच गया . एनकाउंटर में एक पुलिस वाला भी मरा था . सो लोग बाग़ समझ ही न पाए की राज माता जो रोई थी वो terrorist की फोटो देख के रोई थी या पुलिस वाले की लाश देख के ....सो इस कनफूजन में फिल्म पिट गयी ......सुपर फ्लॉप ........
                               फिल्म इंडस्ट्री में घमासान  मचा है ..........10 जनपथ productions से  इमोसनल फिल्में धडा  धड रिलीज़ हो रही हैं ....... उधर साले अनुराग कश्यप ने गाली गुप्ता मचा रखा है . माँ  बहन से नीचे बात ही नहीं करता .......... अब देखना है की पब्लिक माँ बहन एक करती है या रुमाल गीले .......... अंत में मुझे Gangs Of Wasseypur फिल्म का वो डायलाग याद आता है .....जिसमे रामाधीर सिंह कहता है ...........सबके दिमाग में अपनी अपनी फिल्म चल रही है ............जब तक ये फिल्में बनती रहेंगी .....पब्लिक चूतिया बनती रहेगी ..........

Saturday, February 2, 2013

अरे ....राजा तो नंगा है

                                        फेस बुक ने हमारे जैसे ठलुओं का कल्याण कर दिया है . इसने हमें वो आजादी दी जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते थे . भगवान् ने दो ही किस्म के प्राणी आज़ाद पैदा किये . एक हिन्दू और एक ये फेसबुकिये . जी हाँ हिन्दुत्व ही एक मात्र ऐसा धर्म है जिसने अपने चेलों को पूरी आजादी दी है ........भगवान् ने जब हिन्दू बनाया तो उसे बोला .....जा बेटा ,ऐश कर .......... जिसे मर्जी पूजना है पूज .....और जिसपे चाहे .......... मूत दे ...... जा तुझे 33 करोड़ देवी देवता दिए ......पूज जिसे मर्ज़ी , और इनमे कोई भी पसंद ना आये तो नए बना ले .........33 करोड़ आइटम का बुफे ......साथ में alacart भी .....वाह .....और उसपे सोने में सुहाग क्या ? जैसे मर्जी पूज ....कोई fixed पूजा पद्धति नहीं ...... आरती उतार , हवन कर , नंगा घूम , सर मुड़वा ले , जटा जूट रख ले . बकरा काट के बलि चढ़ा . दारु की बोतल चढ़ा , फिर छक के पी .....या फिर कोई नया तरीका निकाल ले भक्ति का ....जैसे यहाँ पंजाब में निकाल रखा है लोगों ने ....जागरण कराने का .....भक्ति की भक्ति ....बिजनेस का बिजनेस ......... इसके अलावा कोई fixed किताब नहीं .....वेद , उपनिषद , पुराण , गीता , रामायण , ऐसी न जाने कितनी हैं .........और इनमे से कोई पसंद नहीं ....कोई बात नहीं ......नयी लिख ले बेटा ....अपने लिए .
                                  जो आजादी हमें हिन्दुओं को दी भगवान् ने , वो अल्लाह मियाँ ने नहीं दी मुसलामानों को . इस मामले में बड़ा तंग दिल और संग दिल निकला अल्लाह . ले दे के एक किताब , एक अल्लाह और बस फकत एक  पैगम्बर , यहाँ हम साले रोज़ नया पैगम्बर पैदा कर देते हैं .........आंबेडकर भगवान् हो गए , कुछ दिन में मायावती हो जाएँगी , रजनीकांत हैं ही साउथ में . मुंबई में बाल ठाकरे हुआ करते थे . इस्लाम में पैगम्बर  को और किताब को गरिया नहीं सकते .......blesphemy का कानून लागू हो जाता है .......या फिर लोगबाग खुद ही कानून बना के काट देते हैं बन्दे को ........हिन्दुत्व में इस मामले में बड़ी आजादी है ....जिसे मर्जी खरकचो .......जम के गरियाओ ....एकदम बिंदास .....कोई साला क्या उखाड़ लेगा .......और अगर कोई रोके टोके तो उसे भी गरियाओ .......कालर पकड़ लो .......कौन है बे तू .......तू कब का ठेकेदार हुआ बे हमारा .....हम ठहरे आज़ाद मुल्क के आज़ाद बाशिंदे .....हिन्दू धर्म ने अपने अनुयायियों को बेइन्तहा आजादी दी , सोचने की , समझने की , व्याख्या की ,  नयी सोच पैदा करने , संशोधन करने की आलोचना करने की और नकार देने की . हिन्दुत्व समय के साथ बदलता रहा , grow करता रहा . यहाँ महावीर हुए , बुद्ध  हुए , फिर वामी हुए .....वाम मार्ग यानी लेफ्टिस्ट ( गुरुदत्त का विख्यात उपन्यास वाममार्ग पढ़ें ) जिन्होंने फ्री और open sex को प्रमोट किया .......एक तरफ जहां सांख्य और मीमांसा हुए तो चार्वाक भी हुए .......और अभी हाल ही में नानक और गुरु गोविन्द हुए .......ये सब हिन्दुत्व की independence  के Byeproducts  हैं . पर इधर सिख कुछ कुछ इस्लाम की तरह behave करने की कोशिश कर रहे हैं .......अभी आवाज़ उठी है की यदि कोई गुरु ग्रन्थ साहब का अपमान करता है तो धारा 302 में मामला दर्ज होना चाहिए ............ क्योंकि किसी चूतिया  टाइप सुप्रीम कोर्ट के जज ने फैसला दिया होगा कभी , की ग्रन्थ साहब एक Living guru हैं .........सो SGPC के कोई महानुभाव बोल रहे हैं की गुरु का अपमान करने पे 302 लगाओ .....मैंने एक जगह कह दिया , अबे  302 तो हत्या करने पे लगती है ....... अपमान करने पे तो यूँ ही compromise हो जाता है .......इसके बाद मैंने किसी तरह जान बचाई वरना उनपे 302 ज़रूर लग जाता . ........ blesphemy वाले कानून की बू आती है इसमें ........पंजाब को पाकिस्तान बनाना चाहते हैं सरदार जी लोग .
                                     तो साहब , दरअसल  बात शुरू हुई थी फेसबुक से  . सो इन्टरनेट ने नया दीन  ईजाद किया है .........facebookism ...........पूरी आजादी है भैया .........जिसे मर्ज़ी पूजो और जिसे मर्जी गरियाओ .......पर इस्लाम और सोनिया को ये आजादी रास नहीं आ रही है ........ ईश निंदा बर्दाश्त नहीं ..........एक बार हरिद्वार के कुम्भ मेले में कोई धर्म संसद बैठी और उसमे किसी ढोंगी शंकराचार्य ने सुझाव रखा की जैसे सिखों को अकाल तख़्त और मुसलामानों को मक्का से कण्ट्रोल किया जाता है वैसे ही हिन्दुओं की भी एक शीर्ष संस्था होनी चाहिए जो हिन्दुओं पे नियंत्रण रखेगी .......... तो हमारे जैसे आज़ाद पंछियों ने तुरंत जवाब दिया की तू है कौन बे हमें कण्ट्रोल करने वाला .........साले तेरी दाढ़ी और तेरा ये धर्म , दोनों तेरे चूतड़ों में डाल देंगे .......... हम फेसबुक पे ये बता देते हैं की कोई हमारा ठेकेदार बनने की कोशिश ना करे
                                    भारत सरकार फेसबुक , ट्विटर और सोशल मीडिया की आजादी और बढ़ती हुई ताकत से बेहद डरे हुए हैं . पूरी दुनिया में इस्लाम और मुहम्मद साहब के खिलाफ बोलने और इनकी आलोचना करने की हिम्मत कोई जुटा नहीं पाता था कल तक ............ आज लोगबाग खुल के बोल रहे हैं ........ इस्लाम ने आज तक  मुसलमानों  को इतना दबा के,  कुचल के और डरा के रखा की वो कभी अपनी विसंगतियों के बारे में सोच समझ ही नहीं पाए ........... पर इन्टरनेट , youtube और फेसबुक ने अचानक सब कुछ खोल के रख दिया है ......अब लोगबाग खुल के लिख बोल रहे हैं और मुसलमानों समेत सारी  दुनिया पढ़ सुन रही है ......मुस्लिम लीडरशिप को डर है की कहीं मुसलमान की आँख न खुल जाए .........कही उसे भी हिन्दुओं वाली आजादी की लत न पड जाए .........कल को कोई बच्चा  भरी  महफ़िल में ये न कह बैठे  की , अरे .....राजा तो नंगा है , और राजा  नंगा है , ये बात उस बच्चे को सिर्फ सोशल मिडिया ही बता सकता है .......... मुस्लिम लीडरशिप ने खतरा भांप लिया है . वो सरकार पे इन्टरनेट और सोशल मिडिया को दबाने के लिए दबाव डाल रही है .......... दूसरे भारत सरकार और खुद सोनिया गाँधी , सोशल मीडिया में भ्रष्टाचार पे अपनी आलोचना से परेशान हैं . कोढ़ में खाज यूँ  हो गयी है की  नरेन्द्र मोदी सोशल मीडिया में बेहद लोकप्रिय हैं और राहुल बाबा  एकदम फिसड्डी .......... भारत सरकार मुस्लिम तुष्टीकरण और खुद अपना उल्लू सीधा करने के लिए सोशल  मीडिया  को नियंत्रित करना चाहती है . आगे आगे देखिये होता है क्या ????