Friday, June 24, 2011

एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों .........

                                                       कुछ साल पहले की बात है ...सुबह सुबह शिव खेडा का interview आ रहा था टीवी पर ......देश में आम चुनाव होने वाले थे और वो चुनाव लड़ने जा रहे थे ......सो interview में वो व्यवस्था परिवर्तन की बात कर रहे थे . पूछने वाले ने पूछा की आप अकेले क्या कर लेंगे ......अकेला चना कौन सा भाड़ फोड़ लेगा .....जो जवाब उन्होंने दिया वो आज तक याद है मुझे ....अरे आज तक जिसने भी भाड़ फोड़ा वो अकेला ही था .....गाँधी ......महर्षि दयानंद....राम मोहन रॉय .....बुद्ध ....सब अकेले ही तो चले थे ......जब मैं अपने ब्लॉग का नाम रखने लगा तो यूँ ही मुझे ये बात याद आ गयी और मैंने नाम रख दिया........ अकेला चना ........कल बैठे बैठे एक और किस्सा याद आ गया ..........एक और अकेला चना हुआ है हमारे देश में जिसने ऐसा भाड़ फोड़ा जो सरकार नहीं फोड़ पायी 60 साल में ........
                                                       बिहार के गया जिले में एक गाँव है गहलौर ......उसमे एक आदमी हुआ है ....नाम था दशरथ मांझी .......अब गहलौर गाँव की समस्या ये है की वो एक छोटी सी पहाड़ी से घिरा हुआ है और गाँव वालों को हर काम करने के लिए उसके उस पार जाना पड़ता है .....सबसे नज़दीक क़स्बा लगभग 60 किलोमीटर दूर है ......हुआ यूँ की एक दिन दशरथ मांझी पहाड़ी के उस पार  खेतों में काम कर रहे थे और उनकी पत्नी फागुनी देवी उनके लिए भोजन पानी ले के आ रही थीं .....तभी उनका पाँव फिसल गया और वो घायल हो गयी ........इस एक छोटी सी घटना ने दशरथ मांझी को प्रेरित किया और उन्होंने ठान लिया  की इस पहाड़ी को काट कर के आने जाने लायक रास्ता बनाना है .........एक हथौड़ी ....एक छेनी ...और एक तसला ले कर जुट गया वो आदमी अपने काम में ........शुरू में तो किसी ने ध्यान नहीं दिया ..........घरवाली बोली ये क्या काम फान दिया ....लड़के बोले पागल है .....पर दशरथ  मांझी लगे रहे .......बस लगे रहे ....और दो चार दिन या महीना दो महीना नहीं .........पूरे 22 साल अकेले लगे रहे ........इस बीच गाँव वालों को कौतूहल तो  होता था .....कुछ लोग आते थे कभी कभी देखने ....बाद में कुछ लोगों ने दशरथ को छेनी ..हथौड़ी वगैरह देना शुरू कर दिया ...अपनी तरफ से ....पर पूरे 22 साल वो अकेले लगे रहे ......हाँ एक अच्छी ...आज्ञाकारी पतिव्रता पत्नी का धर्म निर्वहन करते हुए उनकी  पत्नी रोज़ दिन में दो बार उनका खाना पानी ले कर आती थी ....और अंत में 22 साल  बाद उस आदमी का सपना पूरा हुआ जब उसने उस पहाड़ी की छाती चीर के 360 फुट ( 110 मीटर ) लम्बा ,25 फुट  (7 .6 मीटर ) गहरा और 30 फुट ( 9 .1 ) मीटर चौड़ा रास्ता बना डाला ...........एकदम निपट  अकेले ....बिना किसी सहायता के .......बिना किसी प्रोत्साहन के ....और बिना किसी प्रलोभन के .......वो आदमी पूरे 22 साल लगा रहा ........न दिन देखा न रात ....न धूप देखी, न छाँव .......न सर्दी न बरसात ......वहां न कोई पीठ ठोकने वाला था ....न शाबाशी देने वाला ....उलटे गाँव वाले मज़ाक उड़ाते थे ....परिवार के लोग हतोत्साहित करते थे .......22 साल तक वो आदमी अपना काम धाम छोड़ के लगा रहा .....अरे कही किसी के खेत में काम करता तो पेट भरने लायक अनाज या मजदूरी तो पाता .......हम लोग exercise करने जाते हैं तो एक ग्रुप बना लेते हैं ...अकेले मन नहीं करता ...कुछ लोग साथ होते हैं तो अच्छा लगता है .....वो आदमी अकेला लगा रहा ...उस सुनसान बियाबान में .......और एक बात बता दूं ....गर्मियों में उस जगह का तापमान 50 डिग्री तक पहुँच जाता है .......खैर 22 साल बाद, जब वो सड़क या यूँ कहें रास्ता बन कर तैयार हो गया तो उस इलाके के गाँव वालों को अहसास हुआ अरे ........ये क्या हुआ ......गहलौर से वजीरगंज की दूरी जो पहले 60 किलोमीटर होती थी अब सिर्फ 10 किलोमीटर रह गयी  है ............बच्चों का स्कूल जो 10 किलोमीटर दूर था अब सिर्फ 3 किलोमीटर रह गया है .......पहले अस्पताल पहुँचने में सारा दिन लग जाता था ...उस अस्पताल में अब लोग सिर्फ आधे घंटे में पहुँच जाते हैं ......आज उस रास्ते को उस इलाके के 60 गाँव इस्तेमाल करते हैं ............
                                                  धीरे धीरे लोगों को दशरथ मांझी की इस उपलब्धि का अहसास हुआ ....बात बाहर निकली ........पत्रकारों तक पहुंची .......news papers , magazines में छपने लगा तो सरकार तक भी खबर पहुंची ........नितीश बाबू ने कहा सम्मान करेंगे ......जो सड़क काट के बनायी है उसे PWD से पक्का करवाएंगे जिससे की  ट्रक बस आ सके ..........गहलौर से वजीर गंज तक पक्की सड़क बनवायेंगे ......बिहार सरकार का सबसे बड़ा पुरस्कार दिया ........भारत सरकार को पद्मभूषण देने के लिए नाम प्रस्तावित किया ...........पर वाह रे मेरे भारत देश ...वाह .......आगे क्या हुआ ?????? सुनिए ........
1 ) वन विभाग बोला की दशरथ मांझी ने गैर कानूनी काम किया है ......हमारी ज़मीन को हमसे पूछे बिना कैसे खोद दिया .........इसलिए उसपे पक्की सड़क नहीं बन सकती .......वन विभाग ने कोर्ट से stay ले लिया है ..........दशरथ मांझी पिछले साल मर गए ........वो रास्ता आज भी वैसा ही है जैसा वो छोड़ कर मरे थे ....गाँव वाले किसी तरह वहां से साइकिल ,मोटर साइकिल वगैरह निकाल लेते हैं ...........
2 ) वजीर गंग से गहलौर वाली सड़क अभी तक अटकी हुई है क्योंकि वन विभाग की ज़मीन पर PWD कैसे सड़क बना देगी ??????
3 ) भारत सरकार के बड़े बाबुओं ने पद्म भूषण ठुकरा दिया .....ये कह  के की पहले जांच कराओ की क्या वाकई  एक आदमी ने ही अकेले इतना बड़ा पहाड़ खोद दिया ......कैसे खोद सकता है ....ज़रूर अन्य लोगों ने मदद की होगी .........prove करो की अकेले ही खोदा है .........
                                              इस पूरी कहानी का सबसे दर्दनाक पहलू ये रहा की 22 साल की इस लम्बी घनघोर तपस्या में सिर्फ एक आदमी ......जो दशरथ मांझी के साथ खड़ा रहा .........उनकी पत्नी फागुनी देवी ....वो उस दिन को देखने के लिए जिंदा नहीं रही जब वो सपना पूरा  हुआ ...........रास्ता बन कर तैयार होने से लगभग दो साल पहले वो बीमार हुई और सारा दिन लग गया उन्हें अस्पताल पहुंचाने में ......और रास्ते में ही उनकी मौत हो गयी ........
.वो पहाड़ जो दशरथ मांझी ने खोद डाला ....अकेले ......


दशरथ मांझी

                                              बुंदेलखंड के जो किसान आत्महत्या कर रहे हैं उनके लिए सन्देश देना चाहता हूँ ....वहां ज्यादातर 60 - 70 फुट पे अच्छा ख़ासा पानी मिल जाता है .........मैंने वहां एक आदमी को अकेले एक कुआँ खोदते देखा है .....उसके जवान लड़के उसे गरियाते थे की बुढवा पागल है और बुढवा रोज़ सुबह गैंती फावड़ा ले कर पहुँच जाता था खेत पे .....और अकेले ही 3 -4 साल में उसने एक विशालकाय कुआँ खोद दिया था ........उस अकेले कुए से उसका परिवार 10 -12 acre की शानदार खेती करता था ......हमारे गाँव के बगल में ही एक विशाल  तालाब है जिसे एक अकेले साधू ने 17 साल में खोदा था ........महाराष्ट्र के लातूर जिले में एक अकेले व्यक्ति ने भी लगातार 17 सालों तक अपने खेत में खुदाई की ........उसके पहले दो कुँए fail हो गए और उनमे पानी नहीं निकला पर उसने हार नहीं मानी और लगा रहा और अंत में तीसरे कुए में से धरती की छाती फोड़ के पानी निकाल ही लिया ....अपनी एक फिल्म में मशहूर फिल्म निर्देशिका सईं परांजपे ने इस घटना का ज़िक्र  किया है ................किस गुमनाम शायर ने लिखा है .........कौन कहता है की आसमान में छेद हो नहीं सकता ........एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों ........ये लेख हिन्दोस्तान के उन किसानों को .......और उन students को......... समर्पित है.......... जिन्होंने हार मान के ख़ुदकुशी कर ली ........
                                             

Thursday, June 23, 2011

बुंदेलखंड को अन्ना हजारे ढूँढने होंगे .....अपने अन्दर

                                                      पिछले दिनों अखबारों में पढने को मिला की हाल ही में बुंदेलखंड के 519 किसानों  ने आत्महत्या कर ली है ........ये पढ़ के मेरे मुह से निकल गया की चलो कुछ तो अच्छा काम किया इन लोगों ने जिंदगी में .........क्यों चौंक गए न आप ये बात सुन के ......मेरी पत्नी बगल में बैठी थी .....वो भी चौंक गयी .....बोली ...ऐसा क्यों कहते हैं आप ..........मैंने कहा ठीक कहता हूँ .......क्यों  ????? मैंने कहा जानना चाहती  हो क्यों ????? और फिर हुए बुंदेलखंड के किस्से....और कई दिन चलते रहे ........कुछ किस्से आपको सुना रहा हूँ .......उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के  बांदा, झाँसी ,ललितपुर ,छतरपुर ,टीकमगढ़ ,दमोह ,सागर ,इत्यादि 13 जिले मिला कर एक एरिया है जिसे बुंदेलखंड कहते हैं .......अब मेरा बचपन चूंकि हरियाणा .पंजाब ,दिल्ली और राजस्थान इत्यादि में बीता तो मुझे ये बताया गया था की हमारा गृह क्षेत्र यानी पूर्वी उत्तर प्रदेश काफी पिछड़ा यानी की backward है ..... ,जिसमे ख़ास तौर पर हमारा जिला गाजीपुर तो एकदम ही पिछड़ा हुआ है और मुझे भी लगभग 10 साल तक वहां रह के और काम कर के इस बात का पक्का अहसास हो गया था की हम दुनिया की सबसे backward जगह पर रहते हैं ..........हम अक्सर कहा करते थे की की ये पूर्वी उत्तरप्रदेश ,पंजाब से 50 साल पीछे है .........पर भैया ....इश्वर की असीम कृपा हुई जो मुझे बुंदेलखंड के छतरपुर जिले में 3 -4 साल रहने का ,नौकरी करने का और खेती करने का मौका मिला ..........जब मैं पहली बार वहां बुंदेलखंड गया और लौट के अपने घर गाजीपुर आया तो अपनी बीवी से बोला ........मुबारक हो ....आप तो यूँ समझ लीजिये की इंग्लैंड और अमेरिका में रह रही हैं ....असली हिन्दुस्तान देखना है तो मेरे साथ बुंदेलखंड चलो .........तो भाइयों बुंदेलखंड की महिमा तो अपरम्पार है ...इस पर तो मैं सारी जिंदगी लिख सकता हूँ ....... पर मैं दो चार किस्से सुना के ही बात ख़तम कर दूंगा .......बात ज्यादा पुरानी नहीं है .......2001 -2 की है ......जब मैं वहां छतरपुर में पोस्टेड था तो मुझे वहां किसी ने बताया की यहाँ जमीन बहुत सस्ती है ........क्या रेट है भाई .......यही को 5000 रु ........क्या  ???????   खेती की ज़मीन  ???????? 5000 .....मैंने पूछा 5000 में कितनी  ?????? एक एकड़ ........मैंने कहा ...अबे चल ......किसी और को बनाना ......कितना बड़ा है एकड़ ....कैसी ज़मीन है .......मेरा वो दोस्त बोला भैया acre   एक standard unit है पूरे world में एक ही होता है .......और ज़मीन तुम खुद देख लेना .....अब साहब मेरी तो नींद उड़ गयी  .....5000 में एक acre .....मेरी salary उन दिनों 7000 थी ....वाह हर महीने डेढ़ acre जमीन .......जमीन हमने देखि तो शानदार फसल लहलहा रही थी ...सोयाबीन की ......सो भैया finally हमने वहां 55 acre जमीन ले ली और लगे खेती करने .....राजपूतों का गाँव था ....हर आदमी के पास वहां 20 -30 - 50 acre जमीन होती है .........गरीब आदमी के पास भी 2 -5 acre होती है ...पर सारा गाँव सारा दिन बैठ के ताश खेलता था .....थोड़ी  बहुत खेती होती थी बाकी काफी जमीन यूँ ही पड़ी रहती थी .....एक बार एक आदमी आ गया हमारे यहाँ ...एकदम सुबह सुबह 5 बजे .........बोला आपको तो लूट लिया लोगों ने ....मैंने पूछा कैसे ....बोला ये आपकी ज़मीन तो एकदम बेकार है ........5000 दे दिए आपने इसके ......मेरी ज़मीन देखो जा के .......थोड़ी देर बाद बोला 25 acre का प्लाट है ....ले लो ....हमने पूछा रेट .....वो डरते डरते बोला च ....च... चार हज़ार ......मैं बोला .......हाँ ...पहले इन्होने लूट लिया ...अब तू लूट ले ........... तो साहब finally वो श्रीमानजी 2500 रु acre के हिसाब से अपनी 25 acre ज़मीन देने को तैयार हो गए.......यानी 62000 में 25 acre ...बढ़िया ....प्लेन ....काली मिटटी .....ज़मीन में 60 फुट नीचे बेशुमार पानी वाली ज़मीन ......वहां एक दिन बगल के गाँव से  हमने अपने खेत पर काम करने के लिए कुछ मजदूर बुलवाए ............8 -10 मजदूर चाहिए थे .........सुबह 6   बजते बजते 30 -40 लोग आ गए .........अरे इतने आदमी क्या करेंगे ........अरे बाबूजी अब आ ही गए हैं तो रख लो काम पर .....अरे भाई क्या काम करेंगे .......पैसे भी तो देने हैं .......अरे दे देना कुछ .....फिर भी कितने ...दे देना 6 रु आधे दिन के .......यानी 4 घंटे काम करने के 6 रु .......खैर साहब हो गया तय और वो सब लोग 4 घंटे काम कर के 6 रु के हिसाब से पैसे ले के चले गए ..........शाम को एक आदमी आया और बोला कल सुबह 10 बजे पंचायत है गाँव में ...आपको आना है .....पहुंचे हम दोनों बाप बेटा ......हम दोनों मुजरिम थे ....आरोप सुनाया गया की हमने गाँव में मजदूरी का रेट बढ़ाया इसलिए हमारा हुक्का पानी बंद .....क्यों भाई .....4 रु का रेट था ....6 क्यों दिए .....आप तो अमीर आदमी हो ......दे दोगे ....बाकी लोग कहाँ से देंगे  ???????? खैर साहब हमने हाथ पाँव  जोड़े .......माफ़ी मूफी मांगी तो पंचायत ने 50 रु जुर्माना और एक मुर्गा ले के जान छोड़ी ...........शानदार जमीन .......बेहद उपजाऊ.......फिर भी ये दशा ........वहां की ज़मीन सागौन , नीम्बू प्रजाति के पेड़ों और बेर इत्यादि के लिए बहुत उपयुक्त है फिर भी वो लोग कायदे से खेती नहीं करते ...सामान्य वर्षा होती है ........गाँव  में शायद ही  किसी के पास एक किलो दूध मिल जाए हालांकि भैंसे सबके पास 8 -10 होती हैं ........पर उन्हें खूंटे पर बाँध के नहीं खिलाते .......कोई चारा नहीं देते ........कोई 100 ग्राम दूध देती कोई पाव भर .........और वहां  मैंने एक एक किसान के पास भूसे के विशाल पहाड़ जैसे ढेर देखे .....एक एक ढेर में 20 - 30 ट्रक भूसा ....पर उसे सम्हाल के नहीं रखते ...वो यूँ ही हवा में उड़ जाता और बरसात में सड़ जाता ....न पशु पालन ,न बागवानी ,न कृषि  ...कुछ भी नहीं ........सारा दिन बैठ के ताश खेलते थे .....पूरे इलाके की ज़मीन बकरी और भेड़ पालन के लिए बेहद उपयुक्त है ...चारों तरफ खुला जंगल है ....पर कोई भेड़ बकरी पालन नहीं करता .......तेंदू पत्ता इफरात होता है .....बीडी बनाने का खूब काम है इलाके में ...औरतें बनाती भी हैं पर मर्द सारा दिन ताश ........
                                                     अब आपको मैं ये बता दूं   की बुंदेलखंड जैसा ही पर उस से भी से भी  बदतर इलाका गुजरात में था ....बुंदेलखंड में तो बहुत बारिश  होती है .....गुजरात  तो एकदम सूखा  था ............पर भौगोलिक संरचना एक जैसी है दोनों की .......ज़मीन एक दम प्लेन नहीं है ....सो ऐसी ज़मीनों में छोटे छोटे बरसाती नालों का एक प्राकृतिक नेटवर्क बन जाता है जिसमे बरसात का पानी बहता  हुआ आगे किसी छोटी नदी में  मिल जाता है .........जब नरेन्द्र मोदी मुख्य मंत्री हुए वहां के तो उन्होंने संकल्प लिया और 1000 दिनों में लाखो छोटे छोटे stop dams बना डाले पूरे गुजरात में इन बरसाती नालों पर ......सारा गुजरात उठ खड़ा हुआ था तसले फावड़े ले कर ....आज पूरा गुजरात लहलहा रहा है .........एक एक नाले पर सैकड़ों छोटी छोटी झीलें  बना डाली गुजरातियों  ने ..........गुजरात के एक गाँव में जितना  दूध होता है ...पूरे बुंदेलखंड में उतना नहीं होता ........बुंदेलखंड जैसा ही बेकार इलाका होता था तराई का ....उत्तरप्रदेश में ...आज वहां का हाल देखिये .........पंजाब के किसान वहां बस गए हैं और उन्होंने उसे पंजाब से भी ज्यादा संपन्न बना दिया है .......पंजाब का किसान जहाँ भी गया ...उसने वहां कायाकल्प कर दिया ....फिर बुंदेलखंड को क्या हो गया.........वहां क्यों नहीं पहुंचा पंजाब हरियाणा का किसान ......इसका जवाब इस किस्से में मिल जाता है की पुराने जमाने में एक परंपरा थी बुंदेलखंड में की एक बाप के पांच बेटे तो एक बेटा किसान ,एक पहलवान ,एक पुलिस वाला ,एक वकील ,औए एक बागी .........बागी यानी डकैत .........आज भी वहां किसी के घर में खाने को रोटी हो चाहे न हो 2 -4 नाली rifle बन्दूक ज़रूर होगी .........अब ऐसे इलाके का आदमी ख़ुदकुशी नहीं करेगा तो क्या करेगा .......
                                             अब आप सोच रहे होंगे की बुंदेलखंड में हमारी उस खेती बारी का क्या हुआ ......होना क्या था ....वही हुआ ...जो पूरे बुंदेलखंड का हुआ ........हमारे पिता जी ने वहाँ के एक स्थानीय डकैत से पंगा ले लिया ...........फिर एक दिन उसे खेत पर ही पटक के मारा ........पंगा बढ़ गया तो थाने में FIR कर दी .......बाद में पता चला की डकैत तो बड़ा नामी डकैत था ....3 पुलिसवालों की हत्या कर के बागी हुआ था ....सो दो महीने बाद पिताश्री की सूचना ( मुखबिरी ) पर डाकू साहब का encounter हो गया और फिर हम सब कुछ छोड़ छाड़ के भाग आये ...और वो ज़मीन 3 -4 साल बाद 5000 के रेट से ही एक आदमी को बेच दी जिसका पैसा आज तक नहीं मिला .........
                                              बुंदेलखंड हर लिहाज से .........प्राकृतिक भू सम्पदा ( irrigated fertile land ) ,वन सम्पदा .........भू गर्भीय जल  ( underground water ) ,लोकेशन .......दिल्ली से सिर्फ 6 घंटे दूर है ........सोया बीन जैसी cash crop होती है वहां .......खूब बारिश होती है ...फिर भी वहां के लोगों की काहिली ....दकियानूसी सोच , निकम्मेपन, के कारण आज एक बहुत ही पिछड़ा हुआ क्षेत्र है ............अब ऐसे निकम्मे आदमी का तो हर काम ही निकम्मा होगा सो उसकी सरकार भी निकम्मी .......7266 करोड़ रु मिला है केंद्र से .....पिछले तीन साल में agriculture , water resources , और irrigation के लिए .......पर सरकार वो खर्च ही नहीं कर पाए .....बहिन जी लखनऊ में मूर्ती लगवा रही है और किसान भाई ताश खेल के उठा और कीटनाशक पी गया ............
                                               मेरे एक मित्र ने बताया के बुंदेलखंड से भी बदतर दशा थी रालेगन सिद्धि की आज से 25 साल पहले ............200 भट्ठियां थी शराब की एक गाँव में ....एक दम सूखा था ....नाम मात्र की खेती होती थी ...........एक अन्ना हजारे ने स्वर्ग बना डाला रालेगन सिद्धि को अपने दम पर ..........आज पूरे विश्व से चल कर लोग आते है ....रालेगन सिद्धि का कायाकल्प देखने और समझने ...........बुंदेलखंड को भी अपने अन्दर से कुछ अन्ना हजारे पैदा करने पड़ेंगे ....ख़ुदकुशी करना तो कोई हल नहीं हुआ समस्या का ...........

Wednesday, June 22, 2011

छुटभैये नेताओं के तलवे चाटते ....हमारे ये सबसे intelligent लोग

                                            कुछ साल पहले की बात  है  ......मेरे गाँव का एक लड़का जो रिश्ते में शायद भतीजा लगता है मेरे बगल में बैठा था .........वो कुछ सालों से समाजवादी पार्टी का कार्यकर्ता है और बड़ा सक्रिय हो कर कार्य करता है ......सो ऐसे सक्रिय कार्यकर्ताओं को खुश रखने के लिए राजनैतिक दल छोटे मोटे पद दे दिया करते हैं ......और ऐसे छुटभैय्ये नेताओं की संख्या एक जिले में हज़ारों होती है .......सो वो लड़का मुझे impress करने को कोशिश कर रहा था ........प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी .......इसी क्रम में उसने स्थानीय बिजली विभाग के एक अधिकारी को फोन लगाया ....अब ये नेता जी लगे उस अधिकारी को हड़काने ....और वो अधिकारी महोदय लगे नेताजी के सामने घिघियाने ......अब इस पूरी बातचीत का मकसद चूंकि सिर्फ मुझे impress करना ही था इसलिए नेता जी अपने फोन का स्पीकर  ऑन करके बात कर रहे थे .......मामला कोई ट्रांस्फोर्मेर बदलने का था .........अब धीरे धीरे नेता जी फोन पर बदतमीजी पर उतर आये .....अधिकारी महोदय yes sir ....yes sir ही करते रहे ......और  बात ख़तम करते करते नेताजी ने साहब को दो चार मोटी मोटी गालियाँ दे कर ट्रान्सफर करा देने की धमकी दी और फोन काट दिया ........इसके बाद नेता जी ने अपने कलफ लगे कुरते की बाहें ऊपर की ....और बड़े गर्व से छाती फुलाते हुए मेरी तरफ देखा ..........बोले ......बिजली विभाग का SDO था ........ओह  तो ये sdo साहब थे जो इस गलीज  ...छुटभैये ...सड़क छाप नेता की गालियाँ सुन रहे थे .......कुछ दिन बाद मैं बिजली विभाग के दफ्तर गया तो वो SDO साहब मुझे मिल गए .......बातचीत के क्रम में पता लगा की sdo साहब IIT   BHU से M Tech हैं .......हाल ही में मेरी भान्जी ( बहन की बेटी ) ने  IIT  जी के exaam clear किया है .....घर में काफी ख़ुशी का माहौल था ...सब लोग उसे बधाईयाँ दे रहे थे .....पता चला की हमारी बेहद intelligent भान्जी से और भी ज्यादा हज़ारों intelligent बच्चे हैं इस देश में .......जो अब हमारे इन IIT s से इंजिनियर बन कर निकलेंगे ........अचानक मुझे वो घटना याद आ गयी ........हमारे देश के सबसे प्रतिभावान ,सबसे intelligent ....... हमारे ये IAS ,IPS ...और अन्य competitive exams   पास करने वाले ये लोग जब सरकारी नौकरियों में जाते हैं तो कैसे इन नाली के कीड़ों जैसे सड़क छाप ,गंदे, घटिया ,गलीज ,दो कौड़ी के नेताओं के तलुए चाटने लगते हैं .....( मैं नाली के कीड़ों और सड़क छाप लोगों से क्षमा चाहता हूँ की मैंने उनकी तुलना इन नेताओं से  की .....दरअसल मेरा इरादा आप लोगों का अपमान करने का नहीं  था ) .....अब ये अधिकारी गण मुख्य मंत्री या मंत्रियों की गाली सुने तो बात समझ में आती है .......पर ये इन छुटभैये नेताओं को कैसे और क्यों बर्दाश्त करते हैं ..........           
                                               पिछले दिनों एक लेख  पढ़ा  ....शायद चेतन भगत ने लिखा था ........मूल मुद्दा ये था की जब गुजरात या दिल्ली जैसे दंगे कहीं  होते हैं तो हमारे ये प्रशासनिक अमले के अधिकारी क्यों सरकार में बैठे नेताओं की बात सुन कर अपने कर्तव्यों से मुख मोड़ लेते हैं और चुपचाप हज़ारों लोगों को मरते कटते ,जिंदा जलते देखते रहते हैं .......चेतन भगत ने बड़ा बेबाक विश्लेषण किया था की गुजरात में नरेन्द्र मोदी .....या 1984 में दिल्ली में ...राजी .....छोडिये .......जाने दीजिये नाम लेना अच्छा नहीं लगता .......ये लोग कोई हिटलर नहीं थे जो  इन पुलिस अधिकारियों को आदेश न मानने पर गोली से उड़ा देते ......अधिक से अधिक ट्रान्सफर कर देते .....पर क्या वाकई वो ट्रान्सफर कर पाते इतने लोगों का एक साथ ....उस माहौल में .....ज़रा कल्पना कीजिये ..........दिल्ली या गुजरात के उन दंगों में यदि हमारा पूरा  प्रशासनिक अमला और पुलिस फोर्स मुख्य मंत्री और अन्य मंत्रियों के मौखिक आदेशों की अवहेलना करते हुए अपने काम में जुट जाते तो क्या होता .......मुख्य मंत्री जी देखते रह जाते और दंगा एक घंटे के अन्दर कण्ट्रोल हो जाता .....और फिर मुख्य मंत्री जी कितने लोगों का ट्रान्सफर करते .....और एक को हटा  कर यदि वो दूसरे को बैठा भी देते तो  ????????? होता तो वो भी कोई IAS ...IPS ही ....वो भी मंत्री जी की बात अनसुनी कर अपना काम करता ....तो     ???????
                                                       इस पूरे घटना क्रम में मुझे एक ही बात समझ आती है की हमारे ये तथाकथित  सबसे intelligent , सबसे तेज़, सबसे मेधावी ,बुद्धिजीवी लोग जो हमारे देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाएं पास कर के ...........IAS ,IPS और  डॉक्टर इंजिनियर बनते हैं ........जब सरकारी नौकरियों में आ जाते हैं .....तो एक मलाईदार पोस्टिंग के लिए .........उस पोस्टिंग के दौरान कुछ लाख या करोड़ रुपयों के लिए ......या अपने करियर के लिए ........अपने ज़मीर ...अपने दीनोइमान इन नेताओं के पास गिरवी रख देते हैं .....उनके तलवे ( और न जाने क्या क्या ) चाटने को तैयार रहते हैं .......बल्कि चाटते हैं  .....आपको क्या लगता है वो SDO उस दिन उस दो कौड़ी के नेता को डांट के फोन रख  देता तो क्या होता ....अरे ज्यादा से ज्यादा ट्रान्सफर हो जाता .....अबे तनख्वाह तो फिर भी मिलती ही तुझे .........पर इसके साथ ही मुझे एक और बड़ा मजेदार किस्सा याद आता है ........इस घटना के एक या दो साल बाद की ही बात है .......उत्तर प्रदेश में अपनी बहिन माया वती जी की सरकार थी .............इस बार नहीं .....इस से पिछली बार की बात है ....उन दिनों गाजीपुर के कुख्यात माफिया सरगना मुख्तार अंसारी अभी हाल ही में समाजवादी पार्टी छोड़ के बहुजन समाज पार्टी में भर्ती हुए थे ..........अब मुख्तार अंसारी पूर्वी उत्तरप्रदेश में मुसलामानों के बड़े नेता माने जाते हैं ......सो उन्हें खुश करने के लिए बहिन जी ने उन्हें  Z Plus सिक्यूरिटी देने का आदेश जारी कर दिया ...........उन दिनों गाजीपुर में एक एकदम नया लौंडा ........चिकना सा .......नया नया IPS ........SP बन के आया था .....नाम था संदीप सालुंके ......सो जब संदीप सालुंके के पास मुख्तार अंसारी को Z Plus सिक्यूरिटी देने का आदेश पहुंचा तो ऐसा बतातेहै की नेता जी के बड़े भाई सांसद अफजाल अंसारी SP साहब से मिलने गए .....तो वो लौंडा बोला की नेता जी ....आप Z Plus की बात करते हो ........हम यहाँ साले को एनकाउन्टर  करने का मन बना के बैठे हैं ....बता देना उसे .....जिस दिन दिख गया ....ठोक दूंगा ......नेता जी ने मिलाया बहिन जी को फोन ........तो सुनते हैं की SP साहब उनसे  बोले ........Z plus तो दूर एक सिपाही नहीं दूंगा .......और मिल गया तो मारे बिना छोडूंगा नहीं ( नेता जी उन दिनों बिहार में फरारी काट रहे थे ) .....हाँ ये अलग बात है की SP साहब का चार घंटे में वहां से तबादला हो गया ..............अगले दिन सारे अखबारों ने ये खबर नमक मिर्च लगा कर छापी.......और एक क्रांतिकारी किस्म के अध्यापक महोदय ने अपने लड़के का नाम संदीप सालुंके रख दिया ..........और बड़े दुःख के साथ कहना पड़ता है की नए SP ने मुख्तार अंसारी को बाइज्ज़त Z plus दे दी .......पर मुझे गर्व है ये कहते हुए की वही संदीप सालुंके आज भी उसी शान से पुलिस विभाग की नौकरी कर रहे हैं ...और अक्सर उनका नाम पढने को मिल जाता है .........इसी तरह एक और बड़ा धाकड़ अधिकारी हुआ है ...वो भी कभी SP था गाजीपुर में ..........अरुण कुमार झा ........वही जिसने कुख्यात gangster श्री प्रकाश शुक्ला का एनकाउन्टर किया था ...........उसने भी मुख्य मंत्री की प्रादेशिक समीक्षा बैठक में मेरठ मंडल की crime meeting में भरी सभा में माया वती के मुह पर कह दिया था की सारे गुंडों को तो आप और आपके मंत्री फोन कर के छुडवा देता हैं ....crime control हम क्या ख़ाक करें .........और सुनते हैं की बहिन जी ने उन्हें वहीं तत्काल suspend कर दिया था ..........पर भाइयों सिर्फ suspend किया था .......गोली नहीं मारी थी .....अरुण झा आज भी शान से पुलिस की नौकरी कर रहे हैं ..........
                                          मुद्दा ये है की हमारे ये बुद्धिजीवी अधिकारी क्यों चंद रुपयों की खातिर इन नेताओं के गुलाम बन कर बैठे हैं ........ क्या इसके लिए भी civil society को कोई आन्दोलन करना पड़ेगा ???????





Monday, June 20, 2011

इंसानियत जिंदा है अभी .......

लगभग दस साल पुरानी बात है .........हमारे कसबे सैदपुर में एक डाक्टर साहब हुआ करते थे ........स्थानीय phc यानी सरकारी अस्पताल में तैनात थे .......किसी काम से मैं उनसे मिलने गया था .....दोपहर का समय था ........उनके रूम में गया तो पता लगा की डाक्टर साहब नहीं हैं ....मुझे मालूम था कहाँ मिलेंगे ..........सरकारी डाक्टर को कायदन दिन में अपने रूम में बैठ के मरीज़ देखने चाहिए ....पर सारे डाक्टर अपने घर में बैठते हैं .......वहां हर मरीज़ से उन दिनों 20 रु लेते थे consultation fees .........खैर वहीं अस्पताल में ही उनके सरकारी आवास में पहुंचा .....डाक्टर साहब अपना दरबार लगा के बैठे थे .....3 -4 छुटभैय्ये नेता उन्हें घेर के बैठे थे ......3 -4 मरीज़ सामने बैठ के अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे थे .........मैं भी बैठ गया .......तभी वहां एक औरत आयी........उसकी गोद में एक दुधमुहा बच्चा था .......उस औरत का शब्द चित्र खींचने में आज भी मेरा दिल दहल जाता है ........हिन्दुस्तान की गरीबी और बदहाली के जितने भी किस्से आपने आज तक सुने होंगे .......और गरीब बदहाल लोगों के फोटो देखे होंगे ..........वो औरत उनसे भी ज्यादा दयनीय अवस्था में थी ........एक दम दुबली पतली ........सूखा मुरझाया हुआ चेहरा ......शरीर में हड्डियों के ढांचे के अलावा और कुछ नहीं बचा था .......वो बच्चा शायद 2 -4 महीने का रहा होगा .....दूर से देखने पर मुझे उसके अन्दर जीवन का कोई लक्षण नज़र नहीं आया .....अगर रहा भी होगा तो वो एकदम मरणासन्न ही था ..........डाक्टर साहब ने उस बच्चे को देखा और पुर्जा लिख दिया ............वह औरत उस स्टूल से उठ खड़ी हुई ........ एक क्षण के लिए वो वहां जड़वत खड़ी रही और फिर पीछे मुड़ने लगी ..........तभी डाक्टर साहब बोल पड़े ....20 रु .........उस औरत ने कांपते हाथों से अपनी साडी के कोने में बंधी उस गाँठ को खोलने का उपक्रम किया ......वो दृश्य आज भी मेरी आँखों के सामने तैर रहा है .......कम से कम एक मिनट लगा होगा उसे अपनी साडी की वो गाँठ खोलने में .....और उसने उसमें से कुछ नोट निकाले और पूरे डाक्टर के हाथो में रख दिए .........डाक्टर ने देखा की 20 ही हैं और उसने वो पैसे अपने टेबल की दराज़ में रख लिए .............वो औरत मुड़ी और लडखडाते क़दमों से बाहर निकल गयी ............कमरे में बैठे हम सभी लोगों का मन वितृष्णा से भर गया .......हम सबके मनोभाव हमारे चेहरे से साफ़ पढ़े जा सकते थे .........पर डाक्टर को कोई फर्क नहीं पड़ा .........इस घटना ने मुझे अन्दर तक झकझोर कर रख दिया ........मैं किस काम से आया थे वो भूल गया और चुपचाप उठ कर चला आया .......
आज दसियों साल बाद भी वो घटना दिलो दिमाग में बैठी हुई है सो लिख रहा हूँ .........उस डाक्टर को मैं अच्छी तरह से जानता हूँ .........एक बेटा है डाक्टर है .......बहू भी डाक्टर है .....उनकी एक बेटी है ...dental surgeon है ...दामाद भी डाक्टर है ........डाक्टर को retire हुए 4 -5 साल हो चुके है अब .......करोड़ों की संपत्ति है उसके पास ........अब ऐसा आदमी भी ....एक इतनी गरीब औरत से ....उसके मरते हुए बच्चे को देखने की एवज़ में ....तब जब की उसे अपनी सरकारी ड्यूटी में अस्पताल में देखना चाहिए था और मुफ्त में सरकारी दवा भी देनी चाहिए थी ...........ऐसी औरत से भी 20 रु पकड़ लेता है .........क्या कोई मनुष्य इतना भी संवेदना शून्य हो सकता है ......मैंने सुना है की जब आप रोज़ रोज़ ऐसे ह्रदय विदारक दृश्य देखते हैं तो आपको आदत पड़ जाती है ........पर मुझे इस theory में विश्वास नहीं होता है ......इस लिए मैंने इस सम्बन्ध में कई लोगों से बात की .....कई ऐसे लोगों से जिनके सामने ऐसी समस्याएं और ऐसे दृश्य रोज़ ही आते हैं .......कई पुलिसवालों से बात हुई .....कई बस counductors से पूछा ........कुछ डाक्टरों से भी बात की .......आपसी बातचीत में तो सबने यही कहा की ऐसे लोगों से हम पैसे नहीं लेते हैं .......एक वकील साहब ने तो यहाँ तक बताया की ऐसी ही एक औरत का मुकदमा वो लड़ रहे हैं और जब भी वो तारिख पर आती है तो उस दिन उनके 100 -200 रु खर्च हो जाते हैं ........बोले भैया खाना खिलवाता हूँ और आने जाने का भाड़ा ले के जाती है ..........तो उस दिन उस डाक्टर को क्या हो गया था ????? उस दिन उस औरत से वो 20 रु लेते उसके हाथ क्यों नहीं कांपे .............
आज यहाँ फिर एक डाक्टर के पास बैठा था ........फिर वही कहानी देखने को मिली ......इस बार पति पत्नी अपने बच्चे को दिखाने आये थे .......तकरीबन वैसी ही दशा थी जैसी उस दिन उस औरत की थी .....पर इस बार डाक्टर एक तथाकथित BAMS .....झोला छाप टाइप था .....मैं उसके क्लिनिक में बैठ के अखबार पढ़ रहा था .......डाक्टर ने निर्विकार भाव से उस बच्चे को देखा .....पुर्जा लिखा ....और थमा दिया .........उस औरत ने साड़ी की गाँठ खोल के बीस रूपये निकाले ........डाक्टर बोला ...बस बीस रूपये ? वो बोली बाबू इतने ही हैं ........फिर इसके बाद कोई संवाद नहीं हुआ .........कुछ बातें चुप रह कर ज्यादा अच्छी तरह समझ आती हैं .........कुछ क्षण बाद डाक्टर ने वो पैसे उन्हें लौटा दिए .......अपने टेबल की दराज़ से कुछ sample वाली दवाइयां निकाली और उसके हाथ पर धर दी ............वो औरत बोली कितना पैसा हुआ डाक्टर साहब ...........डाक्टर ने सिर्फ गर्दन हिलाई .....अगली बार दे देना .........
कैसी अजीब पहेली है ये .......उस दिन वो डाक्टर ....करोडपति था ....पर उसकी पैसा कमाने की भूख कायम थी ...और उस भूख ने उसके अन्दर के इंसान को मार दिया था ......और ये बेचारा झोला छाप .......2 -300 रु कमाने वाला .........ये उस 200 रु में भी कितना संतुष्ट है और सुखी है .........किसी ने सच ही कहा है की सुख और दुःख एक मानसिक अवस्था है ...इसका आपकी जेब ....पैसे और बैंक बैलेंस से कोई लेना देना नहीं है ..........happiness is a state of mind........it has got nothing to do with your bank balance .

Saturday, June 18, 2011

उम्मीद अभी बाकी है दोस्त .......

पिछले दिनों की बात है .....यहाँ हरिद्वार में दिव्य योग पीठ की धर्मशाला में एक सज्जन मिल गए .....बगल के कमरे में रुके हुए थे सो सामान्य शिष्टाचार के अंतर्गत प्रतिदिन दुआ सलाम होती थी .....एक दिन यूँ ही उन्होंने मुझसे पूछ लिया की आप क्या करते हैं .....मैंने उन्हें संक्षेप में बताया की मैं यहाँ दिव्य योग पीठ में सेवाव्रती हूँ और हम लोग यहाँ सोयाबीन के दूध के ऊपर कार्य कर रहे हैं ...और यह की ये अत्यंत पौष्टिक होता है और इसे घर पे मात्र 2 रु लीटर की दर से तैयार किया जा सकता है .....इतना सुन के उन्होंने इस सम्बन्ध में और ज्यादा जानने की इच्छा व्यक्त की और वो मुझे आग्रह करते हुए अपने कमरे में ले गए ....वहां उनकी पत्नी और दो बच्चे भी थे ....परिचय के बाद हम लोग काफी देर तक बात करते रहे और वो मुझसे कुरेद कुरेद कर ज्यादा जानकारी लेते रहे ......लम्बी बातचीत के बाद हम लोगों ने अपने फोन नम्बर एक दूसरे को दिए .......उन्होंने अपना email id लिखाया .......सोमप्रकाश MLA ....तो मैंने यूँ ही पूछ लिया ....ये MLA का क्या मतलब हुआ ...तो वो श्रीमान जी तो कुछ नहीं बोले और बात को टाल गए पर उनका बेटा बोल पड़ा की पापा MLA हैं ...... अब मेरा माथा ठनका .....MLA ...... परिवार सहित पिछले 4 दिन से ......यहाँ इस धर्मशाला में ......सामान्य से कमरे में ........जहाँ 2 bed हैं सिर्फ ....और पत्नी एक पतली सी चादर बिछा के नीचे फर्श पर लेटी है ......शाम को पूरा परिवार नीचे लंगर हॉल में सबके साथ जमीन पे बैठ के खाना खाता है ........ सामान्य सा भोजन ......दाल भात रोटी तरकारी .....जब मैंने उनके बारे में और ज्यादा जानने की उत्सुकता दिखाई तो जो कुछ थोडा बहुत उन्होंने अपने बारे में मुझे बताया ......और फिर इन्टरनेट पर डुबकियाँ लगा कर जो जानकारी उन सज्जन के बारे में मुझे हासिल हुई वो सब जान के .......मैं अभिभूत हूँ .....जो निराशा का भाव पिछले दिनों मेरे अन्दर बैठ गया था ........उन घने काले बादलों के बीच एक हलकी सी आशा की किरण दिखाई दी .....आज सोचा की सोम प्रकाश जी की पूरी कहानी संक्षेप में आपके साथ शेयर करूँ ........
तो दोस्तों कहानी प्रथम द्रष्टया पढने सुनने में पूरी फ़िल्मी है .....पर सबसे बड़ी बात की एकदम सच है ..........तो हुआ यूँ की एक श्रीमान जी हैं .....नाम है सोम प्रकाश .......बिहार के रोहतास जिले में एक गाँव है मकराइन ....वहां के रहने वाले हैं ..... बिहार पुलिस में दरोगा थे .......लालू जी का राज था .......अब अपने लालू जी के राज में दरोगा बेचारा .......अब ये श्रीमान जी एकदम इमानदार ........एकदम फ़िल्मी अंदाज़ में ......सो किसी की सुनते नहीं थे और किसी गरीब आदमी पे ज़ुल्म बर्दाश्त नहीं करते थे और एकदम इमानदारी से कार्यवाही कर डालते थे फिर सामने चाहे जो हो ....और किसी का फोन या सिफारिश नहीं सुनते थे चाहे अपना पुलिस कप्तान हो या मिनिस्टर MLA ....सो अब आप तो जानते ही हैं की ऐसा आदमी हमारे सिस्टम में चल नहीं पाता सो इनका भी ट्रान्सफर हर 2 -3 महीने में हो जाता था ....तो अंत में जब पुलिस विभाग इनसे तंग आ गया तो इनका ट्रान्सफर कर दिया naxalite एरिया में ........की लो बेटा चलाओ इमानदारी से थाना ..........और ये श्रीमान जी भी डट गए .....बात सन 2004 की है ......ये ओबरा नामक एक अत्यंत पिछड़े हुए क्षेत्र में posted थे ........नक्सलियों का राज था ....सरकार एवं प्रशासन का नामो निशाँ तक नहीं था .........छोटे छोटे बच्चे हथियार ले के घूमते थे ...सरकारी स्कूल सब बंद पड़े थे ......तो सबसे पहले तो इन्होने वहां एक शैक्षिक जागृति मंच की स्थापना की और छोटे छोटे बच्चों की पढ़ाई हेतु स्कूल खोलने शुरू किये .......इसके साथ ही लोगों के साथ मिल जुल के काम करना शुरू किया .........पर समस्या यहाँ भी वही थी हर 4 -6 महीने बाद तबादला .....पर इन्होने उस तबादले को ही अपना हथियार बना लिया ...जहाँ जाते वहां हर गाँव में स्कूल खोल देते ......इस तरह श्रीमान जी लगातार 6 साल तक naxalite एरिया में काम करते रहे और बाकी सारे कामों के साथ बच्चों का पुनर्वास करते रहे .....उनके हाथ से बंदूकें और बम ले कर उन्हें कापी किताब और कलम पकडाते रहे .......उस दौरान उनके बारे में कहा जाता है की उनके नाम से गुंडे बदमाश और naxalite थर थर कांपते थे ........बाद में जब लालू जी का राज गया और अपने नितीश बाबू का राज आया तो इनके काले पानी की सज़ा ख़तम हुई और इन्हें नितीश बाबू के गृह नगर बख्तियार पुर का थानेदार बना के भेजा गया ........अब वहां जा के ये कौन सा सुधरने वाले थे .....जाते ही सींग से सींग भीड़ गए ........अब इनका तो पुराना सिद्धांत था ही ...किसी नेता और अफसर का फोन नहीं सुनना है .......सो श्रीमान जी को तीन महीने बाद ही insubordination अर्थात अपने अधिकारी का आदेश न मानने के आरोप में ट्रान्सफर कर दिया गया .....और कुछ दिन बाद suspend कर दिया गया ........अब बख्तियार पुर की जनता सड़क पर उतर आई और उन्होंने नितीश बाबू से ये सवाल किया की सोम प्रकाश का तबादला सिर्फ तीन महीने बाद क्यों किया गया ....बताया जाए ......अब इसका क्या जवाब देते nitsih babu और उनका पुलिस विभाग....सो जनता ने आम हड़ताल कर दी और देखते देखते ये हड़ताल आस पास के 4 -5 जिलों में फ़ैल गयी .........जनता के दबाव के कारण महकमे ने दरोगा जी को बहाल कर दिया पर अब दरोगा जी अड़ गए की ऐसी नौकरी नहीं करूँगा .......और उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया ..........महकमे ने लाख मनाया पर नहीं माने और अंत में इस्तीफ़ा मंज़ूर हो गया ..........इतने नाटक के बीच ओबरा क्षेत्र के लोग इनके पास पहुंचे की आप हमारे क्षेत्र से चुनाव लड़िये ..........और जनता के आह्वाहन पर इन्होने चुनाव लड़ने का निर्णय किया ..........और तीन कसम खाई .........1 ) किसी पार्टी से टिकट नहीं लेंगे ....2 ) अपनी जेब से एक पैसा नहीं लगायेंगे .........3 ) किसी जाति का vote नहीं मांगेंगे....अब आज के समय में बिहार की राजनीति में ये तीनों बातें ही अकल्पनीय है ....... और तब जब की नितीश बाबू की पार्टी की लहर चल रही हो ....उन्हें अपार जन समर्थन हासिल हो .........तो ऐसे माहौल में भी सोम प्रकाश जी ओबरा से निर्दलीय चुनाव लड़े और नितीश कुमार की प्रचंड आंधी में भी उनकी पार्टी के एक बहुत बड़े नेता को 5000 से ज्यादा वोटों से हरा कर विजयी हुए .........और उनके चुनाव में कुल 1,28,000 रु खर्च हुए जो जनता ने स्वयं चंदा कर के जुटाया .......आज सोम प्रकाश जी बिहार विधान सभा में ओबरा से MLA हैं .........जो एक लाख रु उन्हें MLA का वेतन मिलता है उसे अपनी पार्टी .....जो उन्होंने बनायी है ....उसके fund में जमा करते हैं .......अपना घर खर्च सिर्फ 10,000 रु में चलाते हैं ....यहाँ हरिद्वार में पतंजलि योग पीठ में स्वामी रामदेव जी के अनशन में भाग लेने आये हुए थे ...........दिल्ली जा के रामलीला मैदान में सपरिवार अनशन पे बैठे .....और जब उस दिन वहां से रात 2 बजे लठिय के भगा दिए गए तो वापस यहाँ हरिद्वार आये और पूरे 9 दिन तक अनशन पे बैठे रहे ........
तो दोस्तों आज मैंने सोम प्रकाश जी की कहानी आपसे इसलिए शेयर की क्योंकि आज के इस माहौल में जब हम सभी लोगों ने मान लिया है की सभी नेता चोर हैं .....डाकू हैं ......पुलिस पूरी तरह भ्रष्ट है .....हमारा देश भ्रष्टाचार में आकंठ डूबा है .......पतन की ओर बढ़ रहा है .........चारों तरफ निराशा है .......तो इस समय भी हमारे देश में सोम प्रकाश जैसे लोग मौजूद हैं ......ऐसे लोग जो पुलिसिया तंत्र के इस भ्रष्ट सिस्टम में रहते हुए भी लड़ रहे हैं ....survive कर रहे हैं ......और ये की आम जनता भी ऐसे लोगों को पहचान रही है ....उनकी सेवाओं को स्वीकार कर रही है ....उनकी सराहना कर रही है ...और ज़रुरत पड़ने पर सर आँखों पर बैठा रही है ......दोस्तों इस घोर अन्धकार में भी उम्मीद की एक किरण नज़र आती है .........अक्सर लोग कहते हैं की चुनाव में हमारे पास कोई विकल्प नहीं होता ....पर मैं मानता हूँ की नहीं विकल्प हमेशा होता है ....हम लोग उसे देखते नहीं हैं .......आखिर ओबरा के लोगों ने तमाम बड़ी पार्टियों के उम्मीदवारों को लात मार के एक अच्छे आदमी को chun ही लिया .......
आज ओबरा की जनता ने हिन्दुस्तान के हर आदमी को एक रास्ता दिखाया है .......मुझे इस बात की बहुत ख़ुशी है की आज के इस माहौल में भी हमारे इर्द गिर्द बहुत से सोम प्रकाश हैं जो चुपचाप इमानदारी से अपना काम कर रहे हैं .......ज़रुरत है उन्हें पहचान के ...आगे लाने की ....समाज में उन्हें role models के रूप में स्थापित करने की ..........सोम प्रकाश जी अपने क्षेत्र की गरीब जनता के बीच बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं ...वहां कुटीर उद्योग और गरीब औरतों के लिए स्व रोज़गार की कुछ योजनायें शुरू करना चाहते है .......ऐसे आदमी की उत्साहवर्धन होना ही चाहिए जिससे उसका हौसला बना रहे और वो जी जान से इस भ्रष्ट सिस्टम में टिका रहे और हमारे लिए लड़ता रहे .........उनका नंबर है .....09931419414 ........09471003295 ......09431067822 ....और email id है somprakashmla @gmail .com ....उन्हें फोन पर बधाई दें और उनका उत्साहवर्धन करें ..........इस घने अन्धकार में .....इस आंधी तूफ़ान में भी ये दिया...... जलते रहना चाहिए .....

Monday, June 13, 2011

काश वो दिन वापस आते ...........

मेरे पसंदीदा फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप द्वारा produced ताज़ा तरीन फिल्म 'शैतान ' का review पढ़ रहा था .......अभी देख नहीं पाया हूँ .....कहानी सुनते हैं कुछ यूँ है की कुछ youngsters मस्ती करते हुए किसी मुसीबत में फंस जाते हैं ....उस से निकलने के लिए हाथ पाँव मारते हैं और इसी बीच उनके अन्दर का शैतान जाग उठता है ......... अब मैं सोचने लगा की क्या वाकई हमारे अन्दर बैठा शैतान यूँ ही कभी मौका पा के बाहर आ जाता होगा ....वास्तविक जीवन में भी ......अपने अन्दर झाँका तो वाकई ऐसे बहुत से किस्से निकल आये ..........कुछ हंसाने वाले ....कुछ गुदगुदाने वाले ...........
बहुत पुरानी बात है ......शायद 86 -87 की .....दिल्ली में था .....उस जमाने की बहु चर्चित फिल्म basic instinct रिलीज़ हुई थी ....तब तक ये multiplex का ज़माना नहीं आया था ......single screens ही हुआ करते थे .......उन दिनों दिल्ली में एक मात्र चाणक्य सिनेमा ही हुआ करता था जहाँ नई अंग्रेजी फिल्में लगा करती थी ........सो एक मित्र के साथ पहुँच गए हम ...प्लान था 6 से 9 देखेंगे और रात खाना खा के 11 बजे तक कमरे में वापस .........वहां पहुंचे तो हाउस फुल ......हॉल के सामने वाली मार्केट में एक उस्मान भाई हुआ करते थे ...उनका ढाबा था .......हमेशा फिल्म देख कर उनके यहाँ खाना खाते थे ....गप्पें मारते थे सो उनसे अच्छी खासी यारी हो गयी थी .....हाउस फुल का बोर्ड देख के भागे भागे उनके पास पहुंचे की उस्मान भाई कुछ जुगाड़ करो यार ....हॉल के सामने ही ढाबा होने की वजह से उस्मान भाई के हॉल के स्टाफ से links थे ....पर कुछ न हो सका और उन्होंने भी हाथ खड़े कर दिए ..... अब कोई चारा नहीं था ...सो तय किया की 9 से 12 देखेंगे .........तीन घंटे वहीं मार्केट में घूमे फिरे ...उस्मान भाई से जी भर के गप्पें मारी बढ़िया खाना खाया .....chicken curry और butter naan .....टिकेट के लिए विंडो पर पहुंचे तो होश उड़ गए .........बाप रे बाप ...इतनी भीड़ ....70 के दशक का amitabh bachhan का ज़माना याद आ गया ......अब लाइन में सबसे पीछे खड़े हो के तो मिल चुका टिकेट .....खैर टिकेट बिक्री शुरू हुई और हम दोनों बेचारे.... हारे जुआरी .....कारवां लुटते देखते रहे ..........बमुश्किल 5 मिनट बीते होंगे, की वो ....जिसे कहते हैं ...अन्दर बैठा शैतान...... जाग उठा .......अब हमसे और देखा न जा रहा था ,सो उठे और बुकिंग विंडो की तरफ बढे ........वहां ज़बरदस्त भीड़ थी .........पर ज़्यादातर लोग आसपास के IIT और AIIMS के स्टुडेंट्स थे ... वो बेचारे ठहरे 40 -40 किलो के मर्द और मैं था 90 किलो का तगड़ा पहलवान .......सो मैं भीड़ में घुस गया, एक दम ...जैसे अभिमन्यु चक्रव्यूह में घुसा था .............सबसे पहले मेरा एक ही लक्ष्य था की किसी तरह विंडो तक हाथ पहुँच जाए ..........खैर जैसा की फिल्मों में दिखाते है की अंतिम सीन में मरता हुआ हीरो किसी तरह रेंगता हुआ हेरोइन तक पहुँच कर उसका हाथ थाम लेता है ....कुछ उसी अंदाज़ में मैंने वो टिकेट विंडो पकड़ ली ........मोटे शीशे की खिड़की थी ....उसे पकड़ के मैंने एक झटका पहले लेफ्ट मारा और एक राईट ...........अब वो बेचारे पढ़ पढ़ के सूख गए डाक्टर इंजिनियर मुझ पहलवान का धक्का कहाँ बर्दाश्त कर पाते ...........चीख पुकार मच गए ......oh my god .....save me ....oh shit .........ये क्या हो रहा है .....पर कौन था वहां उनकी सुनने वाला उस रात रामलीला मैदान की तरह ....मैदान साफ़ था और मै विंडो पे सबसे आगे खड़ा था ......मैंने उस से 2 टिकट मांगे ........यही कोई 20 रु का एक टिकट रहा होगा .......वो बोला खुल्ले दो ......अब खुल्ले कहाँ से लाऊँ ??????मैंने कहा भाई मेरे तू 100 रु के पूरे दे दे .....और उसने मुझे 5 टिकटें पकड़ा दीं ........आप सोच सकते है .........क्या मनोदशा रही होगी हम दोनों की .........सचिन तेंदुलकर को वर्ल्ड कप जीत के वो ख़ुशी नहीं मिली होगी जो हमें वो टिकटे पा के मिली ......हम दोनों विजयी भाव से वहाँ बने एक चबूतरे पे बैठ के तमाशा देख रहे थे ...और उन बेचारों पे तरस खा रहे थे .........कुछ देर बाद मैंने महसूस किया की हमारे इर्द गिर्द एक किस्म का मजमा सा लग गया था जैसे मदारी के इर्द गिर्द लग जाता है ...इस से पहले की मै कुछ समझ पाता एक लड़का .......सकुचाते हुए आया .......और बोला ...भाई साब टिकेट एक्स्ट्रा है .....हमने कहा नहीं .........तो वो बोला भैया कुछ एक्स्ट्रा पैसे ले लो ....मैंने उस से कहा ...क्यों बे हम तुझे ब्लैकिये नज़र आते हैं .........वो पीछे हट गया ...पर उसने हार नहीं मानी थी .....और कमबख्त एक विचार का प्रतिपादन तो कर ही गया .........अब कहते है की विश्व की बड़ी बड़ी क्रांतियाँ एक विचार की ही तो देन हैं .........सो वो विचार अब पनपने लगा .....भीड़ में भी और हमारे अन्दर भी .....वो बोला ...दे दो भाई साब .......तो मेरे वो मित्र बोल पड़े ...अच्छा चल कितने पैसे देगा .......30 ले लो ....मैंने कहा चल बे ......तब तक उनमे से कोई बोला 40 ले लो ........अब कमान मेरे उस मित्र ने सम्हाल ली ........और बोले ,देखो भाई 3 टिकटें हैं .......उसको मिलेंगी जो सबसे ज्यादा पैसे देगा .......तो साहब बाकायदा नीलामी हुई .......बढ़ चढ़ के बोली लगी ........यूँ मानो हुसैन साहब की नंगी........ देवी देवताओं वाली पेंटिंग बिक रही हो .....और मुझे याद है शायद 60 या 70 तक गयी .......और हमने भैया वो 3 टिकटें बेच दीं ....अब देखिये..... शैतान जब जाग जाता है तो क्या कुछ करता है ..........मैंने कहा की यार देख अपन आये थे entertainment के लिए ........वो तो हो गया ....फुल्टू .......अब ये 2 भी बेच देते हैं फिल्म कल देख लेंगे ........पर उसमें कुछ गैरत बाकी थी सो उसने ये विचार कुचल दिया ...एकदम केंद्र सरकार की तरह .......खैर साहब बड़े मज़े से फिल्म देखी ..........मनः स्थिति ही कुछ ऐसी थी ..........इतनी हसीन शाम, फुल entertainment ......वो भी बिलकुल मुफ्त .........बड़ा मज़ा आया ...बेहतरीन फिल्म थी ......रात बारह बजे बाहर निकले ........ऑटो लिया .....50 रु में .........आम दिन होता तो हम दोनों का तो हार्ट फेल हो जाता ऑटो लेने में .........पर आज कोई गम नहीं था ....ऑटो वाला चल पड़ा .......थोड़ी दूर ही चले थे की एक आदमी ने हाथ दिया .........सवारी पीछे बैठी हो तो दिल्ली के ऑटो वाले इस तरह नहीं रुकते ...........पर हमने कहा रोक ले यार ...इतनी रात गए बेचारा कहाँ जाएगा ........उसने रोक लिया ........अब हमने उस से पूछा ...हाँ भाई साब कहाँ जाओगे ...उसे भी उधर ही जाना था जिधर हम जा रहे थे ......मैंने कहा 50 रु लगेंगे ....और वो झट से मान गया ....हमने बैठा लिया .........थोड़ी ही देर में वो अन्दर बैठा शैतान ....कमबख्त फिर जाग गया .........घर के पास रेड लाईट पर ऑटो रोका ...और उसे 10 रु पकडाए ........ऑटो वाला इससे पहले की कुछ बोलता हमने उसे कपिल सिब्बल की तरह समझा दिया की बेटा अगर हम पीछे बैठे हैं तो ऑटो तो हमारा हुआ न .......सो किराया तो हम शेयर करेंगे ...न की तू ..........50 रु ये भाई साब देंगे ....10 ये रहे ........तू भी खुश हम भी खुश .........तेरा नेट प्रोफिट 10 रु........ हमारे प्रोफिट पे तू दिमाग मत लगा ..............अब ये तो तर्क ही ऐसा था की सुप्रीम कोर्ट मान जाए ...उस बेचारे की क्या मजाल .......दोनों भाई हँसते खिलखिलाते घर पहुंचे ............वो मस्ती भरे दिन अब भी याद आते हैं .............क्या बचपन था ...क्या अल्हड ...मदमस्त जवानी थी ..........काश वो दिन वापस आ पाते ..........

Sunday, June 12, 2011

खबरनवीस मर गया क्या ?????? या बिक गया ???????

आज सुबह डा.सुब्रमण्यम स्वामी ने देहरादून में ये आरोप लगाया की इधर देश में कोहराम मचा है और राजमाता सोनिया जी और युवराज पिछले चार दिन से switzerland में बैठे हैं ........अब पिछले कुछ सालों में सुब्रमण्यम स्वामी ने देश विदेश में ये image बनायी है की वो अनर्गल प्रलाप नहीं करते हैं ....जो बोलते हैं सोच समझ कर बोलते हैं ........नाप तोल कर बोलते है .......कुछ भी बोलने से पहले पूरी research करते हैं ........पिछले कुछ सालों में उन्होंने बहुत बड़े बड़े ....विशालकाय घोटाले खोजे हैं ....उनपे बड़ी व्यापक खोजबीन की है ......अब इतनी बड़ी बात कह दी उन्होंने आज सुबह .........आरोप लगाया की दोनों माँ बेटा switzerland गए हैं अपने खातों की देखरेख करने .........पूरे देश में आम आदमी ये बात खुल कर कहता है और मानता है की प्रधानमन्त्री श्री मनमोहन सिंह जी व्यक्तिगत रूप से बेहद इमानदार होते हुए भी भ्रष्टाचार एवं काले धन पर कोई प्रभावी कदम इसलिए नहीं उठा पा रहे क्योंकि कांग्रेस के बड़े नेता गण......( गाँधी परिवार समेत ) की गर्दन सबसे पहले नप जाएगी ........अब ऐसे माहौल में आज कोढ़ में खाज हो गयी ....कमबख्त ..........मुए स्वामी ने इतनी बड़ी बात कह दी किसी एक चैनल पर ............अब हमारे जैसे लोग चिपक गए भैया टीवी से ...वैसे भी हम लोग चिपके ही रहते हैं ........पर वाह ....क्या बात है .......किसी भी माई के लाल हमारे न्यूज़ चैनल ने उस बयान को दुबारा नहीं दिखाया ....खोज बीन करना....बाल की खाल निकालना तो दूर की बात है ........सारा दिन टीवी पर surfing करने के बाद ( हांलाकि न्यूज़ तो अब भी चल रही है ) शाम को हमने इन्टरनेट पर गोते लगाए ........सारी न्यूज़ खोज मारी ..........कहीं तो कुछ निकलेगा .......कहीं तो कोई चर्चा होगी ...किसी ने डॉ स्वामी को quote ही किया होगा ...कहीं से कोई खंडन ही आया होगा ..........अब हम क्या जानें दिल्ली में कौन क्या कर रहा है ....पर दिल्ली वाले तो जानते हैं की कहाँ हैं सोनिया जी ....कहाँ हैं अपने राहुल बाबा .....और इन मीडिया वालों के लिए तो ये एक मिनट का काम है .....एक फोन मारा और ये लो .....हो गयी पुष्टि ....या ये रहा खंडन ..........पर कुछ नहीं ....शांति ...एकदम मरघट वाली शांति है आज ........न पुष्टि.... न खंडन ............
पर दोस्तों .....मरघट की ये शांति .......चीख चीख कर कुछ कह रही है ..............ध्यान से सुनिए .....दूर वहां कोई रो रहा है .........किसी की मौत पर .....पर मुझे सचमुच विश्वास नहीं होता की वो मर गया ..........इतनी आसानी से मरने वाला वो था तो नहीं ....बड़ी सख्त जान था कमबख्त .......क्या वाकई मर गया ...खबरनवीस ............न कोई आवाज़ न हलचल ........माजरा क्या है .....
आज सुबह एक लेख लिखा मैंने की कैसे सरकार हमारे मूल अधिकारों को कुचल रही है .....इसके अलावा मैं लिखता रहा हूँ की कैसे न्यूज़ मर रही है ............पिछले दस दिनों से मैं महसूस कर रहा हूँ की news channels पर सरकारी विज्ञापनों की बाढ़ सी आ गयी है .........अब ये कोई खोजी पत्रकार या संस्था ही आंकड़े खोजेगी की किस महीने में कब कितने सरकारी विज्ञापन आये news channels पर, और अखबारों में ........... .....सच्चाई सामने आनी ही चाहिए ...........और जैसे ही इन्हें सरकारी विज्ञापन मिले इनकी तोपों का मुह सिविल सोसाइटी की तरफ मुड़ गया ..........ये लगे जन आन्दोलन को बदनाम करने ....सरकार और पार्टी का गुणगान करने और भ्रम फैलाने ..............जो मीडिया एक एक byte के लिए मारा मारा फिरता है ....आज डॉ सुब्रमण्यम स्वामी के इतने सनसनीखेज बयान के बाद भी चुप है ....मरघट सी शांति है .......पुष्टि नहीं तो खंडन तो आना चाहिए ........सरकार की तरफ से न सही पार्टी की तरफ से ही सही .......अगर सोनिया जी और राहुल जी देश में हैं तो बताया जाए और डॉ स्वामी से कहा जाए की प्रलाप बंद करो ......और अगर कहीं बाहर हैं तो ये भी बताया जाए की कहाँ हैं .......... चुप्पी साध के देश का मीडिया गाँधी परिवार को बचा रहा है क्या ??????? या ये मुद्दा...ये प्रश्न ....सचमुच इतना छोटा ...इतना घटिया है की इसपे टिप्पणी करना नहीं चाहता ............पर ये बहुत कडवी सच्चाई है की आज अधिकाँश लोग ...चाहे वो कांग्रेस समर्थक लोग ही क्यों न हों........ ये मानते हैं की गांधी परिवार के खाते हैं...... विदेशी banks में .......अब इसका जवाब या तो हाँ में हो सकता है या ना में ........चुप रहना कोई जवाब नहीं है ....और चुप रहे तो गाँधी परिवार रहे ....मीडिया क्यों चुप है ???????? कुत्ते का काम है भोंकना ........यहाँ कुत्ते को एक गाली के रूप में न ले कर एक रक्षक के रूप में लिया जाए please ........कुत्ते का काम है भोंकना और गुर्राना ....ज़रा सी आहट पर भी भोंकना ..........क्यों चुप है आज ...आहट सुनाई नहीं दी ........या हड्डी चूसने में इतना मगन है .......देखो कहीं मर तो नहीं गया ........खबरनवीस बिक गया क्या ???????? लोकतंत्र का चौथा खम्बा भी टूट रहा है क्या ????????









पगड़ी उसके पैरों में रखो जो पगड़ी की इज्ज़त जानता हो ................

                                                     कई साल पुरानी बात है .......श्रीनगर से वापस आ रहा था .......एक शेयर taxi में ......हम दस लोग थे .......रास्ते में ट्राफिक पुलिस ने रोक लिया ............एक हज़ार रु का चालान काटने लगे .....ड्राईवर एक कश्मीरी नवयुवक था .........उसने ज़रा सी उफ़ भी नहीं की .......तभी हम लोगों में से एक मुसाफिर बोल पड़ा ......अरे साहब गरीब आदमी .............तभी वो ड्राईवर बोल पड़ा ..हे ....कौन सा गरीब आदमी .......काहे का गरीब ........काटने दो चालान .........खैर हम लोग चालान कटवा के फिर चल पड़े ............थोड़ी  देर बाद ड्राईवर बोला कि पगड़ी उस आदमी के पैरों में रखो जो पगड़ी की कीमत जानता हो .............मुझे उस लड़के  की ये बात आज तक याद है ...और मैं इस वाक्य को अक्सर quote करता हूँ .........
                                          समाचार आया है की बाबा ने अनशन तोड़ दिया है .........4 जून की दमनकारी पुलिसिया कार्यवाही के बाद सरकार का दंभ ........उसका हठ ........ आन्दोलन रत जनता की भावनाओं की उपेक्षा ............अड़ियल रवैया ........इसकी मिसाल आज़ाद भारत में कम ही मिलती है ..........जिस तरह से सरकार ने नागरिकों के संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों.....हमारे fundamental rights का हनन किया ...दमन किया .........सिर्फ इमरजेंसी में ही ऐसा देखने को मिला था ...........संविधान की धारा 19 कहती है कि भारत के सभी नागरिकों को ये अधिकार है कि वो अपनी बात कह सकें  ....freedom of expression and speech ,किसी भी सार्वजनिक स्थल पे एकत्र हो कर शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर सकें ,freedom to assemble peacefully without arms .......  इस विषय में supreme court की एक ruling भी है कि ऐसी किसी aseembly को या प्रदर्शन या सत्याग्रह को सरकार धारा 144 लगा के रोक नहीं सकती ............जब तक की उसके पास कानून व्यवस्था के ध्वस्त होने का कोई मज़बूत आधार न हो .........उस दिन राम लीला मैदान में ऐसी कोई स्थिति नहीं थी ...या जंतर मंतर पे 8 जून को अन्ना के सत्याग्रह में कानून व्यवस्था की कोई समस्या नहीं थी ...........फिर भी सरकार ने वो सत्याग्रह नहीं होने दिया ..............लोकतंत्र में सरकारें बेशक बहुमत के आधार पर चलती हैं फिर भी भारत देश का एक भी आदमी .....जी हाँ ...एक भी आदमी ........अगर कोई बात कहता है ...तो उस बात का भी महत्व है .........न तो उस आवाज़ को दबाया जाना चाहिए न नज़र अंदाज़ किया जाना चाहिए ..........पर जिस तरह पिछले 9 दिनों में  सरकार ने  बाबा के आमरण अनशन के प्रति असंवेदनशीलता का प्रदर्शन किया  ...वो उपेक्षा सिर्फ बाबा की नहीं हो रही थी बल्कि उन करोड़ों हिन्दुस्तानियों की भावनाओं की हो रही थी जो बाबा के नीतियों से सहमती रखते हैं ..........सरकार  ने एक तरह से कह दिया था ....अनशन करता है तो करे ....मरता है तो मरे .....हम नहीं जायेंगे मनाने ......आन्दोलन भ्रष्टाचार के खिलाफ था ......काले धन के खिलाफ था ....पूरा देश भ्रष्टाचार के खिलाफ है .ये महत्वपूर्ण नहीं है की आन्दोलन कौन कर रहा है ........मुद्दा महत्वपूर्ण है .......मुद्दे को पूरा देश समर्थन दे  रहा है .........सरकार कहती है ...मांगें तो मान ली .....कौन सी मांगें ....कब मान ली .......क्या एक्शन प्लान है सरकार का .......सरकार कहती है हम भ्रष्टाचार को ले के संजीदा हैं .........कब तक आयेंगे results आपकी संजीदगी के ......आपकी संजीदगी आपके actions में दिखाई क्यों नहीं देती .......देश को इन सवालों के जवाब जानने का हक है .......पूरा देश चिंतित था ...रामदेव के स्वास्थ्य को ले कर ...परन्तु सरकार और कांग्रेस पार्टी ने कभी कोई चिंता व्यक्त नहीं की .......इसलिए अब इस अनशन का कोई महत्व नहीं रह गया था ............भूखा बच्चा माँ के सामने रोता है क्योंकि उसे मालूम होता है की ममतामयी माँ से मेरा रोना देखा नहीं जाएगा ...और वो तुरंत खाना देगी .........इस बेशर्म ,बेहया और बेईमान सरकार के सामने रोने का कोई फायदा नहीं ...........
                               पगड़ी उसके पैरों में रखो जो पगड़ी की इज्ज़त जानता हो ....सत्याग्रह उसके सामने करो जो सत्याग्रह का महत्व जानता हो ............. इस सरकार ने जनता का विश्वास खो दिया है ........












Saturday, June 11, 2011

गांडीव उठा ...युद्ध कर ....उठ कौन्तेय

दोस्तों इस शोर शराबे में मूल मुद्दा कहाँ खो गया पता नहीं ......और मज़े की बात की हमें पता ही नहीं चला ........दूसरी बात की रोज़े बक्श्वाने गए थे नमाज़ गले पड़ गयी .....मूल मुद्दा था की भ्रष्टाचार ख़तम होना चाहिए ......भ्रष्टाचार से निपटने के लिए एक प्रभावी कानून बनना चाहिए .......और विदेशों में जमा काला धन राष्ट्रीय संपत्ति घोषित कर देश में वापस लाया जाना चाहिए .......अब ये कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिन में बहस की कोई गुंजाइश ही नहीं है .......किसी भी वर्ग,धर्म ,जाती,सम्प्रदाय ,विचारधारा ,के व्यक्ति के लिए इस मुद्दे पर ना कहने की कोई गुंजाइश ही नहीं है ..........पर आप देख लीजिये देश में पिछले कुछ दिनों से क्या बहस चल रही है ..........बाबा सही है या गलत .....चोर है या इमानदार .....उसकी संपत्ति कितनी है .......RSS का support है की नहीं है ........4 जून को पुलिस की कार्यवाही सही थी या गलत ........सुषमा स्वराज का राजघाट पे नाचना उचित है की नहीं .......सत्याग्रह की कोई उपयोगिता है की नहीं है ........कानून सड़क पे बनेगा या संसद में .....सत्याग्रह से blackmailing होती है की नहीं ....बाबा पैसे का लोभी है की नहीं ......दिग्विजय सिंह पागल है की नहीं .....अन्ना RSS के agent है की नहीं .........पूरा देश दो गुटों में बँट गया है और गरमा गरम बहस चल रही है ....न्यूज़ चैनल दिन रात चीख रहे हैं .......पर मूल मुद्दा गुम है ........बाबा कहता है ...मांगे मानो तब अनशन तोडूंगा ............सरकार कहती है ...अबे अनशन पे बैठा क्यों है ....हमें तो ये भी नहीं मालूम .....मांगें ???????वो तो हमने पहले ही मान ली थी .........अब आप बताइए बाबा की मांगें अगर सरकार ने वाकई मान ली हैं तो इस देश में दीवाली मनाई जानी चाहिए .....घी के दिए जला के .........पर कहाँ का दीवाली महोत्सव ....यहाँ तो गाली महोत्सव चल रहा है ...लगातार ....पिछले कई हफ़्तों से ........आधा देश अन्ना और बाबा को गरिया रहा है ........बाकी आधा सरकार को गरिया रहा है ..........दिग्विजय सिंह सरकार और बाबा दोनों को गरिया रहे हैं .....सरकार बाबा और RSS ,BJP को गरिया रही है ...........सोनिया जी कपिल सिब्बल को गरिया रही थीं ....की ये वकील कहीं का नहीं छोड़ेगा .......न्यूज़ चैनल को बैलेंस बना के चलना है इसलिए दोनों को गरिया रहे हैं .......
इस गाली महोत्सव में मूल मुद्दा ..........बेचारा गुम है ......जैसे किसी मेले में कोई बच्चा जब गुम जाता है तो बदहवास रोता है .........अरे भाई भ्रष्टाचार का क्या कर रहे हो .......इधर बहुत से neutral किस्म के लोगों से मेरी बात हुई है .......अलग अलग वर्गों के ....तकरीबन हर वर्ग के ........जब मैं उन्हें बताता हूँ की हम लोग भ्रष्टाचार के मुद्दे पर लड़ रहे हैं ...तो कई लोग तो हंस दिए ..........बोले क्यों टाइम खोटा कर रहे हो ...कुछ नहीं होगा .....आम आदमी से बात की ....बोले अरे कुछ नहीं होगा .......बड़े बड़े busineesmen से बात हुई ....बोले कुछ नहीं होगा ....बड़े देशभक्त किस्म के लोग बोले ...कुछ नहीं होगा ........inteelectuals भी कहते है कुछ नहीं होगा ...कुछ दिन भोंक के सब बैठ जायेंगे ........मुझे बड़ी निराशा होती है .....इतनी गहरी निराशा के गर्त में डूबा है हमारा देश ........सब मान चुके हैं की भ्रष्टाचार का कुछ नहीं हो सकता ?????? जैसे कैंसर के मरीज़ की जब आखिरी stage होती है ......जब अस्पताल से डॉक्टर उसे घर भज देते हैं .....क्योंकि वो नहीं चाहते ........की कोई मरीज उनके अस्पताल में मरे .........बहुत साल पहले ...याद है मुझे ......एक ऐसे ही मरीज को हम ले के आये थे अस्पताल से घर .........उस वक्त जो मनःस्थिति थी हमारी ......हार मान चुके थे हम .......घर आ कर चुप चाप बैठ गए .....हताश ...गुम सुम ....क्योंकि हम जानते थे की अब कुछ नहीं हो सकता .........और उसके मरने का इंतज़ार करने लगे ..........
क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ इस लड़ाई में वही स्थिति आ गयी है .......क्या भारत देश वाकई ये मान बैठा है की कुछ नहीं हो सकता इसका ........लगता तो यही है ......अर्जुन ने गांडीव रख दिया है ......उसके हाथ कांप रहे है ...जुबां सूख गयी है ......दोनों सेनाओं के बीच खड़ा है .......confused .....दोनों ही सेनाओं में अपने ही सगे सम्बन्धी हैं ........कहता है क्या मिल जायेगा लड़ के ........ऐसे समय में एक कृष्ण चाहिए जो अर्जुन को समझा सके की .....उत्तिष्ठ कौन्तेय .......गांडीव पर प्रत्यंचा चढ़ा और युद्ध कर .......
उठ और पूछ अपनी सरकार से ....की क्या कर रहे हो ...इस कैंसर से लड़ने के लिए .....क्या एक्शन प्लान है तुम्हारा .........कब और कैसे लगेगी इस पर लगाम ..........कब घोषित होगा विदेशों में जमा काला धन राष्ट्रीय संपत्ति ......कब होगी इन भ्रष्टाचारियों को उम्र कैद ..........कब बंद होगा ये mauritius route ..........mauritius route से आया 50 लाख करोड़ रुपया कब राष्ट्रीय संपत्ति घोषित होगा ........कब उजागर होंगे .....स्विस बैंक खाता धारकों के नाम ...........हमें एक डेट चाहिए ........संसद के अगले सत्र में ????? या उस से अगले .......क्या अगले आम चुनाव तक हो जाएगा ये काम ...........जिन लोगों ने ये धन लूटा है उनसे recovery कब होगी .........आखिर इस काम के लिए हमको सत्याग्रह क्यों करना पड़ रहा है .........सरकार बताये क्या मजबूरियां हैं उसकी ............सरकार को चाहिए की आम सहमति बनाये इस पर ....इस काम में राजनीति क्यों हो रही है ...........उत्तिष्ठ कौन्तेय ....मेरे मित्र पद्म प्रकाश सिंह की ये चन्द पंक्तियाँ आपके लिए
क्रान्ति सुनहरा कल लाएगी
संघर्षों का फल लाएगी

स्वप्न बंधे जंजीरों में
आशाएं कुंठित रुद्ध भले होँ
आज समय विपरीत सही
विधि के निर्माता क्रुद्ध भले होँ
स्वेद लिखेगा आने वाले
कल को बाज़ी किसकी होगी
झंझावात रुके हैं किससे
राहें होँ अवरुद्ध, भले होँ
जाग पड़ेंगे सुप्त भाग्य
कुछ ऐसा कोलाहल लाएगी
क्रान्ति सुनहरा कल लाएगी
संघर्षो का फल लाएगी …
हतो वा प्राप्यसि स्वर्गं जित्वा व भोक्ष्यसे महिम तस्मात् उत्तिष्ठ कौन्तेय युद्धाय कृतनिश्चय - 2.37
अगर वीरगति को प्राप्त हुआ तो स्वर्ग में जायेगा .........और अगर विजयी हुआ तो इस धरती के समस्त सुखों को भोगेगा .......इसलिए हे कौन्तेय उठ और दृढ निश्चय कर युद्ध कर .......


बाबा चले थे कल्याण करने ....हो गया कल्याण

                                        पिछले दिनों एक लेख पढ़ा किसी अखबार में .....बार बार दिमाग में घूम रही है वही बात .....सोचा की आप लोगों के साथ शेयर करूँ .......हिंदी साहित्य के मूर्धन्य व्यंगकार हरिशंकर परसाई ने एक व्यंग लिखा था साठ के दशक में .....मैंने वो एक पुस्तक में पढ़ा था जब मैं आठवीं क्लास में पढता था .वो व्यंग उस ज़माने में जितना प्रासंगिक था ...आज भी उतना ही प्रासंगिक है .किस्सा कुछ यूँ है की कृष्ण जी .......यानि  अपने lord krishna ........वही गीता महाभारत वाले ......एक दिन उन्होंने सोचा वहां बैकुंठ (स्वर्ग ) में बैठे बैठे की   कितनी दुर्दशा है मेरे भारत देश की और मैं यहाँ स्वर्ग में मज़े ले रहा हूँ सो मुझे अपने इन प्यारे भक्तों के लिए कुछ करना चाहिए .......सो जब उन्होंने वहां अपने कुछ दोस्त मित्रों से सलाह की तो सबने कहा की प्रभु आईडिया तो बहुत अच्छा है ......और आप तो वहां ऐसे ही पूजे जाते हो ......बड़ी fan following है आपकी, सो आप जा के अपने इन बेचारे भक्तों का कल्याण करो ........बस प्रभु emotional हो गए और चल पड़े मृत्युलोक की ओर ........यहाँ पहुंचे तो हल्ला मच गया ....अरे भगवान् साक्षात् पधारे है .........टूट पड़ी दुनिया ......दर्शनों के लिए ........कुछ दिन बड़ा हल्ला गुल्ला रहा ....प्रभु जहाँ जाते ,भक्त लाखों की संख्या में इकट्ठे हो जाते ......राजा प्रजा सब जुट जाते ......प्रभु गद गद ,चेले भी गद गद .....प्रभु ने कहा की व्यवस्था परिवर्तन करेंगे जिससे प्राणी मात्र का कल्याण हो .......अब राजाओ का माथा ठनका ......अबे ये तो व्यवस्था परिवर्तन की बात कर रहा है.....अपना क्या होगा  ........खैर प्रभु ने एक एक कर के राजाओं से भी मिलना शुरू किया .......सो एक राजा बोला की स्वागत है आपका ....आप हमारे साथ मिल कर काम करिए .........प्रभु बड़े खुश हुए .....राजा बोला की वैसे आप तो यादव हैं न .......कृष्ण कुमार यादव .....अब प्रभु का माथा ठनका ........वो बोले हम कोई यादव वादव नहीं हैं ....हम तो भगवान् हैं .........सबके भगवान् ......सभी प्राणी हमारे लिए एक समान ......राजा बोला प्रभु ये फिलोसफी वहां स्वर्ग लोक के लिए तो ठीक है पर भैया यहाँ मृत्यु लोक में तो कोई न कोई tag तो लगाना ही पड़ेगा ........सो आप यादव हैं यादव ही रहिये .......तभी कल्याण होगा .......अब प्रभु भड़क गए और वहां से निकल लिए .......दूसरे राजा के पास गए ...उसके पास सारी रिपोर्ट थी ......उसने उन्हें पटा लिया और अपने साथ काम करने के लिए राज़ी कर लिया ........अब मचा हाहाकार ......पहला राजा बड़ा परेशान .......बोला ये तो सारी equation ही change हो गयी .........उसका एक मंत्री था ....बड़ा कुटिल ...बोला महाराज क्यों फ़िक्र करते हैं ....सब ठीक कर देंगे ......उसने अपने कारिंदों  को बोला की इस पट्ठे की ज़रा history चेक करो ......कारिंदे बोले हुज़ूर उनकी क्या हिस्टरी ....वो तो भगवान् हैं ....मंत्री बोला की अबे भगवान् वगवान कुछ नहीं होता ........तुम बस history निकालो .........इसे तो मैं ठीक करता हूँ ......तो भैया हिस्टरी तो सबकी होती ही है कुछ न कुछ .......अब लगे ढिंढोरा पीटने सब गला फाड़ फाड़ के ........अबे ये तो एक नंबर का चोर है बचपन से ही ....पूरे मोहल्ले का जीना हराम कर रखा था इसने .....मक्खन तक नहीं छोड़ता था ........एक नंबर का चरित्रहीन था ....नहाती हुई लड़कियों के कपडे उठा के ले जाता था .........पड़ोस की लड़की थी रुक्मणी ...उसे भगा के ले गया था .......अगर इसे राजा बना दिया तो हमारे तो देश की बहू बेटियां ही सुरक्षित नहीं रहेंगी ..........बस फिर क्या था ...भक्तों ने लिया प्रभु को तरिया ......अब प्रभु की अक्ल ठिकाने आई की भैया अपने राम तो वहीं ठीक हैं बैकुंठ में ...........भक्तों का कुछ नहीं हो सकता .........
                                                 तो साहब ये हाल हैं हमारे यहाँ ...........बाबा चले थे भक्तों का कल्याण करने .........भक्तों ने रात के दो बजे दौड़ा दौड़ा के पीटा......अब बैठे हैं नाराज़ हो के भूखे प्यासे ......कोई पूछने वाला नहीं है ......भक्तों ने कह दिया है .....मरता है तो मरे ......अब अगर बाबा सलाह मान जाते और अगर राम देव की जगह राम देव यादव बन जाते तो आज ये नौबत ना आती .......फिर क्या मजाल थी किसी की, की कोई हाथ भी लगा देता ...........जाट गूजरों  को लगाया किसी ने हाथ .......  है किसी की हिम्मत .....मिमिया रहे थे उनके सामने सब ......महीनों उन्होंने पूरे देश को बंधक बना के रखा ........फिर भी सब पाँव पूजते रहे .....बाबा देश हित की बात कर रहा था फिर भी दूदरे दिन ही लठिया दिया ........अब देखना है की बाबा डटे रहते हैं या वापस बैकुंठ चले जाते हैं .......बाबा को भी दो चार कुटिल मंत्री रख लेने चाहिए ........