Thursday, May 12, 2011

soya milk ...2 रु लीटर .....एक वरदान...... भारत जिस से अभी तक अछूता है ......

दोस्तों पिछले 15 दिन से पतंजलि योग पीठ हरिद्वार में हूँ .जैसा की सभी लोग जानते ही हैं .......बाबा रामदेव जी आज कल पूरे देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ जन जागरण कर रहे हैं । 4 जून से दिल्ली में आमरण अनशन पर बैठने जा रहे हैं .....इसकी तैयारियां यहाँ मुख्यालय पर भी जोर शोर से चल रही हैं .इसके अतिरिक्त यहाँ और भी कई प्रकल्पों पर कार्य चल रहा है .....भारत स्वाभिमान है ......एक अन्य योजना ग्रामोत्थान है जिसके अंतर्गत प्रथम चरण में भारत के प्रत्येक प्रान्त से एक गाँव को आदर्श गाँव के रूप में विकसित किया जायेगा .....पूर्ण स्वावलंबी ...नशा मुक्त ......रोग मुक्त .......ग्रामोद्योग..... ऐसे बहुत से बिंदु हैं जिन पर कार्य चल रहा है .अभी प्रथम चरण में गाँव का चयन हो रहा है ........इस में एक बहुत अच्छी योजना soya milk के बारे में है ......सोया मिल्क यानि सोंया बीन से बना दूध ......आप सभी जानते हैं कि soya bean प्रोटीन का भण्डार होते हैं ...इसमें सभी खाद्य पदार्थों से ज्यादा ...44% प्रोटीन पाया जाता है ......वो भी cholestrol free ....इसका दूध बड़ी आसानी से घर पे बनाया जा सकता है .......
1) रात में एक कटोरी लगभग 100 ग्राम सोया बीन पानी में भिगो दें । (soya बीन की दाल लें ....soya बीन nutri nuggets ......बड़ियाँ.... नहीं )
2) सुबह उसे साफ़ करके किसी खुले बर्तन में, खुले पानी में 12 मिनट तक उबालें ।
3) 12 मिनट तक उबालने के बाद वो गरम पानी फेंक दें और सोया बीन को खुले पानी में 3-4 बार अच्छी तरह धो लें
4) अब इसे mixer grinder में पीस कर पतला पेस्ट बना लें .......पीसते समय ज़रुरत के अनुसार इसमें थोडा थोडा पानी डालते जाये।
5) अब इसमें डेढ़ लीटर पानी डाल कर पतला करें और मोटी छलनी से छान लें (आवश्यकतानुसार )
लीजिये आपका अत्यंत स्वादिस्ट और पौष्टिक सोया मिल्क तैयार है ......इसे आप कई तरह से पी सकते हैं ......जैसे
1) चीनी मिला के मीठा soy milk
2) नींबू नमक और पिसा हुआ भुना जीरा मिला के लस्सी flavour .....
3) सौंफ ,छोटी इलायची, कलि मिर्च इत्यादि साथ में पीस कर ठंडई flavour
4) चीनी और रूह अफज़ा ,ब्राह्मी इत्यादि मिला कर .....शरबत बना लें।
5) इसके साथ केले ,आम , चीकू ,आडू , आलू बुखारा इत्यादि फल मिला कर अलग अलग fruit shakes बना सकते हैं
सबसे मज़े दार बात यह है कि इस अत्यंत पौष्टिक और स्वादिष्ट दूध की कीमत घर में बनाने पर सिर्फ 2 या 4 रु लीटर पड़ती है ........हमारे देश में सोयाबीन प्रचुर मात्र में उगाया जाता है पर दुर्भाग्य से ये सारा सोयाबीन तेल निकालने में या पशु आहार के रूप में प्रयोग होता है .......अनाज मंडियों में ये 20 रु किलो बिकता है और फुटकर दुकानों में 25 से ले कर 40 रु तक .....
भारत जैसे देश में जहाँ आज भी बच्चे भुखमरी और कुपोषण के शिकार हैं , जहाँ आज भी आधी से ज्यादा आबादी को एक बूँद भी दूध नसीब नहीं होता ,सोया बीन के दूध को पूरे देश में प्रचारित करने की ज़रुरत है । गरीब से गरीब माँ भी अपनी झोपडी में ......2 रु खर्च कर ,सिल बट्टे पर पीस कर अपने बच्चों को पेट भर ये पौष्टिक दूध पिला सकती है .......ज़रुरत है सबको इसके बारे में बताने की .......सारे भारत मे इसे लोकप्रिय करने की ........मैं इस क्षेत्र में पिछले 4-5 साल से कार्य कर रहा हूँ ....अब पतंजलि योग पीठ ने इसे पूरे देश में घर घर तक पहुचाने का संकल्प लिया है ......आप सब से अनुरोध है की इसे एक बार अपने घर में try करें ....और लोगों को बना कर पिलायें ....... इसे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं ......इस में नए नए प्रयोग करें ......इसकी और अच्छी अच्छी recipe बनायें और अन्य लोगों के साथ share करें ........कोई ngo या समाज सेवी संस्था बना कर इसे झुग्गी झोपड़ियों ,गाँव के गरीब बच्चों को पिलायें। आज इसे एक जन आन्दोलन बना कर हर घर तक पहुंचाने की ज़रुरत है ......याद रखिये कुपोषण की समस्या सिर्फ गरीब लोगों में ही नहीं बल्कि गरीब, अमीर ,माध्यम वर्ग सबमे है .......
आप सबसे अनुरोध है की इस लेख को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुचायें ......
सोयाबीन से पनीर औए दही भी बनाई जाती है .......इसकी चर्चा अगले लेख में करूँगा ........तब तक soy milk को enjoy करें ।

Thursday, April 28, 2011

ssssssssshhhhhhhhh............कोई जाग रहा है

अप्रैल का महीना UP में बीता ....अन्ना हजारे के समर्थन में 5 दिन अनशन किया .....गाजीपुर में हम लोग रेलवे स्टेशन के सामने एक पीपल के पेड़ के नीचे धरना दे के बैठे थे ......हमारे साथ भाई ब्रिज भूषण दुबे जी और उनकी पूरी टीम भी थी .....ब्रिज भूषण जी पिछले 15 -20 साल से गाजीपुर में भ्रष्टाचार की लड़ाई लड़ रहे हैं ...इस दौरान वो लगभग 20 -25 भ्रष्ट लोगों को जेल भेज चुके हैं . उस 5 दिन के अनशन में वो अपने अनुभव बताते रहे .......कैसे उन्होंने भ्रष्ट अधिकारियों को रंगे हाथों रिश्वत लेते पकड़वाया ......क्या क्या दिक्कतें आती हैं .....उन अनुभवों को सुन कर मुझे लगा की क्यों जन लोकपाल बिल लागू करना ज़रूरी है ......कुछ अनुभव आपके साथ साझा कर रहा हूँ ....
1) तहसील का एक कानूनगो बहुत घूसखोर था ..सब किसान उस से त्रस्त थे .उसे रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़वाने के लिए ये लोग vigilance विभाग के DSP के पास गए.....DSP साहब बोले sorry , हम तभी trap कर सकते हैं जब collector साहब दो सरकारी कर्मचारी गवाह देंगे .......खैर साहब दो गवाक मुक़र्रर हुए ...पर trap से ऐन पहले उन्होंने खुद उस कानूनगो को आगाह कर दिया और trap फेल हो गया .एक अन्य केस में ये दोनों सरकारी गवाह मुक़दमे के दौरान अपने बयान से मुकर गए .......एक नायब तहसीलदार के खिलाफ मुकदमा 15 साल से चल रहा है ........
2 ) एक भ्रष्ट मुंसिफ जज के खिलाफ बहुत शिकायत थी .......ये लोग vigilance से मिले ......अब जज के खिलाफ trap तभी लग सकता है जब हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की अनुमति मिलेगी . ये लोग हाई कोर्ट पहुंचे ......चीफ जस्टिस का PA कहता है छोडिये ....हम फ़ोन कर देते हैं आपका काम हो जायेगा .....इन लोगों ने कहा की हमारा कोई काम नहीं है ...बस उस घूसखोर को पकडवाना है ....अब PA साहब बोले ,चलो फोन कर देते हैं ...घूस लेना बंद कर देगा ........जब ये लोग अड़ गए तो उसका वहां से ट्रान्सफर कर दिया गया पर trap के लिए अनुमति नहीं मिली......एक SDM की शिकायत थी .....अब SDM ठहरा gazetted officer , उसे ट्राप करने के लिए chief secretary की अनुमति चाहिए ........वो अनुमति पिछले 4 साल से लटकी हुई है .......इस बीच वो sdm साहब सुना है deputy collector हो गए हैं.......
3 ) दुबे जी द्वारा पकड्वाए हुए 20 -25 लोगों के खिलाफ मुक़दमे 15 -20 सालों से चल रहे हैं ...अब तक किसी केस में सज़ा नहीं हुई है ......कुछ लोग बा इज्ज़त बरी हो गए हैं ......अब कहने को तो सरकार चाहती है भ्रष्टाचार को खत्म करना ...पर पिछले 42 साल से सिर्फ चाहती है .....अब अन्ना हजारे अगर आमरण अनशन पर बैठ गए तो तो भाई लोगों को blackmailing लगती है
UP की सरकार students को scholarship देती है. 5th तक 320 रु , 8th तक 450 रु और 9 -10 को 720 रु . पिछले साल लगभग 1400 करोड़ रु बांटे गए .पिछले 5 सालों में 7000 करोड़ रु की scholarship दी गयी है ........
इसमें 80 % रकम का घोटाला है ......लोगों ने education deptt और समाज कल्याण विभाग से मिली भगत कर के सारा पैसा खा लिया है .......एक एक ग्राम सभा में 35 -35 स्कूल खुले हुए हैं ......एक एक स्कूल में 9th -१०थ क्लास में 1000 या 1500 तक students दिखाए गए हैं .......एक बानगी देखिये ........
गाजीपुर जिले की जखिनिया ब्लाक के बिराहीपुर ग्राम सभा में 35 स्कूल हैं .........गौतम बुद्ध उच्तर माध्यमिक विद्यालय में 9 th और 10 th क्लास में 1656 students हैं ........उनको 11,65,200 की scholarship सरकार ने दी है ......अब कम से कम 10 ऐसे departments है जो इस बात को verify करते हैं कि हाँ ये स्कूल है , इसे बाकायदा मान्यता ( affiliation ) मिली है इसका एक बहुत लम्बा चौड़ा process होता है .......फिर इन सारे students का admission ,उसका verification ,फिर इन सबका एक बैंक में अकाउंट खुलता है ......अब मुझे या आपको बैंक में अकाउंट खुलवाना हो तो चप्पल घिस जाती है .....पर वही बैंक अपने यहाँ 25000 से ज्यादा फर्जी अकाउंट एक मिनट में खोल देता है .......फर्जी नाम ,फर्जी बाप का नाम ,फर्जी एड्रेस ,फर्जी फोटो ,फर्जी signatures ..............,इसके बाद UP गवर्नमेंट का समाज कल्याण विभाग दलितों ,पिछड़ों और अल्प संख्यकों के लिए हर साल 1400 करोड़ रु देता है .............कम से कम 10 डिपार्टमेंट निगरानी करते हैं .......फिर भी सारा पैसा खा लिया जाता है ...........और ये सारा घोटाला 5 --7 साल से चल रहा है ......मुलायम सिंह और मायावती के राज में जो अपने आपको इन दलितों और अल्पसंख्यकों और पिछड़ों का मसीहा बताते हैं ........
सबसे निराशा जनक बात ये है की गाँव के बच्चे बच्चे को ये बात मालूम है की ऐसा घोटाला हो रहा है ..........फिर भी सब चुप चाप सह रहे हैं .........भेड़ बकरियों की तरह .......तो साहब हमें जब ये बात मालूम हुई तो हमने तुरंत एक RTI डाल दी ......और इलाके में कुछ दीवारों पर नारे लिख दिए ......scholarship की लूट बंद करो ......इस से समाज में एक message तो चला ही गया कि ......कुछ लोग देख रहे हैं ......और इसका असर देखिये कि बेचू यादव उच्तर माध्यमिक विद्यालय मंझनपुर ने 2008 -9 में 1437 स्टुडेंट्स के 10,34,640 रु लिए थे इस साल सिर्फ 20 students के 14400 रु लिए हैं ...............अब हमने इस पूरे मामले कि पूरी जानकारी इन्टरनेट से इकट्ठी कर के ऊपर तक complaint डाल दी है .......जी हाँ ...president .....PM ...CM ......vigilance ....lokayukta .....और media ....सबको .....कुछ लोगों को लग सकता है कि कुछ नहीं होगा ....नहीं मेरे भाई होगा ..ज़रूर होगा .......अरे कम से कम इतना तो होगा ही न ......कि चोर को पता लगेगा कि कोई जाग रहा है .......और अगर सरकार कुछ नहीं करेगी तो ??????????????.............. सत्याग्रह का रास्ता तो खुला ही है .........अन्ना हजारे की तरह फिर आमरण अनशन पर बैठ जायेंगे ........... हाई कोर्ट में PIL डाल देंगे .......पर मेरे प्यारे दोस्तों ...इस लड़ाई में आप सबका साथ चाहिए .............सिर्फ moral support .....मुझे मालूम है चना अकेला नहीं है ........
और अगर आपके इर्द गिर्द भी अगर कोई भ्रष्टाचार हो रहा है तो .........जागते रहिये ..........और आवाज़ उठाइए ........










Sunday, April 24, 2011

वो लड़की ......जिसे उसके बाप और भाइयों ने मारा

कई साल हो गए मरे उसे . दिन रात चहकती फिरती थी घर आँगन में . कभी हंसाती थी ...और कभी रुला देती थी ...कभी गंभीर हो जाती तो कभी एकदम शोख ...चंचल . किस दिन मरी ठीक ठाक ये तो याद नहीं ......पर 5 ...7 साल हो गए शायद . सुनते हैं की बाप और भाइयों ने ही मारा...... माँ की भी मिली भगत थी बताते हैं .......क्यों मारा होगा ?कोई पैसे वैसे का चाक्कर था शायद .......पर पैसों के लिए कोई बहन बेटियों को थोड़े ही मारता है .....फिर ऐसी भी क्या आन पड़ी थी ? अच्छे खाते पीते लोग थे उसके बाप और भाई . बहुत पहले जब ये लोग बहुत गरीब थे .....जब दो कौर खाने को भी नहीं होता था ...सुना है तब उसे बहुत प्यार करते थे .....जान छिड़कते थे .....पाल पोस कर बड़ा किया .सालों उसे बड़े जतन से सहेजा ......क्या मजाल की कोई आँख उठा कर देख ले ....आँखे निकाल लेते थे .....सामने चाहे कोई भी हो ...बड़े से बड़ा कोई गुंडा बदमाश हो ,उद्योगपति हो या फिर नेता या तानाशाह ..... चाहे जो हो किसी से नहीं डरते थे . फिर अब ऐसा क्या हुआ की उसी बेटी को मार डाला .
चर्चा है की पैसों की खातिर मारा . और वो भी एक झटके में नहीं मारा ....धीरे धीरे मारा .....तिल तिल कर के मरी .और मारा भी सरे आम ........सारा मोहल्ला देख रहा था ......पर बेबस थे हम लोग ....लाचार.....कुछ नहीं कर सके ......कर भी क्या सकते थे ....सिवाय रोने के .
अरे आप भी तो जानते होंगे ....बड़ा प्यारा सा नाम था .....न्यूज़ .....प्यार से ख़बरें और समाचार भी बुलाते थे सब लोग ........मर गयी बेचारी . याद है पहली बार जब देखा उसे ........नहीं तब दिखती नहीं थी ...सिर्फ सुनते थे उसे .....मुझे याद है ,मैं तब दस एक साल का था ......1975 की बात है .इंदिरा गाँधी ने इमरजेंसी लगा दी थी देश में ....उन दिनों चंडीगढ़ की एक फौजी कालोनी में रहते थे हम लोग ......रात पौने नौ बजे ...सन्नाटा छ जाता था पूरी कालोनी में ...फिर 4 -5 बार बीप की आवाज़ आती ...और फिर वो धीर गंभीर आवाज़ ......ये आकाशवाणी है ......अब आप देवकी नंदन पाण्डे से समाचार सुनिए ........उन दिनों यूँ लगता जैसे पूरी कायनात सुन रही हो उसे ......बताते हैं की इमरजेंसी में उठा के बंद कर दिया था उसे
पूरे परिवार के साथ ...फिर भी इन लोगों ने हार नहीं मानी .......चुप नहीं बैठे ......और दो साल में ही औकात बता दी थी सबको ......फिर टीवी आया .....दिखने लगी सुबह शाम ......कुछ दिन तो सब ठीक ठाक चला .......फिर बताते हैं की इसके भाइयों की नीयत खराब हो गयी......एक भाई था उसका
रजत शर्मा नाम था.कहता था की करोड़ पति बनूँगा . उसी ने सबसे पहले उसे घर से बहार निकाला..... और थोड़े ही दिनों में बहुत अमीर हो गया ....फिर इसके बाद तो सबकी नीयत खराब हो गयी .....सभी उसे बेचने लगे ...चन्द रुपयों की खातिर .......आखिर कब तक बर्दाश्त करती ...मर गयी धीरे धीरे .....उसका एक भाई होता था ....S P SINGH नाम था उसका ....बहुत प्यार करता था उसे .....जान छिड़कता था .......बड़ी सेवा की थी उसने न्यूज़ की .....जब दिल्ली में उपहार सिनेमा का अग्नि कांड हुआ तो उसने सारी न्यूज़ कवर की थी .....शाम को समाचार पढ़ के जो घर लौटा तो उस हादसे के सदमे से मर गया ......हार्ट अटैक हो गया .कई बार मैं सोचता हूँ की बड़ा अच्छा हुआ जो S P SINGH तभी मर गया ...आज अगर आज तक की हालत देखता तो जीते जी मर जाता ( प्रख्यात पत्रकार स्वर्गीय श्री sp singh वर्तमान टीवी पत्रकारिता के जन्म दाता थे और आज तक चैनल की शुरुआत उन्होंने ही की थी ) अब उसकी जगह एक नई लड़की ले आये हैं ये लोग पता नहीं कहाँ से .....कोठे पर बैठा दिया है उसे ......दिन रात नचाते हैं उसे .....बेशर्मी से हंसती है .....आवारा लड़कों के साथ घूमती है सार सारा दिन .......कभी बिग बॉस के घर तो कभी सड़कों पर .......बिना ड्राईवर की गाडी में .....कभी भूत भूत चिल्लाती है तो कभी कहती है ....भागो ...प्रलय आ गयी......दिन रात गली में लौंडों के साथ किरकेट खेलती है ....
एक और भाई था उसका ...कहता था ..जैसी भी है ......है तो मेरी बहन ही ......पागल हो गया था ...दिन रात लड़ता था अपने बाप से ........गरियाता था अपने भाइयों को ......एक चुनरी ले कर घूमता था ....कहता था पहनाऊंगा उसे ......हमारे घर की इज्ज़त है ....बेटी है मेरी .....मर गया पिछले दिनों .......वही चुनरी हाथ में लिए ......आलोक तोमर नाम था उसका .......






Thursday, March 24, 2011

दो पत्र ....एक शहीद ने लिखा ...दूसरा chief of army staff ने


दोस्तों...... पिछला ब्लॉग लिखने के लिए जब मै सामग्री जुटा रहा था शहीद capt विजयंत थापर की ये चिट्ठी नेट पर मिल गयी.......ये चिट्ठी उन्होंने अपनी शहादत से एक दिन पहले अपने परिवार को लिखी ....आप भी पढ़ लीजिये




dearest papa ,mama,birdie and granny

1)by the time you get this letter ,i will be observing you all from the sky enjoying the hospitality of apsaras.

2) I have no regrets ,in fact even if i become a human again i'll join the army and fight for my nation

3) If you can come , please come and see where the indian army fought for your tomorrow.

4) As far as the unit is concerned ,the new chaps should be told about this sacrifice . I hope my photo will be kept in the 'A' coy mandir with Karni mata.

5) what ever organ can be taken should be done.

6) Contribute some money to the orphanage and keep on giving 50/-rs to Rukhsana per month and meet yogi baba.

7) Best of luck to birdie ,never forget this sacrifice of these men .Papa you should feel proud.Mama so should you .Meet .............(i loved her ). Mama ji forgive me for everything wrong i did .

OK then.its time for me to join my clan of the dirty dozen.my alpha party has 12 chaps .best of luck to you all.

live life king size

yours Robin.

एक पत्र लिखा था हमारे चीफ ऑफ़ आर्मी स्टाफ दीपक कपूर ने .........महाराष्ट्र के मुख्या मंत्री को ........आदर्श हाऊसिंग सोसाईटी में एक फ्लैट पाने के लिए .........दरअसल वहां उसी व्यक्ति को फ्लैट मिल सकता था जो ......1) महाराष्ट्र का स्थाई निवासी हो 2) जिसकी आमदनी 15000 से 30000 के बीच हो ......तो अपने दीपक कपूर जी दोनों शर्तें ही पूरी नहीं करते थे .......क्योंकि महाराष्ट्र के वो हैं नहीं और उनकी तनख्वाह उन दिनों 90000 रु थी .......सो उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्य मंत्री विलास राव देशमुख को पत्र लिख कर निवेदन किया की कृपया मेरे केस में ये स्थाई निवासी वाली शर्त हटा ली जाये ......और जब आमदनी की बात आई तो उन्होंने एक फर्जी सेलरी स्लिप लगा कर अपनी तनख्वाह 23000 रु दिखा दी और आदर्श में एक फ्लैट अपने नाम आवंटित करा लिया .......वैसे जब वो ये सारी तिकड़म लड़ा रहे थे तो बताते हैं कि उनके पास पहले से 8 फ्लैट और प्लाट गुडगाँव .मुंबई और पंचकुला जैसे शहरों में थे .......पंचकुला में उन्होंने अपने स्कूल मेट मुख्य मंत्री हुडा साहब से जुगाड़ भिड़ा के एक प्लाट ले लिया था ...कौड़ियों के दाम .....पर वहां एक नियम है कि आप ऐसे प्लाट को 5 साल बेच नहीं सकते .......सो बेचारे गरीब आदमी ने एक और चिट्ठी लिखी मुख्य मंत्री हुडा को ....कि मेरी कुछ पारिवारिक मजबूरियां हैं ......इस लिए मेरे केस में कृपया ये 5 साल वाली शर्त हटा ली जाये .......पिछले दिनों ये चिट्ठी देश के सारे अख़बारों में छपी थी ......अब दीपक कपूर जी सफाई देते घूम रहे हैं रक्षा मंत्री को ........
कई बार मैं सोचता हूँ कैसे कैसे लोग भरे पड़े हैं दुनिया में ........एक है कि 22 साल की उम्र में जान दे दी ....और मरते मरते भी कह गया ...अगर फिर दुबारा जनम मिला तो फिर भर्ती हूँगा फ़ौज में ...अपने देश के लिए लड़ने के लिए .........अगर कोई अंग बचा हो मेरे शरीर में..... तो निकाल लेना .....फूंकने से पहले ......ताकि काम आ सके किसी के .........दे देना, कुछ पैसे उस अनाथ आश्रम के लिए, जिस से कि जी सकें वो बच्चे इज्ज़त से.... जिनका कोई नहीं है इस दुनिया में ........ चिंता थी उसे रुख़साना की ......वो 6 साल की बच्ची ,कश्मीर की ,जिसे दिया करता था वो 50 रूपये हर महीने ,ताकि वो पढ़ सके ........मरते हुए भी उसे चिंता थी उस लड़की की ......जिसे प्यार करता था वो .......पर अपने देश से ज्यादा नहीं ..........अपने भाई को हिदायत दे के मरा ...की भूलना मत उन लोगों की शहादत को .......जो तुम्हारे भविष्य के लिए मरे .....
और एक है .......उसी लड़के का बॉस .......जान दे रहा .......मरा जा रहा है बेचारा ...........एक और फ्लैट के लिए .........एक और प्लाट मिल जाये किसी तरह से ......पारिवारिक मजबूरियां हैं बेचारे की .......
वो चिट्ठी , जो मरते मरते विजयंत थापर ने अपने मां बाप को लिखी थी ....दीपक कपूर के लिए लिखनी चाहिए थी ..........

Sunday, March 20, 2011

सज़ा तो बच्चों को मिली .......

अमृतसर का एक बहुचर्चित केस है ....एक नर्स ने अपने अस्पताल से मंजू नामक महिला का एक नवजात बच्चा एक औरत रंजीत कौर को चार लाख में बेच दिया और उसकी जगह कहीं से ला कर एक लड़की रख दी ।लड़का अपने नए घर में अमर प्रताप के नाम से सिख रीति रिवाज़ से पलने लगा और लड़की मुस्कान के नाम से ....... 5 साल बाद वो नर्स ऐसे ही एक अन्य केस में पकड़ी गयी तो ये केस भी खुल गया । अब मंजू एवं उनके पति हरीश ने अपना लड़का वापस लेने के लिए केस कर दिया ......तीन साल की लम्बी कानूनी लड़ाई के बाद विद्वान् जज ने मंजू एवं हरीश के पक्ष में फैसला देते हुए अमर प्रताप को उनको सौंप दिया और नर्स रमेश रानी , रंजीत कौर और उसके पति सुखविंदर सिंह को 7 साल की सज़ा सुना दी । साथ ही पुलिस को यह आदेश भी दिया की मुस्कान के असली मां बाप का भी पता लगाया जाये ..... ऊपरी तौर पर देखा जाये और कानून की दृष्टि से देखा जाये तो यह एक सीधा सादा केस है जिसमे न्याय हुआ है ....दोषियों को सज़ा मिली है .....मिलनी भी चाहिए ।
परन्तु इस केस में दो निर्दोष बच्चे मारे गए है .....सबसे बड़ी सज़ा उन्ही दोनों को मिली है । मानवीय दृष्टिकोण से उनके साथ बहुत बड़ा अन्याय हुआ है .कृपया इन तथ्यों पर गौर करें ....

1) अमर प्रताप ने अपना सारा जीवन रंजीत कौर की गोद में बिताया ....उसने उसे बहुत प्यार से पाला .....कोर्ट केस के दौरान वो जब भी कोर्ट में आता था तो अपनी मां (रंजीत कौर ) से चिपका रहता था। यदि उसे उस से दूर करने की कोशिश की जाती थी तो जोर जोर से रोता था । अब उसे एक विद्वान जज के आदेश पर हमेशा के लिए अपनी मां से दूर कर दिया गया है ....

२) मुस्कान सांवले या यूँ कहें की काले रंग की एक बच्ची थी जिसे नर्स किसी झोपड़ पट्टी से खरीद लाई थी । हरीश और मंजू को पहले ही दिन से शंका रहती थी की कुछ गड़बड़ हुई है । क्योंकि उसकी शक्ल सूरत उनके परिवार में किसी से भी नहीं मिलती थी , फिर भी उन्होंने मुस्कान को लाड़ प्यार से पाला । आज मुस्कान 11 साल की है और ये जानती है की मंजू एवं हरीश उसके असली मां बाप नहीं हैं ...वो किसी झोपड़ी में पैदा हुई थी ।

3) अमर प्रताप का नाम अब बदल गया है....शुरुआत उसने एक सिख बच्चे के रूप में की थी पर अब उसके केश काट दिए गए हैं और उसे हिन्दू रीति रिवाज़ से पाला जा रहा है .....

4) अमर प्रताप ये जानता है की उसके असली मां बाप जेल में हैं ...और ये लोग ....हांलाकि अच्छे लोग हैं ........प्यार भी करते हैं .......फिर भी ......

बच्चा कानून नहीं जानता ........उसे कानून से कोई मतलब नहीं ...कानून गया भाड़ में .......वह तो सिर्फ इतना जानता है की उसकी माँ ....जो उसे दिलो जान से प्यार करती थी .......उस पे जान छिड़कती थी...... उस से छीन ली गयी है । आज जेल में है ......मुस्कान ये जानती है की ये मेरे असली मां बाप नहीं ....मैं तो किसी झोपड़ पट्टी में पैदा हुई थी .......भाग्य ने यहाँ पंहुचा दिया ......पर अब चूँकि घर का असली वारिस मिल गया है ......तो ......
आज तो दोनों बच्चे छोटे हैं ....पर बहुत जल्दी बड़े हो जायेंगे ......आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में जब डाक्टर अंग प्रत्यारोपण करते हैं तो उन्हें एक ही चिंता रहती है ......कि शरीर कहीं नए अंग को reject न कर दे । क्या guarantee है कि कुछ साल बाद जब अमर प्रताप 18 साल का हो जायेगा , तो अपनी असली मां को नहीं ढूंढेगा ......अक्सर हम लोग अखबारों में पढ़ते हैं कि फिजी, सूरीनाम , और मारीशस जैसे देशों से लोग अपने पुरखों का गाँव घर खोजते हुए आते हैं .......अनाथालयों से गोद लिए गए बच्चे अपने असली मां बाप को ढूँढने की कोशिश करते हैं .....यहाँ तो एक सयाने बच्चे को उसकी मां से ज़बरदस्ती ले लिया गया है .......बताया जाता है कि जब अमर प्रताप को अंतिम बार उसकी मां से अलग किया गया तो वहां एक ह्रदय विदारक दृश्य उत्पन्न हो गया था ......
कहा जाता है कि कानून अँधा होता है, संवेदनाओं और भावनाओं की भाषा नहीं समझता । पर क़ानून की एक भावना यह भी है की चाहे 100 मुलजिम छूट जाएँ पर एक बेक़सूर को सज़ा नहीं मिलनी चाहिए .....पर इस केस में सबसे बड़ी सज़ा तो बेक़सूर बच्चों को ही मिली है .......और एक बात और है ....अगर मुस्कान के गरीब मां बाप ने भी अपनी लड़की वापस लेने के लिए केस कर दिया तो.......... ?????????? क्या जज साहब मुस्कान को उस झोपड़ पट्टी में वापस भेज देंगे .....या अपने स्व विवेक का प्रयोग करेंगे .......और हरीश और मंजू .....क्या मुस्कान को उसके असली मां बाप को सौंप देंगे ...... ??????????? कानूनी तौर पर दोनों बच्चों को लगातार मनो चिकित्सक की counselling दी जा रही है .......ऐसा आदेश दे कर जज साहब ने अपने कर्तव्य की इति श्री कर ली है ...कानून का पेट तो भर दिया है .....पर जैसे कानून संवेदना और भावना की भाषा नहीं समझता वैसे ही संवेदनाएं और भावनाएं भी कानून की भाषा नहीं समझती ......दुनिया का कोई मनोचिकित्सक अमर प्रताप को ये नहीं समझा सकता कि मां और biological mother में क्या अंतर होता है .....क्यों कि मां तो मां होती है .........उसमें कोई किन्तु परन्तु नहीं चलता ......
मुझे ऐसा लगता है कि अगर ये मामला किसी गाँव की पंचायत में आया होता तो वो इससे ज्यादा तर्कसंगत और मानवीय फैसले पर पहुँच सकते थे .......क्यों ??????? आप होते तो क्या फैसला करते ?

१) अगर मुस्कान के मां बाप भी मुकदमा कर दें तो क्या उन्हें उनकी लड़की दे दी जानी चाहिए ?
२) जज साहब फैसला दे भी दें और अगर मुस्कान उस झोपड़ पट्टी में जाने से मना कर दे तो ........?
३) १८ साल का.... यानि बालिग़ होने के बाद अगर अमर प्रताप अपनी असली मां रंजीत कौर के पास वापस जाने का फैसला कर ले तो ???????
४) अब जब की उन्हें अपना बेटा वापस मिल गया है ,अगर हरीश और मंजू का व्यवहार मुस्कान के प्रति बदल
जाये तो ?????????
५) अपने नए भाई ....जिसके आने की वजह से मुस्कान की position वो नहीं रही जो पहले हुआ करती थी ....उसके प्रति इर्ष्य और द्वेष की भावना रखने लगे तो ?????????

कृपया अपनी राय comments में व्यक्त करें ..........और बहस कों आगे बढायें ।

Saturday, March 12, 2011

बेटा ...माँ तो यहीं रहेगी ....इसी पुराने घर में .....

पंजाब के एक शहर में एक डॉक्टर साहब हैं ....शहर के जाने माने सर्जन हैं ....अपना खुद का अस्पताल चलाते हैं .....काफी सफल अस्पताल है .....पत्नी भी डॉक्टर है ......भरा पूरा परिवार है ......सुख शांति है ......पिता जी बचपन में ही गुजर गए थे ....तब जब वो बमुश्किल एक या दो साल के थे ......उनकी मां भरी जवानी में विधवा हो गयीं ......पर उन्होंने पुनर्विवाह करने से मना कर दिया ....एक ही बेटा था उसे पढ़ाया लिखाया ....डॉक्टर बनाया ...आज बेटा एक सफल डाक्टर है ...खूब पैसा कमाता है .......परिवार पहले पुराने शहर में पुश्तैनी मकान में रहता था ....तंग गलियों में पुराना सा मकान था ....डाक्टर साहब जब भी उस घर को ठीक ठाक कराने की बात करते तो माँ कहती ...इसको क्या ठीक कराना ...नया मकान बनायेंगे ......स्वाभाविक सी बात है .....डॉक्टर साहब को नया मकान तो बनाना ही था .....सो उन्होंने बनाया ......पुराने शहर से बाहर एक नयी कालोनी में उन्होंने महल जैसा घर बनाया .......गृह प्रवेश हुआ ...डाक्टर साहब ने शानदार पार्टी दी .सब लोग शामिल हुए .....सब कुछ ठीक ठाक था ...पर अगले दिन जब नए घर में शिफ्ट होने की बात आई तो मां ने बहू और बेटे से कहा ....बेटा तुम लोग जाओ ,मैं तो यहीं रहूंगी .....डाक्टर साहब भौचक्क.....अरे ये क्या हुआ ....मां क्यों नाराज़ हो गयी .....परेशान हो गए...पत्नी से पूछा कोई बात हुई है क्या .....पत्नी ने कहा नहीं कोई बात नहीं हुई ......डाक्टर साहब की पत्नी को मैं स्वयं जानता हूँ ...बहुत ही अच्छी ,सभ्य सुसंस्कृत महिला हैं .....एक आदर्श बहू....माँ का सचमुच बहुत ध्यान रखती हैं और उनसे अपनी माँ की तरह ही प्यार भी करती है .....अब दोनों पति पत्नी परेशान ....डरते डरते माँ से पूछा ....क्या बात हो गयी ....माँ बोली की बेटा कोई बात नहीं हुई ...कोई नाराजगी नहीं है ......कोई परेशानी भी नहीं है , पर मैं नए घर में नहीं जाउंगी .....तुम लोग आराम से वहां रहो ... मैं यही रहूंगी .....
बहू और बेटे ने बहुत मिन्नतें की ......हाथ पाँव जोड़े ....पर मां टस से मस नहीं हुई .जब बच्चों ने बहुत ज्यादा आग्रह किया .....कारण पूछा, तो बोली .......बेटा दो साल का था तू जब तेरे पिता जी मरे ....आज तीस साल हो गए उन्हें गए ....पर आज भी वो मुझे यहाँ दिखाई देते हैं .....मैं उन्हें यहाँ महसूस करती हूँ .....इस घर के एक एक कण में वो रचे बसे हुए हैं ......यहाँ मुझे लगता है कि मैं आज भी उनके साथ रहती हूँ ....तेरे उस नए घर में मुझे तेरा बाप नहीं दिखेगा बेटा ......इसलिए मुझे उन से अलग मत कर ...मुझे यहीं रहने दे .....बहू बेटा चुप हो गए ....उनके पास कहने के लिए कुछ नहीं था .....कोई तर्क नहीं था ....
ये बात कोई 15 साल पुरानी है .....डाक्टर साहब उस नए वाले घर में रहते हैं .....माँ अब भी उसी पुराने घर में रहती है ....वो घर आज भी वैसा ही है जैसा पहले था .....डाक्टर साहब के लाख आग्रह के बावजूद माँ ने उसे renovate नहीं करने दिया .....वो उसे उतना ही maintain करते हैं की उसका पुराना स्वरुप बरकरार रहे .... आज की नयी पीढ़ी के बच्चों को शायद ये बात समझ में नहीं आयेगी । उन्हें ये माँ की हठ धर्मिता , जिद या पागलपन लग सकता है ....आज के युग में ,जब पाश्चात्य सभ्यता ने प्रेम की परिभाषाएं बदल दी हैं ....जहाँ रिश्ते पल भर में टूट जाते हैं .....प्रेम का ये 50 साल पुराना मॉडल दकियानूसी ...outdated लगता है .....
मुझे ये किस्सा खुद डॉक्टर साहब की पत्नी ने सुनाया था......उत्सुकता वश मैं माँ से मिलने उस पुराने घर गया .....मुझे ये देख कर बहुत आश्चर्य हुआ कि वो बूढी महिला आज भी कितनी खुश है ....उतनी ही खुश जितनी आज की कोई नव विवाहिता अपने पति के साथ होगी .......

Saturday, March 5, 2011

कोई बात नहीं ....मैं इसे ठीक कर लूंगी ....positive attitude

बात लगभग 16 साल पुरानी है .तब मेरी बेटी डेढ़ या दो साल की रही होगी । हम दोनों कहीं जा रहे थे ट्रेन से । बनारस के रेलवे स्टेशन से हमें गाड़ी पकडनी थी । बनारस में स्टेशन पर लकड़ी के खिलोने बिकते हैं .....शायद शहर में ही कहीं बनते होंगे ......हाकर टोकरियों में रख कर बेचते हैं .....उसके हाथ में एक झुनझुना था .....एक लकड़ी के टुकड़े पर spring से दो छोटे छोटे लट्टू से fix थे ....हिलाने पर टिक टिक बजता था ..... उसे मालूम था माल कैसे बिकेगा ........वह मेरी बेटी के सामने उसे टिक टिक बजाने लगा .......मेरी बेटी ने तुरंत हाथ बढ़ा दिए । पापा.......दो रुपये की चीज़ थी ....मैंने ले दी ..........वो घटना आज भी मेरी आँखों के सामने घूम रही है ......खिलौना हाथ में आते ही .....मानो सारी दुनिया जीत ली हो ......सारी कायनात मुट्ठी में हो ....उसकी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं था .......पूरे जोश के साथ वह उसे जोर जोर से हिलाने लगी ....टिक टिक टिक टिक .......उसे खुश होते देख मुझे उससे भी ज्यादा ख़ुशी हो रही थी ........हम दोनों के सुख का कोई थाह नहीं था .......सुख एक मानसिक अवस्था है .......इसका बाहरी आडम्बर से कोई लेना देना नहीं है ...पर विडंबना यही है कि हम हमेशा सुख को बाहरी आडम्बर में ही खोजते हैं ......जीवन में ख़ुशी और सुख तो चारों ओर बिखरे हुए हैं ...कोई चुनने वाला चाहिए .....पर इश्वर से हम दोनों की वह ख़ुशी देखी नहीं गयी ......दो रु का वह खिलौना ....पतले से स्प्रिंग से जो लट्टू जुड़े हुए थे .....वो स्प्रिंग टूट गया ......मुझे एक झटका सा लगा ....एक क्षण के लिए निराशा हुई .....हमारे उस असीम आनंद में बाधा जो पड़ गयी थी .....पर अपनी डेढ़ साल की बेटी की पहली प्रतिक्रिया मुझे आज तक याद है .......उसे एकदम झटका सा लगा .......मानो सब कुछ बर्बाद हो गया हो .....जैसे दुनिया ही लुट गयी हो ......उसके चेहरे पर निराशा के भाव आए .....उसने सिर्फ इतना ही कहा ....ओह्ह्ह ......टूट गया .....पर तुरंत .......मुश्किल से एक दो क्षण बाद उसने खुद को सम्हाल लिया ......उसने उस झुनझुने के वो सारे टुकड़े समेटे और मुस्कुरा कर बोली ...कोई बात नहीं ...मैं इसे ठीक कर लूंगी .....
मुझे नहीं पता ...डेढ़ साल के बच्चे में इतनी अक्ल होती है क्या ....कि किसी चीज़ को ठीक किया जा सकता ......शायद उसने मेरे चेहरे पर पर निराशा के भाव पढ़ लिए थे और मुझे तसल्ली देना चाहती थी .....या ये उसकी एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया थी ....शायद और कोई बच्चा होता तो जोर जोर से रोता .........पर उस दिन इस छोटी सी घटना से मेरी डेढ़ साल कि बेटी मुझे ये सिखा गयी कि .......कोई बात नहीं ....दुनिया ख़तम नहीं हुई है .....कोई बात नहीं ....मैं इसे ठीक कर लूंगी .....लोग पता नहीं क्यों जीवन में इतनी जल्दी हार मान लेते हैं .......

मशहूर गायक गुलाम अली की मशहूर ग़ज़ल की या पंक्तियाँ मुझे हमेशा याद रहती हैं

वक़्त अच्छा भी आयेगा नासिर
गम न कर ज़िन्दगी पड़ी है अभी

और अपनी बेटी का मुस्कुराता हुआ चेहरा और ये कहना की ...कोई बात नहीं मैं इसे ठीक कर लूंगी ..........

Friday, March 4, 2011

हम चुप क्यों रहते हैं ?....हल्ला बोल

पिछला एक महीना सफ़र में बीता ... अपने गाँव जाने का मौका मिला ..और फिर कर्नाटक एवं महाराष्ट्र के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में पंद्रह दिन बिताये ..... हमारा देश कितना खूबसूरत है ....ये देखने का मौका मिला....इस के अतिरिक्त यात्रा का सुख ....travelling से बड़ी कोई education नहीं .... कुछ अनुभव बड़े ही मजेदार रहे ..... टीवी पर नई फिल्म ......ये साली ज़िन्दगी .....के प्रोमो देख कर ही मैंने ये मन बना लिया था कि ये फिल्म ज़रूर देखनी है ....अच्छी फिल्म मैं हमेशा सिनेमा हॉल में ही बैठ कर देखता हूँ ....और अच्छी फिल्म देखना और संगीत सम्मलेन सुनना , ये दो काम मेरी ज़िन्दगी के अत्यंत ज़रूरी काम हैं सो इनके लिए मैं समय निकाल ही लेता हूँ ...या यूँ कहिये कि ये दो निहायत ज़रूरी काम करने के बाद अगर समय बच जाए तो बाकी के काम हो पाते हैं ...... हॉल में बैठ कर फिल्म देखने का मज़ा ही कुछ और है .....सो बनारस के ip mall में देखी .......mall में तीन बार पूरी तलाशी ले कर ही अन्दर जाने दिया गया .....हॉल में घुसने से पहले तीसरी बार तलाशी कि बाद सुरक्षा कर्मियों ने मेरी पानी कि बोतल वही रखवा ली ......मैंने पूछा क्यों ?????? तो उन्होंने कहा कि पानी की बोतल और खाने पीने का कोई सामन अन्दर नहीं ले जा सकते......मैंने पूछा क्यों ????? जवाब मिला अन्दर कैंटीन में सब कुछ मिलता है ..... मैंने कहा की जब मेरे पास अपना पानी है तो मैं क्यों आप की कैंटीन से 25 रु की पानी की बोतल खरीद कर पीयूं ?????? जवाब मिला ....यहाँ का यही नियम है ....देखिये बाकी सब लोग भी तो अपनी बोतल यही रख के गए हैं........मैंने सुरक्षा कर्मियों से कोई बहस नहीं की ......सीधा मेनेजर के ऑफिस में गया .......वहां उनसे कहा की आप कैसे मुझे अपनी कैंटीन से पानी खरीदने के लिए मजबूर कर सकते हैं .....उसने मुझसे तर्क करने की कोशिश की पर मैं अड़ा रहा ......अंत में उसने अपने आदमी से कहा ...साहब की बोतल वापस दे दो ......इस पूरे प्रकरण में पूरे तीन मिनट की फिल्म छूट गयी ......फिल्म बहुत ही अच्छी थी ....मज़ा आ गया .......अरसे बाद एक अच्छी फिल्म देखी ........

अगले दिन वाराणसी के रेलवे स्टेशन की irctc की कैंटीन में मेरे बेटे ने राजमा चावल की प्लेट मंगाई । राजमा क्या थे बस रंगीन पानी में कुछ राजमा पड़े थे .......तभी मैंने ध्यान दिया की मेरी बगल वाली टेबल पर एक लड़का अपनी प्लेट यूँ ही बिना खाए छोड़ कर चला गया था .......मैंने मेनेजर को अपने पास बुलाया ......पहले तो वो आ नहीं रहा था ....फिर जब मैंने अपनी आवाज़ ज़रा ऊंची की तो वो आया ....मैंने उससे कहा ज़रा गिन कर बताइये इस में राजमा के कितने दाने हैं .......इतना सब कुछ देख कर बाकी लोग भी शुरू हो गए और मेरी हाँ में हाँ मिलाने लगे और कैंटीन की खराब व्यवस्था को कोसने लगे .....मैंने शिकायत पुस्तिका मंगाई तो मेनेजर गिडगिडाने लगा ......एक अच्छा ख़ासा नाटक हो गया .....मेरे बेटा इस पूरे प्रकरण में असहज महसूस कर रहा था ......क्या पापा ...आप भी ...छोटी सी बात पे पीछे ही पड़ जाते हैं ........वह मुझे रोज़ देखता है छोटी छोटी ऐसी ही बातों पर बहस करते हुए ....लोगों से उलझते हुए ......
एक दुकान में जब मैंने दुकानदार को 100 का नोट पकड़ाया तो उसने मुझे 8 रु के सिक्के देने की बजे 8 टॉफियां पकड़ा दी .....जब मैंने उससे पूछा की ये क्या है ....तो उसने जवाब दिया की खुले नहीं हैं ..... मैंने उससे पूछा की क्या आप मुझसे 92 रु की बजे 92 टॉफियां ले लेंगे ......इस पर वो नाराज़ हो गया और बहस करने लगा .......मेरे बच्चे मुझसे कहते हैं की पापा आप हमेशा 1 या 2 रु के लिए ही झगड़ा करते हैं ......उनको लगता है की मुझे अपनी सोच को थोड़ा बड़ा करना चाहिए .......
पर मैं उनसे एक ही बात कहता हूँ कि...... बेटा ....मेरी औकात इतनी नहीं है की मैं इस देश में एक लाख पचहत्तर हज़ार करोड़ की चोरी रोक सकूं .....इतनी औकात तो बेचारे मनमोहन सिंह और सोनिया गाँधी की भी नहीं है ......पर हाँ मैं ip मॉल में पानी की एक बोतल के लिए तो आवाज़ उठा ही सकता हूँ ......irctc की कैंटीन में अच्छे राजमा चावल के लिए तो लड़ ही सकता हूँ ........ट्रेन में चाय वाले से तो कह ही सकता हूँ की पूरी 150 ml चाय दो .......आपको क्या लगता है ...कि..... अगर वो लड़का........ जो उस दिन उस कैंटीन में अपनी राजमा चावल की प्लेट छोड़ कर चुप चाप चला गया ...अगर वह भी मेरी तरह चिल्लाता ....और रोजाना कुछ लोग इसी तरह चिल्लाते ....तो व्यवस्था में थोडा सुधार नहीं होता ???????
भ्रष्टाचार एक सामाजिक समस्या है और हमेशा एक रु से शुरू होता है ....सबसे खतरनाक स्थिति तब होती है जब इसे सामाजिक मान्यता मिल जाती है ......हमारे धर्म ग्रंथों में कहा गया है की अत्याचार को सहन करना सबसे बड़ा पाप है........और अगर हम कुछ नहीं कर सकते तो कम से कम आवाज़ तो उठा ही सकते हैं ......इसके लिए कौन सी कुर्बानी देनी है..... भगत सिंह की तरह ......अरे हाँ .....कुर्बानी पर मुझे ध्यान आया की उस दिन वाराणसी के ip mall में कितनी बड़ी क़ुरबानी दी मैंने ...आप सोच भी नहीं सकते .......उस पूरे प्रकरण में पूरे तीन मिनट की फिल्म छूट गयी ........ आप के लिए छोटी सी बात हो सकती है जनाब ....पर मेरे लिये तो कुर्बानी ही है क्योंकि फिल्म मैं हमेशा शुरू से अंत तक ही देखता हूँ ...एक दम पहले frame से आखिरी वाले तक .........तब तक...... जब तक की ये लिखा न आ जाये ..........A vishal bhardwaj film ।

हम चुप क्यों रहते हैं
चुप चाप सहते हैं
मुह खोल
हल्ला बोल