Saturday, February 9, 2013

Afzal Guru Cries Foul .......he's been cheated

                                            दीन  के शहीद हो के  अफज़ल मियाँ जल्दी जल्दी चले जा रहे थे ....ज़न्नत पहुँचने का चाव था ......वहाँ बताया था कि  ज़न्नत में 72 हूँरें होंगी .....कमसिन .....कुंवारी .......6 से 9 साल की  ....... वहाँ पहुंचे तो हॉल खचाखच भरा था .......मुग़ल सराय के रेलवे प्लेटफार्म की तरह ........ कांव कांव मची थी ....शोर शराबा ....भीड़ भड़क्का .....भाई लोग लड़ झगड़ रहे थे ......... हर चीज़ के लिए मारा मारी थी .............हूर एक भी न थी  ....अलबत्ता कुछ लौंडे थे ......गिलमान .........पर वो भी कमसिन नहीं .........बूढ़े ठांठ  .....न दूध की नदियाँ , न पानी की नहरें ..........हॉल के कोने में एक टूटी लगी थी ............न कोई रिसेप्शन न कोई रिसीव करने वाला .........उन्हें मुगालता हुआ ....कहीं साले गलत तो नहीं ले आये ....देव दूतों से बोले .... अबे कहाँ ले आये ...अरे मियाँ हमारी तो ज़न्नत की बुकिंग है .......ये कहाँ ले आये दोज़ख में ........देव दूत बोले ........हुज़ूर सही लाये हैं ......... ज़न्नत ही  है ....अफज़ल भाई का माथा घूम गया ........ ये तो सरासर धोखा है ......वहाँ मौलवी तो साला ज़न्नत की बड़ी rosy picture paint करता था ........ i will sue you ......cosumer court में ले जाऊंगा .......मुझे बेवक़ूफ़ समझा है क्या ........
                            देव दूतों ने समझाया ....हुज़ूर गुस्सा थूक दीजिये ......... शांत हो जाइये .......किसी ने झूठ नहीं बोला  है , किसी ने धोखा नहीं दिया है ..........हुज़ूर यही ज़न्नत है .......मौलवी ने जो प्लान दिखाया था , सब सही था .....आपको वही पैकेज मिलना था ..........पर क्या है कि  इधर भीड़ थोड़ी बढ़ गयी है .........रोजाना हज़ारों आ रहे हैं शहीद हो के ......... ज़न्नत में दरअसल जगह कम पड़  गयी है ........ अब कहाँ से लायें रोजाना इतनी हूरें ........ ऊपर से इतना सख्त क्वालिटी कण्ट्रोल .......कुवांरी , कमसिन ,वो भी एक आध नहीं  चाहिए ....हर आदमी को 72 ......पुराने ज़माने में तो उठा लाते थे हिन्दुस्तान से ........पर अब ज़माना बदल गया है हुज़ूर .......अब नहीं मिलने की हूर परी ....... जो एक आध लौंडा मिले उसी से काम चला लीजिये ........ वो भी आपस में शेयर कर के ........ वीकली टर्न मिल जाती है .......बाकी खाना पीना मिल ही जाता है ...हाँ पानी की थोड़ी shortage  है ....... अब हम भी क्या करें हुज़ूर ...हमने तो कई बार लिख के भेजा  है ...... कि  ये मिस सेलिंग न करें ......  इतना बड़ा package promise ना करें .........perks कम कर दें ....पर हमारी सुनता कौन है ....... अब मियाँ अफज़ल गुरु वहाँ एक कोने में मायूस बैठे हैं .....सालों को consumer कोर्ट में घसीटूंगा .












कौम के शहीद और पार्टियों के वोट बैंक ...........

                                        अफज़ल गुरु को चुप चाप फांसी दे दी आज . बड़ा हल्ला है .सरकार और कांग्रेस अपनी पीठ ठोक रहे हैं . उधर श्रीनगर और काश्मीर के कई  हिस्सों में कर्फ्यू है ....हुर्रियत ने तीन दिन का बंद रखा है .....मुझे आज तक ये समझ नहीं आया की ये साला तीन दिन के बंद का क्या मतलब है ... 30 दिन क्यों नहीं ? या मैं कहता हूँ 3 साल के लिए बंद करो यार ....वैसे एक बार जम्मू वालों ने 2-3 महीने का बंद रखा था . एक मामले में कश्मीरी बड़े बेबाक हैं ....वो हिन्दुस्तान को अपने ठेंगे पे रखते हैं . और सरेआम रखते हैं .सरेआम पकिस्तान के गुण गाते हैं .लाल चौक में पकिस्तान का झंडा फहराते हैं . वहाँ की  सड़कों पे सरेआम , ( सिर्फ)  शाहिद अफरीदी और शोएब अख्तर के पोस्टर बिकते हैं  .श्रीनगर के लाल चौक पे एक बड़ा मशहूर क्रिस्चियन स्कूल है .पुरानी बात है .मुझे वहाँ के प्रिंसिपल ने ये किस्सा सुनाया था . वर्ल्ड कप  में इंडिया पकिस्तान का मुकाबला होने वाला था उस दिन .MORNING ASSEMBLY में यूँ ही पूछ लिया प्रिंसिपल ने ........so  kids we have the match today .....who do you think is going to win ? ........और सभी बच्चों की एक साथ आवाज़ आयी ....पाकिस्तान ..... प्रिंसिपल कहते हैं ....मैं हक्का बक्का रह गया . तो कहने का मतलब ये है की कश्मीर तो है ही पकिस्तान .....उसे तो हम यूँ ही ज़बरदस्ती अपनी फ़ौज के बल पे साथ रखे हुए हैं .
                                         अब आइये ज़रा पंजाब की बात करते हैं . आज टीवी पे चर्चा चल रही है .बलवंत सिंह राजोआना को कब होगी फांसी . मुझसे बड़ी भूल हो गयी . कृपया क्षमा करेंगे .....वे भाई बलवंत सिंह राजोआना हैं ......सो हमारे भैया जी , मुख्य मंत्री बेअंत  सिंह ह्त्या काण्ड में फांसी की सजा पाए हुए हैं . पिछले दिनों उन्हें फांसी देने की तारीख भी मुक़र्रर हुई थी . फिर यहाँ पंजाब में बड़ा बवाल मचा . पूरा सिख समाज सड़कों पे उतर आया . दो दिनों के भीतर ही अस्सी और नब्बे के दिनों की याद दिला दी . अजीब सी  बेचैनी थी .हवा से दहशत की बू आती थी .अकाल तखत ने राजोआना को कौम का ज़िंदा शहीद घोषित कर दिया ..........ज़िंदा शहीद .....और फिर सुप्रीम कोर्ट ने फांसी पे रोक लगा दी . राजोआना  पटियाला सेंट्रल जेल में बंद है .उसे सिख समाज में हीरो का दर्ज़ा हासिल है . मज़े की बात ये है की उस दौरान पूरी BJP लीडरशिप को सांप सूंघ गया था .किसी के मुह से कोई आवाज़ नहीं निकली। किसी ने ये नहीं पूछा की भैया ये क्या हो रहा है .आप लोग सरेआम एक आतंकवादी का महिमा मंडन कर रहे हो ....उसे हीरो बना रहे हो ? golden temple complex में इंदिरा गांधी के हत्यारों को पूजा जा रहा है ? है कोई पूछने वाला ? अकाल तख़्त में OPERATION BLUE STAR में मरने वाले आतंकवादियों का  मकबरा बन रहा है .......अकाली दल और भाजपा खामोश हैं .....
                उधर काश्मीर घाटी में हुर्रियत ने अफज़ल गुरू को कौम का शहीद , जंगे आजादी का शहीद करार दिया है . दिल्ली का बटला हाउस एनकाउंटर हमें याद है . पूरी कांग्रेस लीडरशिप को उन तथाकथित मासूम  आतंकवादियों के लिए रोते बिलखते हम देख ही चुके हैं . सुनते हैं राज माता उनकी फोटो देख के रो पडी थी . आतंकवादियों की लाश से वोट निकाले जा रहे हैं  ?
                   आजकल यहाँ  पंजाब , में जब घर से बाहर निकलता हूँ तो सड़क पे एक आदमी , अक्सर मुझे सरेआम बन्दूक दिखाता है ....धमकाता है .......कहता है .....लगदा है फेर आणा पऊ .....( I think i will have to come back ) वो आदमी है ....कौम का एक और शहीद ......जरनैल सिंह भिन्ड्रा वाले ....जी हाँ , श्री मान जी की फोटो सरे आम लोग अपनी गाड़ियों के पीछे लगा के घूम रहे है ...एक हाथ में तलवार है ....दुसरे में AK 47 .......अब मुझे ये समझ नहीं आ रहा की मैं यूँ ही खाम खां डर रहा हूँ या वाकई मुझे डरना चाहये ?
                                         मुल्क आतंक वाद से लड़ाई बड़ी बेमन से लड़ रहा है ...सोच सोच के लड़ रहा है ....आतंकवाद से लड़ते समय इस बात पे ध्यान ज्यादा है की वोट न टूटे .........





















Friday, February 8, 2013

पहलवान और मुसलमान

                                    दोस्तों , पहलवान होने का भी बड़ा नफ़ा नुकसान है . ता उम्र पहलवानी की कराई है .हमसे बेहतर कौन जानता है . पहले पहलवानी की दस साल , फिर पहलवानी की ही नौकरी कर ली ....पहलवानी के ही कोच हो गए . फिर अपने लड़कों को भी पहलवान ही बना दिया .सो पहलवानी तो अपने रग रग में समाई हुई है . सो पहलवानी के नफे नुक्सान की बात यूँ उठी की हम लोगों को कोई सीरियसली नहीं लेता .शायद मैं गलत कह गया .हकीकत इसके उलट है , की हमको लोग ज़्यादा सीरियसली ले लेते हैं . उसका एक कारण ये है की हमें किसी को ये बताने की ज़रुरत नहीं पड़ती की हम पहलवान हैं .लोग शरीर देख के ही समझ जाते हैं .रही सही कसर हमारे टूटे हुए कान निकाल देते हैं . कान देख के लोग बाग़ समझ जाते हैं .  फिर खान पान , रहन सहन , उठाना बैठना , चाल ढाल , हसना बोलना ........पहलवानों की हर बात निराली है ....... अक्खड़ अलमस्त स्वभाव , बेफिक्र जीवन ......शारीरिक ताकत की वजह से उपजी एक स्वाभाविक आक्रामकता ....ऊपर से कुश्ती खेल की मूलभूत आवश्यकता है आक्रामक होना ........ इन सब के साथ पहलवानों के साथ कुछ पूर्वाग्रह भी जुड़े हुए है ...मसलन उन्हें अनपढ़ गवाँर मान लिया जाता है .......उनके बाहरी व्यक्तित्व से ही उनके बारे में पूर्वानुमान लगा लिए जाते हैं ........ हमारे हिंदी साहित्य में तो किसी भी गुंडे बदमाश लठैत को पहलवान दिखाने या कहने की परम्परा रही है ....हाल में रिलीज़ हुई फिल GANGS OF WASSEYPUR में सारे बदमाश पहलवान कहाए हैं ......सो ये पहलवानों  से जुड़े पूर्वाग्रह हैं जो सदियों से चले आ रहे हैं ...........ऊपर से कुछ अपनी इमेज खुद पहलवानों ने खराब की है ....अपने क्रिया कलापों से .......मैं इस से जुडी एक सच्ची story सुनाता हूँ ........
                   सन 1984 में मेरे पिता जी ने मुझे दिल्ली के एक अखाडे में पहलवानी करने के लिये भेज ..........उसी समय दिल्ली में 84 वाला दंगा हो गया ......... दंगे के तुरंत बाद कुछ ऐसी परिस्थितिया बनी की हमारे अखाड़े के कुछ लड़के दिल्ली में प्लॉट्स के कब्जे छुडाने लगे .....फिर कब्जा छुडाते छुडाते खुद कब्जे करने लगे .....फिर चुनाव हुए तो HKL BHAGAT जैसे नेताओं के साथ घूमने लगे ......... अजय चौटाला जैसे नेताओं से प्रश्रय पाने लगे और देखते ही देखते कुछ पहलवान दिल्ली और हरियाणा के बहुत बड़े बदमाश  बन गए .विष बेल जब बढ़ने लगती है तो बहुत तेजी से बढ़ती है .......... नौबत यहाँ तक आ गयी की बड़े बड़े गैंग बन गए .......... और पहलवान दिल्ली और हरियाणा में इतने बदनाम हो गए की शरीफ लोगों ने अपने बच्चों को पहलवानी करवान बंद कर दिया ....थानेदारों को निर्देश दिया गया की अपने इलाके के सभी अखाड़ों और पहलवानों की सूची बनाएं .......एक बार हरियाणा के एक गाँव में लोगों ने कुछ शरीफ पहलवानों को यूँ ही पीट दिया ......वो ग्रामीण शरीफ लड़कों को भी गुंडा ही मान बैठे थे ......5-7 साल तक यही माहौल रहा .....पहलवानों की इतनी बदनामी हो गयी थी  की इन्हें पुलिस आते जाते भी परेशान करती थी ........फिर उनमे से कई आपस में लड़ मर कर ख़तम हो गए .....कुछ का पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया ......कई आज भी जी खा रहे हैं .......वो दस साल का समय भारतीय कुश्ती का सबसे बुरा समय रहा .....फिर धीरे धीरे माहौल सुधरा ....कुश्ती के समझदार coaches और उस्ताद खलीफाओं ने सख्ती की ...अपने लड़कों  में अनुशासन पे बल दिया ...... धीरे धीरे पहलवानों के शैक्षणिक स्तर  में भी सुधार हुआ ....... अनुशासन सुधरा तो कुश्ती के स्तर में भी सुधार हुआ ......... सुधरे माहौल में लड़के राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय स्तर पे पदक जीतने लगे .....और फिर देखते ही देखते सुशील और योगेश्वर दत्त जैसे नायकों ने कुश्ती और पहलवानों को वो मान सम्मान दिलाया की आज कुश्ती भारतीय समाज में सर्वाधिक लोकप्रिय खेल हैं और सुशील और योगेश्वर की  लोकप्रियता सचिन और धोनी के बराबर हो गयी है .......आज देश अपने पहलवानों पे गर्व करता है .....परन्तु ये भी एक कड़वा सच है की आज भी दिल्ली और हरियाणा का सबसे बड़ा माफिया दिचाऊ गाँव का कृष्ण पहलवान ही कहलाता है और GOW में गुंडे बदमाशों को पहलवान कहा गया है ..........
                                 आज देश में मुसलमानों की  दशा भी पहलवानों  जैसी हो गयी है ........जैसे पहलवान अलग पहचाना जाता है वैसे ही मुसलमान भी .......पहनावा , दाढी ,मूछ , तुर्की टोपी , भाषा , लहजा ...हर चीज़ से अलग पहचान बनती है ...........सदियों तक मुस्लिम आक्रान्ताओं , लुटेरों और शासकों के अत्याचार , कत्ले आम और लूट पाट  भारतीय हिन्दू समाज झेलता रहा है .धार्मिक असहिष्णुता मुस्लिम समाज की मूल समस्या रही है .......रही सही कसर सार्वभौमिक इस्लामिक आतंकवाद ने पूरी कर दी है  ..........सो पूरे विश्व में मुसलामानों की इमेज तो खराब है ही .......देखो भैया इमेज न एक दिन में खराब होती  है न सुधरती है ........ मुस्लिम आतंकवाद और असहिष्णुता और धार्मिक जड़ता ने आम मुसलमान की इमेज भी खराब की है और इसका खामियाजा उसे भुगतना ही पड़ता है . मुस्लिम समाज ने अपनी इमेज एक जाहिल समाज की बना ली है .......जो progressive नहीं है ......आज भी मदरसे में ही पढना चाहता है ....ज़रा ज़रा सी  बात पे सड़क पे आ के फसाद शुरू कर देता है .......अपनी औरतों पे अत्याचार करता है .......काश्मीर में लड़कियों के band पे ban  लगाने से मुसलामानों की क्या इमेज बनी ? ये माना की सभी मुसलमान ऐसे नहीं ....कुछ progressive भी हैं पर उनकी संख्या इतनी कम है और वो बेचारे इतने मूक हैं की उनकी आवाज़ सुनायी ही नहीं देती ........ शाहरूख खान की पीड़ा समझ आती है ..... उन्हें सिर्फ मुसलमान होने के नाते अमेरिका के हवाई अड्डों पे तलाशी और लम्बी पूछताछ से गुजरना पड़ता है .
                                       जैसे पहलवानी में सुशील और योगेश्वर जैसे नायक पैदा हुए और उन्होंने पूरे देश में पहलवानों की इमेज बदल दी वैसे ही मुसलामानों को पूरे विश्व में अपने अन्दर से नायक पैदा करने होंगे जिस से की उनकी खराब हुई इमेज ठीक हो सके .





























Wednesday, February 6, 2013

उम्मीद की किरण नज़र आयी है .........

                                        आज दिन की शुरुआत बहुत बुरी रही .वो कोई बीमारी है जो इन्टरनेट और फेसबुक इत्यादि के अत्यधिक प्रयोग से लग जाती है . उसका प्राथमिक लक्षण ये है कि  अगर बन्दा रात को मूतने के लिए उठे और वापस बिस्तर में ना जा कर नेट पे बैठ जाए तो समझ लो गया . सो अपने को ये काफी पहले हो गयी थी .आज अलस्सुबह फेसबुक खोल के बैठ गए और वहाँ चहुँ ओर व्याप्त गाली गुप्ते के माहौल में हिन्दू अखबार के प्रख्यात पत्रकार श्री P SAINATH का लेक्चर खोल लिया यू ट्यूब पे . इसमें उन्होंने हमारे मिडिया जगत में व्याप्त विभत्स भ्रष्टाचार ,अनाचार और दुराचार पे प्रकाश डाला है . https://www.youtube.com/watch?v=AbjsQ_dYuJQ ...... 
"Pay-to-print": How Media Corruption Undermines Indian Democracy .......ये रहा लिंक .....( कृपया copy , paste कर लें ) सवा घंटे के लेक्चर में उन्होंने प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की कारगुजारियां उजागर की हैं . मीडिया houses. की blackmailing , extortion , और तमाम अन्य malpractices के बारे में तफसील से बताया है .....पेड न्यूज़ को समझाया है ......उसके ramifications और repurcussions discuss किये हैं ....... अपने 50 साल के जीवन में पहली बार मैंने खुद को बेचारा , बेसहारा और लाचार महसूस किया . बहुत इमोशनल किस्म का आदमी हूँ ....बेबात आंसू आ जाते हैं ........पर जीवन में पहली बार हताशा और निराशा में रोया .........वो लिंक फेसबुक पे डाला ....और जैसा कि  आम तौर पे होता है , गाली गुप्ते और प्रलाप में व्यस्त भाई लोगों ने देखा तक नहीं ....न कोई लाइक न कमेन्ट ..........उस लड़की को friend request भेजी , जिसने वो लिंक डाला  था .......सारा दिन उदास , निराश और तकरीबन depression में रहा .......
                              पर शाम को उम्मीद की किरण नज़र आयी है ......... दिल्ली के SRCC में नरेन्द्र मोदी का युवाओं को संबोधन सुन के फिर कुछ आशा बंधी है ........ उनके मुह से गुजरात के बारे में सुन के अच्छा  लगा ....... मुझे तो यूँ लगा की ये आदमी तो सिर्फ मुझसे ही बात कर रहा है ....इसे पता है की आज मैं बहुत उदास हूँ . सबसे अच्छी बात ये थी की उन्होंने ये आशा जगाई कि यही व्यवस्था, यही कानून .यही सरकार ,यही अफसर ,यही दफ्तर और यही फाइल सब कुछ कर सकती है . सिर्फ एक अच्छी सरकार हो जो pro people हो और good governance दे ......P2G2  ..........सुबह P Sainaath का लेक्चर सुन समझ के आज पूरे प्रसारण में मीडिया की हरमजदगी भी साफ़ दिख रही थी  ....समझ आ रही थी ........ अब मैं फिर उठ बैठा हूँ ....चलने को तैयार .....बहुत दूर जाना है .
 फैज़ की ये नज़्म रूह में जान दाल देती है 


हम देखेंगे
लाज़िम है के हम भी देखेंगे
वो दिन की जिसका वादा है
जो लौहे-अज़ल पे लिखा है

जब जुल्मो-सितम के कोहे-गरां
रूई की तरह उड़ जाएंगे
हम महकूमों के पांव तले
ये धरती धड़-धड़ धड़केगी
और अहले-हिकम के सर ऊपर
जब बिजली कड़-कड़ कड़केगी

जब अर्ज़े-खुदा के काबे से
सब बुत उठवाए जाएंगे
हम अहले-सफा मर्दूदे-हरम
मसनद पे बिठाए जाएंगे
सब ताज उछाले जाएंगे
सब तख्त गिराए जाएंगे

बस नाम रहेग अल्लाह का
जो गायब भी है, हाज़िर भी
जो मंज़र भी है, नाज़िर भी
उठ्ठेगा अनलहक़ का नारा
जो मैं भी हूं और तुम भी हो
और राज़ करेगी खल्क़े-खुदा
जो मैं भी हूं और तुम भी हो


अहले-सफा pure people; अनलहक़ I am Truth, I am God. Sufi Mansoor was hanged for saying it; अज़ल eternity, beginning (opp abad); खल्क़ the people, mankind, creation; लौह a tablet, a board, a plank; महकूम a subject, a subordinate; मंज़र spectacle, a scene, a view; मर्दूद rejected, excluded, abandoned, outcast; नाज़िर spectator, reader







 

Tuesday, February 5, 2013

सैर कर दुनिया की गाफिल , जिंदगानी फिर कहाँ

                                                   मेरे दो दोस्तों ने ग़दर मचा रखा है . एक हैं Tarun Goyal . श्री मान जी इंजिनियर हैं .ऐसे वैसे नहीं , सचमुच के .........क्योंकि आजकल तो BTech करने वालों ने भी ग़दर मचा रखा है .......जिसे देखो वही BTech लिए घूम रहा है .....घर घर खुल गए हैं इंजीनियरिंग कालेज ....साली BTech की तो कोई इज्ज़त ही नहीं रही ........MBA से भी गए गुजरे हो गए . खैर मुद्दे पर वापस आते हैं . तो तरुण गोयल साहब इंजिनियर बन के अब घूमने निकल पड़े हैं . घुमक्कड़ी का भूत सवार हो गया है . सुना है की अभी 6 महीने हिमालय पे घूम के आये हैं .....फिर सुनते हैं की पकिस्तान चले गए थे .......बेचारे माँ बाप ....... क्या बीतती होगी उनके दिल पे ........एक दुसरे हैं जनाब नीरज जाट जी ........वो तो बड़े बदनाम घुमक्कड़ हैं ......... कई बार मैं सोचता हूँ की ये METRO वाले इसे बर्दाश्त कैसे करते होंगे . इतनी छुट्टी इसे मिलती कैसे होगी ......... नीरज जाट  के ब्लॉग पे उनकी अलमस्त घुमक्कड़ी पे कई कमेंट्स पढने को मिलते हैं .........टूरिस्ट किस्म के लोग उन्हें समझ नहीं पाते .....लिखते हैं की क्या फ़ालतू का घूम रहे हो ....वो बेचारे सफ़ाइयाँ देते फिरते हैं ....अरे भाई टूरिज्म और घुमक्कड़ी में फर्क होता है ......क्या फर्क होता  है .......
                                       इसके अलावा एक और लड़की है जिसने मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री में ग़दर मचा रखा है . वो है स्नेहा खानवलकर . पिछले साल रिलीज़ हुई अनुराग कश्यप की बहु चर्चित फिल्म gangs of wasseypur में उन्होंने म्यूजिक दिया है जिसकी चहु ओर प्रशंसा हो रही है . पिछले दिनों उनका एक इंटरव्यू देख रहा था मैं . वो बता रही थी की अपनी फिल्मों का म्यूजिक तैयार करने के लिए वो सारे हिन्दुस्तान और सारी दुनिया में घूमती हैं . फिर वो बताती हैं की उनका बचपन इंदौर में बीता , एक साधारण मिडिल क्लास परिवार में , और उन्हें बचपन में बिलकुल घूमने को नहीं मिला .उम्र इंदौर में ही बीत गयी . फिर जब फिल्म इंडस्ट्री  में काम करने का मौक़ा मिला तो profession की मांग ही ऐसी थी जहां उन्हें  दुनिया जहान की music , sounds और beats को जानने की ज़रुरत थी . और वो थी कूप मंडूक .सो वो निकल पडी दुनिया घूमने .अकेली ही . उन्हें दिबाकर बनर्जी की फिल्म oye lucky .........lucky oye में एक रागिनी कंपोज़ करनी थी , जिसके लिए वो 6 महीना पंजाब में घूमती रही .....सैकड़ों गायकों से मिली पर वो रागिनी मिलती भी कैसे .....क्योंकि वो तो हरियाणवी थी ......तू राजा की राज दुलारी ........फिर अंत में उन्हें वो हरियाणा में मिली .........सो वो GOW के लिए पूरा UP  ,Bihar  ,Mauritius, Trinidad & Tobago हर उस जगह पे घूमी जहां हिंदी और भोजपुरी भाषी बसते हैं . और वो शहरों में नहीं बल्कि गाँव गाँव , गली गली , बस्तियों और झोपड़ियों में घूमती फिरी , और इस मेहनत के बाद जो म्यूजिक उन्होंने तैयार किया उसने दुनिया का दिल जीत लिया .
                                      दुनिया में ज़्यादातर लोग घूमना फिरना पसंद करते हैं . पर वो टूरिस्ट होते हैं . घुमक्कड़ नहीं . दरअसल टूरिस्ट तो बड़ा बेचारा किस्म का जीव होता है . अवध के नवाब वाजिद अली शाह जैसा . जब अवध पे अंग्रेजों ने हमला किया तो नवाब साहब सिर्फ इसलिए न भाग पाए क्योंकि महल में कोई उन्हें जूते पहनाने वाला न था . लखनऊ की बात चली तो  मुझे एक बड़ा मजेदार किस्सा याद आता है .उन दिनों हम लखनऊ में रहते थे .एक शाम मैंने यूँ ही धर्मपत्नी के कान में धीरे से कहा .....नैनीताल चलोगी ?और उसने मुंडी हिला दी . तो फिर चल 5 मिनट में तैयार हो जा . 9 बजे की ट्रेन है . 8.30 बज चुके थे .2 मिनट में बैग में कपडे ठूसे , और भाग लिए .....auto पकड़ा .........किसी तरह भागते हुए स्टेशन पहुंचे ....... उन दिनों वो लालकुआं एक्सप्रेस चारबाग़ छोटी लाइन से चला करती थी . वहाँ पहुंचे तो गार्ड हरी झंडी दिखा रहा था और ट्रेन चल पड़ी थी .......... किसी तरह भागते पड़ते गार्ड के डब्बे में ही चढ़ गए .....वो बेचारा भी हमें देख के ही डर गया ........खैर 5 मिनट बाद ट्रेन जब ऐशबाग रुकी तो उतर के अगले डिब्बे में गए .....TTE के कान में गुरु मंत्र मारा और उसने 2 सीट दे दी . सुबह लालकुआ उतरे , टैक्सी पकड़ के नैनी ताल गए . दो दिन वहाँ मस्ती से घूमे फिरे  और लखनऊ वापस ...........ये तो हुई घुमक्कड़ी ...... अब अगर इसे टूरिज्म का रूप दिया जाए तो कहानी कुछ यूँ होती ......धर्म पत्नी 2 महीने से मेरा सर खाती .....घूमने चलो घूमने चलो .....अच्छा कहाँ जाना है ....नैनीताल .......नहीं   .... मसूरी ....नहीं ....शिमला ....नहीं .....ऊटी ....15 दिन में तो जगह decide होती ....फिर reservation........  मिलता न मिलता ......AC 3 टियर ....नहीं 2 टियर ....स्लीपर में नहीं जाउंगी ....जान दे दूंगी ....ख़ुदकुशी कर लुंगी ......स्लीपर में नहीं जाउंगी ........चलो जी , अब रिजर्वेशन हो गया ....अब होटल बुक करो ........टैक्सी .....पैकिंग ...कपडे ....लहंगा ....घाघरा .......सैंडल ........ वहाँ नाश्ते में maggi खाई ....दिन में शाही पनीर के साथ लच्छा पराँठा ........घोड़े पे चढ़े , फोटो खिचाया , शाल खरीदा ....घर वापस .....हो गया टूरिज्म .

कहने का मतलब की टूरिस्ट बेचारा घूमते फिरते भी अपने comfort zone से बाहर नहीं निकलना चाहता . आम तौर पे टूरिज्म से रहस्य , रोमांच , मस्ती और फक्कडपन गायब होता है . घुमक्कड़ बड़ा मस्त जीव होता है . वो बिना कारण के घूमता है।  बिना प्लानिंग के घूमता है . बिना बजट के घूमता है . सो के, बैठ के, खडा हो के, लटक के , छत पे बैठ के यात्रा करता है . ट्रक ,बस, साइकिल ,बैलगाड़ी, ट्रेक्टर, जहां मर्जी लटक लेगा .....लिफ्ट मांग लेगा . गंदे कपडे पहने , दाढ़ी बढाए ,कही भी सो जायेगा , खा लेगा . किसी का भी मेहमान हो जायेगा . जाना था कही ,और पहुँच गया कही और ........स्थानीय लोगों से मिलेगा जुलेग ....स्थानीय भोजन खायेगा .......वहाँ की सभ्यता और संस्कृति को महसूस करेगा . लोक रीत और लोक संगीत जानेगा ......टूरिस्ट जेब भर के घर से निकलता है और खाली हाथ घर लौट आता है ...........घुमक्कड़ खाली हाथ घर से निकल पड़ता है और अनुभवों का खजाना लिए वापस लौटता है।  अक्सर लोग कहा करते हैं की travelling is the best education ........पर अवश्य उनका आशय घुमक्कड़ी से होगा न की टूरिज्म  से .

                                            मैं जब Tarun Goyal , Neeraj Jat और Sneha khanwilkar की घुमक्कड़ी के किस्से पढता हूँ तो मुझे बीते जमाने के मूर्धन्य साहित्यकार राहुल सांकृत्यायन का ख्याल आता है जिन्होंने पूरी दुनिया पैदल ही घूम डाली , 36 भाषाओं के ज्ञाता हुए और हिंदी एवं बौद्ध साहित्य के प्रकांड विद्वान् हुए . उन्होंने अपने पूरे जीवन का निचोड़ ही यायावरी ....यानी घुमक्कड़ी को बताया . उन्होंने घुमक्कड़ी के धर्म को सभी धर्मों का आधारभूत धर्म कहा है और पर्यटन की प्रकृति को संसार का सबसे बड़ा सुख बताया है। आपके अनुसार घुमक्कड़ी की महिमा किसी शास्त्र से कम नहीं है। राहुल जी ने संसार के अनेक महापुरूषों की सफलता का रहस्य घुमक्कड़ी को ही बताया है और कोलंबो, डार्विन, वास्कोडिगामा, बुद्ध, महावीर, शंकराचार्य, रामानुज, गुरू नानक आदि का उदाहरण सभी क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ योगदान के लिये दिया है। वस्तुत: आपके विचारों का आशय यह है कि नई-नई जगहों पर नये-नये देशों मे घूमने से व्यक्ति विभिन्न लोगों और उनकी सभ्यता तथा संस्कृति के संपर्क में आता है और इस प्रकार बहुत कुछ सीखने एवं जानने का मौका उसे मिलता है।   किसी शायर ने ठीक ही कहा है ............
                          सैर कर दुनिया की गाफिल  , जिंदगानी फिर कहाँ 
                           जिंदगानी गर रही तो , नौजवानी फिर कहाँ 












































Monday, February 4, 2013

मुस्लिम वोट का समाज शास्त्र

बात यूँ है की इतने बड़े मुल्क में ले दे के दो ही तो समाज शास्त्री थे . एक अपने नंदी साहब और एक मैं . अब नंदी साहब तो रहे नहीं .वो तो वहाँ जयपुर में literfest में फ़ौत  हो गए .........अच्छे भले ठीक ठाक थे .अच्छा खासा lecture दे रहे थे . पर वहीं न जाने क्या हुआ , बेचारे के मुह में कपड़ा ठूंस दिया लोगों ने . दम घुट गया बेचारे का . इंतकाल फरमा गए . अब ले दे के मैं बचा हूँ ,सारी  जिम्मेवारी अब मेरे ही ऊपर है . चिंतन मनन करने की .  जब से सच्चर कमिटी की रिपोर्ट आई है लोगबाग परेशान हैं . और मुद्दा सचमुच है भी परेशानी का . सच्चर साहब ने कह दिया की मुसलमान हर field में पिछड़ा है . हर parameter से पिछड़ा है . अब सच्चर साहब ने कोई नई बात तो कही नहीं .सब जानते हैं .हम भी जानते हैं मुसलमान भी जानता है .कि वो पिछड़ा है .क्यों पिछड़ा है , ये पूरी तरह समाज शास्त्र का विषय है। डाक्टर को मरीज से सच बोलना पड़ता है . और सच बोलने पे लोग बाग़ बेचारे के मुह में कपड़ा ठूंस देते हैं .
                                       असहिष्णु समाज में सच बोलना खतरे से खाली नहीं . पर अगर समस्या को हल करना है तो सच तो बोलना ही पड़ेगा . और सच ये है की मुसलमान के पिछड़ने का पहला कारण अशिक्षा .जो  पढ़ लिख जाएगा वो पिछड़ा रह ही नहीं सकता . मुसलमान का मदरसा बंद करो और उसे अनिवार्य रूप से modern education दो . जो नहीं मानता उसे चार हाथ लगा के , साले को बाँध के पढ़ाओ . दूसरा ...परिवार नियोजन ......... बीवी एक बच्चे दो . जिस परिवार में 14 बच्चे होंगे वो क्या खाक तरक्की करेगा .तीसरा , पर्दा .....मुसलमान औरत को परदे से बाहर निकालो और उसे पढाओ . चौथा .....मुसलमान को समाज की मुख्य धारा में शामिल करो . उसे बताओ की अब तू कुछ दिन मियाँ जी न बन , भाई साहब बन जा . उसकी लुंगी उतार के पैंट पहनाओ . तुर्की टोपी उतारो . शेव करो . साले को फ्रेंच कट रखाओ .ये लम्बी लम्बी मूछ रखाओ .पर ये दाढ़ी बढ़ा के  मूछ मुड़ाने वाला सिस्टम बंद करो . उसे समझाओ की तू कुछ दिन के लिए आदमी बन जा . तुझे देख के ये पता न लगे की तू मुसलमान है . तू एक आम हिन्दुस्तानी बन जा . उसकी जुमे की नमाज़ बंद कराओ . बोलो मस्जिद में नहीं , जा घर में पढ़ . जुमे को वो मौलाना की तक़रीर का जो वीकली डोज़ है उसे बंद करो . हर हफ्ते बेचारे को गरम कर देते हैं ...........कुछ दिन ठंडा होने दो . जिस दिन मुसलमान ठंडा हो गया , पढ़ लिख गया , समाज की मुख्य धारा में शामिल हो गया , उस दिन अपने आप अगड़ा हो जायेगा , खायेगा पीएगा तगड़ा हो जाएगा .
                                         देखो भैया , हम तो डाक्टर हैं .हमने तो blood test किया था . जो रिपोर्ट आई पढ़ के सुना दी . दवाई का पुर्जा लिख दिया . लो करा लो इलाज .पर इसमें एक दिक्कत है . वो यूँ की मुसलमान तो बेचारा परेशान है .उसका तो पेट जल रहा है .वो तो करा भी लेगा इलाज . पर उसके जो बाप लोग बैठे हैं न , ठेकेदार बन के , वो नहीं कराने देंगे . मौलाना न उसे पढने देगा , न नसबंदी कराने देगा , न उसकी बीवी को बुर्का उतारने देगा न उसकी तुर्की टोपी उतरने देगा . बुरका और टोपी उतारते ही इस्लाम खतरे में जो पड़  जाता है . पकिस्तान में पूरी किरकिट टीम को दाढ़ी रखवा दी मौलाना ने . और अगर मौलाना इन चार इलाज पे मान भी जाए तो ये जो उसके बाप बैठे हैं न . लालू , मुलायम , नितीश कुमार और सोनिया गांधी जैसे लोग  , ये नहीं होने देंगे .क्योंकि पढ़ा लिखा अगड़ा तगड़ा मुसलमान इन्हें सूट नहीं करता . क्योंकि इन्हें चाहिए मुसलमान का वोट , वो भी थोक में . अब थोक में कौन वोट देगा . भेंड बकरियों के रेवड़  हुआ करते हैं  . शेर तो अकेला ही मस्त पड़ा रहता है जंगल में . जाहिल , अनपढ़ ,दबा कुचला और डरा सहमा  आदमी ही Ghettos में झुण्ड बना के रहता है . हमारी पोलिटिकल लीडरशिप को भी डरा सहमा मुसलमान ही सूट  करता है। वो जो बीजेपी और RSS से डरा रहे , और कांग्रेस ,सपा , बसपा,और JDU को थोक में वोट देता रहे . और मुसलमान को डराने का सबसे बड़ा हथियार इन लोगों ने मोदी को बना दिया है .......... वो देखो .......मोदी आ रहा है ....... तुम्हे कच्चा खा जाएगा . बीजेपी ......तुम्हे कच्चा खा जाएगी .....इसलिए हमें वोट दो ........ और बेचारा मुसलमान इनके झांसे में आ के इन्हें एकमुश्त वोट डाल आता है।
                                      बचपन में landline फोन हुआ करते थे . हमारे शहर में एक लाला जी हुआ करते थे . उनको हम लोग फोन करके छेड़  देते थे। और फिर वो शुरू हो जाते . ये मोटी  मोटी  गालियाँ देते . चीखते चिल्लाते . हमें बड़ा मज़ा आता .अपना तो फ्री का entertainment था . फिर हमने उनका नंबर अपने और कई दोस्तों  को दे दिया। कुछ दिन पूरे शहर ने उनके मजे लिए . पर कुछ महीनों बाद वो कुछ बीमार पड़  गए और उन्होंने गद्दी पे बैठना छोड़ दिया . अब उस नंबर पे फोन करने पे कोई रेस्पोंस न मिलता . एक आदमी था जो तुरंत फोन काट देता था . हमारा entertainment बंद हो गया . हमने भी फोन करना बंद कर दिया .
                                       डरा सहमा मुसलमान , जाहिल बन कर, जब तक इन पार्टियों को एकमुश्त वोट देता रहेगा , ये तब तक उसे जाहिल ही बना के रखेंगी .डरा सहमा जाहिल मुसलमान कांग्रेस को सूट करता है .पढ़ा लिखा अगड़ा तगड़ा मुसलमान BJP को सूट करता है .  गुजरात में मुसलमान ने मोदी और बीजेपी के राज में रह के देख लिया है .अब वहाँ उसे बीजेपी और मोदी से डर नहीं लगता। इसी लिए वहाँ 32% मुसलामानों ने बीजेपी को वोट दिया है . जिस दिन वो कांग्रेस को एक मुश्त वोट देना बंद कर देगा , इनके किसी काम का नहीं रहेगा . और इनके चंगुल से छूट जायेगा .




































 

Ohh India ....A big heap of garbage

                                              दोस्तों ये एक पूर्णतः सत्य घटना है . उन दिनों हम मियां बीवी  यहाँ पंजाब में नज़दीक के एक शहर में insurance  companies  में काम करते थे .हम दोनों के दफ्तर लगभग अगल बगल ही थे . धर्म पत्नी के दफ्तर का मेनेजर और बाकी सब लोग अपने यार दोस्त ही थे , सो अपना तो ज्यादा टाइम अपने दफ्तर में कम और उनके यहाँ ज्यादा बीतता था . एक दिन मैं  दोपहर बाद जब वहाँ पहुंचा तो वहाँ का नज़ारा देखने लायक था .पूरे ऑफिस  में तकरीबन हर टेबल पे जूठी प्लेटें , ग्लास , tissue  papers  और polythenes पड़े थे .  फिर भी सब कर्मचारी निर्विकार भाव से , पूरी तन्मयता के साथ अपने अपने काम में लगे हुए थे . अपने देश वासियों की कर्तव्य निष्ठा , मेहनत और लगन देख के मेरा तो दिल बाग़ बाग़ हो गया . दरअसल पिछली रात ऑफिस  में कोई पार्टी हुई थी . और लोग खा पी के चलते बने थे . कंपनी की ये ब्रांच नई नई ही खुली थी सो कोई पक्का हेल्पिंग स्टाफ नहीं था .अगले दिन सब लोग जब काम पे आये तो पूरा ऑफिस गन्दा ही पड़ा था . भाई लोग आये और सच्चे कर्मयोगी की तरह काम में जुट गए .जब मैं बाद दोपहर वहाँ पहुंचा तो मुझे बड़ा अजीब सा लगा . धर्म पत्नी  भी अपनी टेबल पे विराजमान थीं और कार्य रत थी .मैंने धीरे से उनके कान में कहा " ये क्या माजरा है . इसे तुम साफ़ करती हो या मैं करूँ ...........अगर मैं करूंगा तो तुम लोगों की ज्यादा बेइज्ज़ती होगी . और वो एकदम आज्ञाकारी पत्नी की तरह तुरंत जुट गयी . जैसे ही वो जुटी , दो और साथ लग गए . फिर सारे आ गए .दो मिनट में ही सारा कूड़ा करकट फेंक दिया . फिर झाड़ू उठायी , फिनाइल डाल के पोंछा लगाया और 5 -7  मिनट बाद सारी ब्रांच चम् चम् चमक रही थी . इस दौरान मैं अपने दोस्त मेनेजर के साथ उसके केबिन में बैठा था . वो कुछ शर्मिंदा भी था और बहुत खुश भी था .
                                         आजकल पंजाब को मिनी यूरोप कहा जाता है .क्योंकि लगभग आधा पंजाब तो वहाँ दूर पश्चिमी देशों में जा के बस गया है . वहाँ लोग दिन रात मेहनत  मजदूरी कर के अपना जीवन संवार रहे हैं . पंजाब में जो सम्पन्नता दिखती है उसका ज़्यादातर श्रेय NRI पंजाबियों को ही जाता है . वो घर आ के वहाँ के किस्से सुनाते ही हैं . और हम लोग आश्चर्य चकित हो सुनते हैं . मेरे एक मित्र कनाडा में रहते हैं . एक बार उन्होंने मुझे बताया की मेरे दफ्तर में हम लोगों की साप्ताहिक ड्यूटी लगती है साफ़ सफाई की . जिसकी ड्यूटी होती  है वो उस दिन आधा घंटा पहले आ के पूरी सफाई करता है , झाड़ू पोंछा करता है , टेबल साफ़ करता है , शीशे साफ़ करता है , टॉयलेट्स को भी साफ़ करता है .मज़े की बात ये की सिर्फ कर्मचारी ही नहीं मालिक की भी टर्न आती है .  एक और किस्सा सुनाया उन्होंने . जब किसी के घर में कोई पार्टी या डिनर होता है तो भाई लोग अपनी अपनी दारु ले के आते हैं . खाना पीना खा के फिर सब लोग काम में जुट जाते हैं . कुछ लोग पूरे बर्तन साफ़ करते हैं , सारी  सफाई करते हैं .कहने का मतलब जाने से पहले मेजबान का घर और रसोई एकदम चमा चम् . पाश्चात्य सभ्यता , जिसे हम भारतीय आमतौर से हिकारत से ही देखते हैं , के पास हमें सिखाने के लिए बहुत कुछ है . अफ़सोस की उनके दुर्गुण तो हम तकरीबन सारे सीख ही चुके है पर जो गुण है उनसे पूरी तरह अछूते हैं .देश वासियों को  hygene , cleanliness , garbage disposal की शिक्षा युद्ध स्तर पे दिया जाना बहुत ज़रूरी है . हमारे education सिस्टम में इसे बड़े पैमाने पे शामिल करने की







                                            

Sunday, February 3, 2013

तेरा इमोसनल अत्याचार.........

                                                   पुराने ज़माने में हमारे देश में बड़ी सामाजिक किस्म की फिल्में बना करती थी . शरीफ सी हिरोइन होती थी , साडी पहनती थी . सर पे पल्लू रखती थी .और हाँ ब्लाउज भी ठीक वाला होता था .आज जैसा नहीं . अभी हाल की बात है .मैं अपनी बीवी के साथ कही जा रहा था . वहाँ Radisson Hotel के सामने एक नव यौवना दिखी .साड़ी पहने . भैया मैं तो हक्का बक्का रह गया .भला ऐसा भी कभी होता है कि  लड़की ब्रा के ऊपर blouse पहनना ही भूल जाए . फिर मेरी बीवी ने मेरा ज्ञान वर्धन किया कि  नहीं पतिदेव ये जिसे तुम ब्रा समझ रहे हो दरअसल वो ब्लाउज ही है .....नए ज़माने का . सो पुराने ज़माने में फिल्मों में हिरोइन कायदे से ब्लाउज वगैरह पहन के गाना गाती थी . फिल्में ज़्यादातर इमोसनल किस्म की होती थी .रोना धोना मचा रहता था .रो रो के लोगों के रुमाल भीग जाया करते थे .रोने धोने वाली फिल्म  सुपर डुपर हिट होती थी . ऐसा नहीं था की मार धाड़ वाली फिल्म नहीं बनती थी . मार धाड़ में भी इमोसन का डोज़ भरपूर होता था . मसलन बच्चे माँ  से बिछड़ जाते थे . हीरो कमबख्त सब कुछ करता , इश्क लड़ाता , गुंडों को पीटता और लगे हाथ माँ  को भी याद कर के रो लेता था  . पर आजकल अपनी फिल्म इंडस्ट्री में ये जो साले नए लौंडे आये हैं , इन्होने सब भ्रष्ट कर के रख दिया है . cultural भ्रष्टाचार मचा रखा है . इमोशनल अत्याचार का ज़माना नहीं रहा अब . अब realistic फिल्में बनती हैं . हकीक़त के नज़दीक . हीरो तो हीरो ,अब तो हेरोइन भी बहिन मतारी गरिया रही है . बेचारी माँ बहनों के देखने लायक तो रही ही नहीं फिल्में .
                                        पर मुझे इस घोर घुप्प अँधेरे में उजाले की किरण नज़र आती है . पुरानी हेरोइन वाला समय जल्दी लौट के आएगा . सुगबुगाहाट शुरू हो गयी है .सब लोगों को तो नहीं दिखता होगा पर मुझ जैसे मूर्धन्य समाज शास्त्री तो बदलती हवा सूंघ ही लिया करते हैं . मैं इधर देख रहा हूँ की इमोसनल फिल्मों का दौर लौट रहा है .नयी scripts लिखी जा रही हैं .....बनी बनाई फिल्मों में नए scenes जोड़े जा रहे हैं . इमोसन का तडका लग रहा है .  हाल ही में रिलीज़ हुई एक फिल्म  के इस सीन पे गौर फरमाइए ......बेचारी विधवा माँ सफ़ेद साड़ी पहन , पल्लू सर पे लिए , जा रही है . उसका अनाथ , टूअर बेटा पल्लू पकड़ के साथ चल रहा है . वो उस लड़की के घर जा रहे हैं जिसकी हाल ही में gang rape के बाद ह्त्या हो गयी थी . वहाँ एक माँ ने दूसरी को गले लगा लिया . दोनों की आँख से आंसू बह चले . पीछे से रेणुका चौधरी running कमेन्ट्री सुनाने लगी ..........लाइव टेलीकास्ट हो ही रहा था .....फिर लड़की की माँ बोली , मैं आपका दुःख समझ सकती हूँ ......आपने भी इतना कुछ खोया है .......देश के लिए ......... बेक ग्राउंड म्यूजिक .....सारंगी ........ अब मेरे बच्चे आपके बच्चे हैं ........ लड़की के भाई  अनाथ युवराज से लिपट गए ....रोने लगे .....रेणुका चौधरी ने रुमाल थमाया .....विधवा माँ ने दिवंगत लड़की की physiotherapy की किताबों को छुआ .....कपड़ों को सहलाया ......... इमोसन का तडका .......अंग अंग फड़का ...... फिल्म ब्लाक बस्टर ........
                          ऐसी ही एक फिल्म पिछले हफ्ते रिलीज़ हुई थी , जयपुर में . सुनते हैं की उसमे रिलीज़ से एन पहले इमोसन एक्सपर्ट ने एक सीन जोड़ा था .........  हीरो को वीरता पुरस्कार दिया जा रहा है .......वो  माइक पे बोल रहा है ....... सुबक ...सुबक .....कल रात मेरी माँ .....रोने लगी बेचारी ....सुबक ....... और फिर हॉल में बैठे सारे रण बाँकुरे भी , मारे इमोसन के , सुबकने लगे ........ बरखा दत्त भी इमोसनल हो गयी , अनुराधा प्रसाद शुक्ला तो दहाड़ मार के रोने लगीं . फिर बेटा जब स्टेज से भारत रतन ले के उतरा तो माँ ने गले लगा लिया .......कट ...कट ...कट .
                              एक और फिल्म पे नज़र डालिए ........कुछ महीने पहले आज़मगढ़ में रिलीज़ हुई थी . उसमे लीड रोल में अपने सलमान भाई थे ........ नहीं नहीं ....सलमान खान नहीं .....नहीं यार सलमान रुश्दी भी नहीं .....उनको ले के तो  हिन्दुस्तान में  फिल्म बन ही नहीं  सकती .....उसमे हीरो थे अपने सलमान फर्रुखा बादी ........वहाँ उन्होंने बेचारे कुछ victim किस्म के मुसलामानों की सभा में बताया की राजमाता तो दिल्ली में एनकाउंटर की फोटो देख के इमोसनल हो गयी थी  .....मारे इमोसन के रोने लग गयी ....... सो आप लोग अब वोट दे दो . पर वहाँ कनफूजन मच गया . एनकाउंटर में एक पुलिस वाला भी मरा था . सो लोग बाग़ समझ ही न पाए की राज माता जो रोई थी वो terrorist की फोटो देख के रोई थी या पुलिस वाले की लाश देख के ....सो इस कनफूजन में फिल्म पिट गयी ......सुपर फ्लॉप ........
                               फिल्म इंडस्ट्री में घमासान  मचा है ..........10 जनपथ productions से  इमोसनल फिल्में धडा  धड रिलीज़ हो रही हैं ....... उधर साले अनुराग कश्यप ने गाली गुप्ता मचा रखा है . माँ  बहन से नीचे बात ही नहीं करता .......... अब देखना है की पब्लिक माँ बहन एक करती है या रुमाल गीले .......... अंत में मुझे Gangs Of Wasseypur फिल्म का वो डायलाग याद आता है .....जिसमे रामाधीर सिंह कहता है ...........सबके दिमाग में अपनी अपनी फिल्म चल रही है ............जब तक ये फिल्में बनती रहेंगी .....पब्लिक चूतिया बनती रहेगी ..........


























Saturday, February 2, 2013

अरे ....राजा तो नंगा है

                                        फेस बुक ने हमारे जैसे ठलुओं का कल्याण कर दिया है . इसने हमें वो आजादी दी जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते थे . भगवान् ने दो ही किस्म के प्राणी आज़ाद पैदा किये . एक हिन्दू और एक ये फेसबुकिये . जी हाँ हिन्दुत्व ही एक मात्र ऐसा धर्म है जिसने अपने चेलों को पूरी आजादी दी है ........भगवान् ने जब हिन्दू बनाया तो उसे बोला .....जा बेटा ,ऐश कर .......... जिसे मर्जी पूजना है पूज .....और जिसपे चाहे .......... मूत दे ...... जा तुझे 33 करोड़ देवी देवता दिए ......पूज जिसे मर्ज़ी , और इनमे कोई भी पसंद ना आये तो नए बना ले .........33 करोड़ आइटम का बुफे ......साथ में alacart भी .....वाह .....और उसपे सोने में सुहाग क्या ? जैसे मर्जी पूज ....कोई fixed पूजा पद्धति नहीं ...... आरती उतार , हवन कर , नंगा घूम , सर मुड़वा ले , जटा जूट रख ले . बकरा काट के बलि चढ़ा . दारु की बोतल चढ़ा , फिर छक के पी .....या फिर कोई नया तरीका निकाल ले भक्ति का ....जैसे यहाँ पंजाब में निकाल रखा है लोगों ने ....जागरण कराने का .....भक्ति की भक्ति ....बिजनेस का बिजनेस ......... इसके अलावा कोई fixed किताब नहीं .....वेद , उपनिषद , पुराण , गीता , रामायण , ऐसी न जाने कितनी हैं .........और इनमे से कोई पसंद नहीं ....कोई बात नहीं ......नयी लिख ले बेटा ....अपने लिए .
                                  जो आजादी हमें हिन्दुओं को दी भगवान् ने , वो अल्लाह मियाँ ने नहीं दी मुसलामानों को . इस मामले में बड़ा तंग दिल और संग दिल निकला अल्लाह . ले दे के एक किताब , एक अल्लाह और बस फकत एक  पैगम्बर , यहाँ हम साले रोज़ नया पैगम्बर पैदा कर देते हैं .........आंबेडकर भगवान् हो गए , कुछ दिन में मायावती हो जाएँगी , रजनीकांत हैं ही साउथ में . मुंबई में बाल ठाकरे हुआ करते थे . इस्लाम में पैगम्बर  को और किताब को गरिया नहीं सकते .......blesphemy का कानून लागू हो जाता है .......या फिर लोगबाग खुद ही कानून बना के काट देते हैं बन्दे को ........हिन्दुत्व में इस मामले में बड़ी आजादी है ....जिसे मर्जी खरकचो .......जम के गरियाओ ....एकदम बिंदास .....कोई साला क्या उखाड़ लेगा .......और अगर कोई रोके टोके तो उसे भी गरियाओ .......कालर पकड़ लो .......कौन है बे तू .......तू कब का ठेकेदार हुआ बे हमारा .....हम ठहरे आज़ाद मुल्क के आज़ाद बाशिंदे .....हिन्दू धर्म ने अपने अनुयायियों को बेइन्तहा आजादी दी , सोचने की , समझने की , व्याख्या की ,  नयी सोच पैदा करने , संशोधन करने की आलोचना करने की और नकार देने की . हिन्दुत्व समय के साथ बदलता रहा , grow करता रहा . यहाँ महावीर हुए , बुद्ध  हुए , फिर वामी हुए .....वाम मार्ग यानी लेफ्टिस्ट ( गुरुदत्त का विख्यात उपन्यास वाममार्ग पढ़ें ) जिन्होंने फ्री और open sex को प्रमोट किया .......एक तरफ जहां सांख्य और मीमांसा हुए तो चार्वाक भी हुए .......और अभी हाल ही में नानक और गुरु गोविन्द हुए .......ये सब हिन्दुत्व की independence  के Byeproducts  हैं . पर इधर सिख कुछ कुछ इस्लाम की तरह behave करने की कोशिश कर रहे हैं .......अभी आवाज़ उठी है की यदि कोई गुरु ग्रन्थ साहब का अपमान करता है तो धारा 302 में मामला दर्ज होना चाहिए ............ क्योंकि किसी चूतिया  टाइप सुप्रीम कोर्ट के जज ने फैसला दिया होगा कभी , की ग्रन्थ साहब एक Living guru हैं .........सो SGPC के कोई महानुभाव बोल रहे हैं की गुरु का अपमान करने पे 302 लगाओ .....मैंने एक जगह कह दिया , अबे  302 तो हत्या करने पे लगती है ....... अपमान करने पे तो यूँ ही compromise हो जाता है .......इसके बाद मैंने किसी तरह जान बचाई वरना उनपे 302 ज़रूर लग जाता . ........ blesphemy वाले कानून की बू आती है इसमें ........पंजाब को पाकिस्तान बनाना चाहते हैं सरदार जी लोग .
                                     तो साहब , दरअसल  बात शुरू हुई थी फेसबुक से  . सो इन्टरनेट ने नया दीन  ईजाद किया है .........facebookism ...........पूरी आजादी है भैया .........जिसे मर्ज़ी पूजो और जिसे मर्जी गरियाओ .......पर इस्लाम और सोनिया को ये आजादी रास नहीं आ रही है ........ ईश निंदा बर्दाश्त नहीं ..........एक बार हरिद्वार के कुम्भ मेले में कोई धर्म संसद बैठी और उसमे किसी ढोंगी शंकराचार्य ने सुझाव रखा की जैसे सिखों को अकाल तख़्त और मुसलामानों को मक्का से कण्ट्रोल किया जाता है वैसे ही हिन्दुओं की भी एक शीर्ष संस्था होनी चाहिए जो हिन्दुओं पे नियंत्रण रखेगी .......... तो हमारे जैसे आज़ाद पंछियों ने तुरंत जवाब दिया की तू है कौन बे हमें कण्ट्रोल करने वाला .........साले तेरी दाढ़ी और तेरा ये धर्म , दोनों तेरे चूतड़ों में डाल देंगे .......... हम फेसबुक पे ये बता देते हैं की कोई हमारा ठेकेदार बनने की कोशिश ना करे
                                    भारत सरकार फेसबुक , ट्विटर और सोशल मीडिया की आजादी और बढ़ती हुई ताकत से बेहद डरे हुए हैं . पूरी दुनिया में इस्लाम और मुहम्मद साहब के खिलाफ बोलने और इनकी आलोचना करने की हिम्मत कोई जुटा नहीं पाता था कल तक ............ आज लोगबाग खुल के बोल रहे हैं ........ इस्लाम ने आज तक  मुसलमानों  को इतना दबा के,  कुचल के और डरा के रखा की वो कभी अपनी विसंगतियों के बारे में सोच समझ ही नहीं पाए ........... पर इन्टरनेट , youtube और फेसबुक ने अचानक सब कुछ खोल के रख दिया है ......अब लोगबाग खुल के लिख बोल रहे हैं और मुसलमानों समेत सारी  दुनिया पढ़ सुन रही है ......मुस्लिम लीडरशिप को डर है की कहीं मुसलमान की आँख न खुल जाए .........कही उसे भी हिन्दुओं वाली आजादी की लत न पड जाए .........कल को कोई बच्चा  भरी  महफ़िल में ये न कह बैठे  की , अरे .....राजा तो नंगा है , और राजा  नंगा है , ये बात उस बच्चे को सिर्फ सोशल मिडिया ही बता सकता है .......... मुस्लिम लीडरशिप ने खतरा भांप लिया है . वो सरकार पे इन्टरनेट और सोशल मिडिया को दबाने के लिए दबाव डाल रही है .......... दूसरे भारत सरकार और खुद सोनिया गाँधी , सोशल मीडिया में भ्रष्टाचार पे अपनी आलोचना से परेशान हैं . कोढ़ में खाज यूँ  हो गयी है की  नरेन्द्र मोदी सोशल मीडिया में बेहद लोकप्रिय हैं और राहुल बाबा  एकदम फिसड्डी .......... भारत सरकार मुस्लिम तुष्टीकरण और खुद अपना उल्लू सीधा करने के लिए सोशल  मीडिया  को नियंत्रित करना चाहती है . आगे आगे देखिये होता है क्या ????












































Tuesday, January 29, 2013

रवि शंकर जी के साथ .....स्टेज पे

                                      पिछले  दिनों प्रख्यात सितार वादक रवि शंकर जी नहीं रहे . भारतीय शास्त्रीय संगीत का एक और मूर्धन्य कलाकार चला गया . अपनी इस जिंदगी में एक काम जो मैंने बहुत अच्छा किया , वो ये की शास्त्रीय संगीत सुना . और यूँ ही , ऐसा वैसा नहीं सुना . जम के सुना . दिन रात सुना . सुबह शाम सुना .खरीद के सुना . मांग के सुना . घूम घूम के सुना . जहां पहुँच सका महफिलों में , concerts में . private mehfils में सुना . इज्ज़त से सुना और चोरों की तरह घुस के सुना . कुर्सी पे बैठ के सुना , जमीन पे बैठ के सुना , रजाई ओढ़ के सुना और कई बार तो भरी महफ़िल में ( हरबल्लभ में ) कम्बल ओढ़ के सोते हुए सुना ...........वहाँ क़यामत के रोज़ जब अल्लाह मियाँ पूछेंगे कि   , ऐ बन्दे ........... आदमी बना के भेज था धरती पे क्या क्या किया .......कुछ कायदे का काम भी किया ? तो अपन बड़ी शान से , फक्र से . कालर ऊंचे कर के कहेंगे .....हाँ किया ना .........शास्त्रीय संगीत सुना ...........
                                       आज इतने साल बाद एक महफ़िल याद आती है .......जो मैं आपको सुना रहा हूँ रवि शंकर जी को एक श्रद्धांजलि के रूप में .............. 20 -22 साल पुरानी बात है ........उन दिनों दिल्ली में रहता था ......... शादी हुई थी या नहीं , ये याद नहीं .  मेरे दोस्त देवेन कालरा भी उन दिनों दिल्ली में ही हुआ करते थे  .........उन्ही के साथ concerts में जाते थे .........दिल्ली में mehfil कल्चर कुछ ख़ास था नहीं . सरकारी किस्म के कंसर्ट्स होते थे , auditoriums में . और उनमे ज्यादातर  वो लोग आते थे जिन्हें संगीत से कुछ लेना देना होता नहीं था . उन्हें बस pass मिल जाया करते थे और वो  celebrities को देखने सुनने autograp लेने भर आते थे . कुछ हमारे जैसे कीड़े होते थे जो वहीं गेट के पास मंडराते रहते और मौका देख के घुस जाते थे . और ऐसे concerts की खबर लगती थी अखबारों से . सो एक दिन पता लगा कि  रवि शंकर और उनकी बेटी अनुष्का आज बजा रहे हैं , खेल गाँव में . पहुँच गए हम दोनों पापी ......मैं और देवेन कालरा . वहाँ पता लगा कि  ये प्रोग्राम राजीव गाँधी फाउंडेशन करवा रहा है . और सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी भी तशरीफ़ लाई हुई हैं . सो उस दिन दिल्ली के सारे चाटुकार चमचे जुटे हुए थे . हॉल पैक .....house full ........ बहुत देर तक हम मंडराते रहे पर कोई जुगाड़ नहीं बना . पर थे हम दोनों भी सच्चे मुसलमान . सो हॉल के पिछवाड़े चले गए .वहाँ उस गेट से घुसे जिस से कलाकार लोग घुसते हैं और सीधे ग्रीन रूम में ........ वहाँ से चोरों की तरह स्टेज के गेट पे तक रहे थे . रवि शंकर जी का पूरा अमला सक्रिय था . आयोजकों की भीड़ भाड़  थी ............... खैर रवि शंकर जी और अनुष्का और उनकी पूरी टीम मंचासीन हुई .................साज मिलाये जाने लगे ............introduction वगैरा हुआ और रवि शंकर जी ने आलाप लेना शुरू किया .....उस दिन उन्होने बिहाग बजाय था ...........हॉल   में pin drop sielence ..........jam packed hall में सबकी निगाहें स्टेज पे ........ सबसे अगली सीट पे सोनिया और प्रियंका और दिल्ली की तमाम बड़ी हस्तियाँ ......... चप्पे चप्पे पे NSG ......... और तभी मैं और देवेन , हम दोनों धीरे से स्टेज पे चढ़ के वहीं रवि शंकर जी से कुछ फीट दूर ज़मीन पे ही बैठ गए .......... और बस यहीं पे गड़बड़ हो गयी ......साले हमारे जैसे और भी बहुत से कीड़े मकोड़े थे ......... वो भी सब , धीरे धीरे वहीं स्टेज पे ही आ के जम गए ...........कुल 20-25 हो गए ......हलचल देख के रवि शंकर जी का ध्यान उचटा ........ उन्होंने हमारी तरफ देखा पर बजाना जारी रखा .......... फिर एक आयोजक धीरे से स्टेज पे आया और हम लोगों को उठाने लगा ........और सारे पुराने पापी कुसमुसाने लगे .........कोई नहीं हिला , तो थोड देर में 2-3 गार्ड आ गए और उठाने  लगे ............. और रवि शंकर जी ने बजाना बंद कर दिया ........ और बोले ........हे ......रहने दो इन्हें .....बैठने दो .....सुनने दो .........यही तो मेरे असली चाहने वाले हैं .........और हॉल तालियों से बज उठा .........
                                          ता उम्र संगीत सुना ........हज़ारों बार सुना होगा .....राग बिहाग ........पर वो राग बिहाग याद रहेगा सारी  जिंदगी .......उस दिन रवि शंकर जी के साथ .....स्टेज पे
                                            आज नाम आँखों से रवि शंकर जो को श्रद्धांजलि ...................