Sunday, April 17, 2016

SIP ...... systematic investment of प्यार

आज एक मित्र ने UP पुलिस के IG नवनीत सिकेरा जी की एक पोस्ट शेयर की है , जिसमे उन्होंने एक बहुत मार्मिक story शेयर की है । किस्सा उनके एक मित्र के परिवार का है जिसमे एक व्यक्ति की पत्नी और बच्चे उनकी बूढी माँ की care नहीं करते और उन्हें सबक सिखाने के लिए वो उन्हें एक वृद्धाश्रम में छोड़ आते हैं । बड़ी मार्मिक कहानी है । उसका दुःखद पहलू ये है की बहू अपनी सास की सेवा न करे , वो बात समझ आती है पर नाती पोते भी दादी से बात नहीं करते .........
इस कहानी पे टिप्पणी करने से पहले मैं आपको एक और सच्ची कहानी सुनाता हूँ ।

मेरा बेटा , दिग्विजय सिंह नन्हे , आज से कोई 25 साल पहले जन्मा ..........  घर का पहला बच्चा था । जनम के सीधा दादी की गोद में आया । एक बार उनकी गोद में जो आया तो 6 साल बाद उतरा । वो भी इसलिए कि दानू पहलवान का जन्म हो गया था । इस बीच घर में नेहा और चारु भी जन्मी पर उन दोनों को दादी की गोद नसीब न हुई । इसलिए नेहा मेरी गोद में और चारु अपनी माँ की गोद में पली ।
संयुक्त परिवार था । गाँव में । दादा , दादी , दो ठो पापा लोग और दुइ ठो मम्मी ........ इसके अलावा अनगिनत मौसियाँ , चाचियाँ , बुआ जी लोग और बीसियों aunties .......... घर में एक स्कूल था सो बच्चों को गोद की कमी न थी । पर तीन ऐसे व्यक्ति थे जो विशेष याद आते हैं । जिन्होंने बच्चों को पाला ....... एक सुजाता auntie , दूसरे लाल जी driver और तीसरे नथुनी साव जी जो सारा दिन इन्हें खिलाते । ख़ास कर सुजाता auntie जिन्होंने लखनऊ में चारों बच्चों को यूँ पाला कि सगी माँ भी नहीं पाल सकती ।
ये पूरा घटना क्रम 15 साल का है जिसे मैंने दो paragraph में समेटा है । यानी तब तक जब कि नन्हे 15 साल का हो गया और दानू अभी 9 का था ।
नन्हे को 7 साल की उम्र में ये पता चला कि ये जिसे वो mummy कहता है वो दरअसल उसकी दादी है और जिसे वो monika बुलाता है वो दरअसल उसकी माँ है । एक छोटे बच्चे को ये बातें बड़ी confusing लगी । नन्हे तो फिर भी परिवार भर की गोद में पला पर दानू को तो exclusively दादी ने ही पाला ।
नतीजा ये हुआ कि हमारे ( हम दोनों भाइयों के ) पाँचों बच्चे आज भी अपनी माँ से कम और अपनी दादी से ज़्यादा attached हैं । सारे बच्चे मेरी अपेक्षा अपने दादा जी से और बड़े पापा से ज़्यादा attached हैं । बहुत बड़े संयुक्त परिवार में पालन पोषण होने के कारण मेरे बच्चों ने दादी क्या अपनी सुजाता auntie को भी आजीवन मातृवत् स्नेह , सम्मान और प्यार दिया है ।
आजकल सुजाता SOS Hermann Gmeiner में एक Mother के रूप में कार्यरत हैं । कभी बच्चों से मिल जाती है तो लिपट के रोती है । आज से 4 साल पहले जब दादा जी मरे तो मेरे बच्चों ने यूँ शोक मनाया मानो उनका बाप मर गया हो ।

अब आइये वापस उस किस्से पे लौट चलें जहां बूढी दादी वृद्धाश्रम भेज दी गयी ..........
बच्चे और नाती पोते , वो पौधे होते हैं जिन्हें आप पाल पोस के पेड़ बनाते हैं , और फिर जब वो बड़े हो जाते हैं तो उन्ही की छाया में आप पलते हैं ।  बच्चे और नाती पोते तो SIP है भैया ......... Systematic Investment Plan ......... जिसमे आप अपने बच्चों और नाती पोतों पे अपना प्यार , स्नेह , वात्सल्य देते हैं ........ सालों साल देते जाते हैं ........ और फिर एक दिन वही प्रेम वही वात्सल्य सूद समेत वापस आता है ।
मुझे याद है , जब मेरा बेटा जन्मा ,तो मेरी माँ यानी उसकी दादी में इस कदर वात्सल्य उमड़ा कि उन्हें दूध उतर आया था .........  और आज जब कि वो 25 साल का है , तो जब वो उसे दुलारती हैं तो क्या दृश्य होता है .........

वृद्धाश्रम वाली दादी से कहीं कोई चूक तो नहीं हो गयी ???????????
या एकाकी परिवार के सिस्टम का दोष है ये ????????

20 comments:

  1. बचपन की यादे ताजा हो गई

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  2. बकलोल का बकचोद

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  3. आजकल जो एकल परिवार हो गए हैं हमारे समाज में वो इस सबके के पीछे एक बहुत बड़ा कारण हैं।नई जनरेशन अपने से बड़ो को बोझ समझने लगी हैं।

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  4. आजकल जो एकल परिवार हो गए हैं हमारे समाज में वो इस सबके के पीछे एक बहुत बड़ा कारण हैं।नई जनरेशन अपने से बड़ो को बोझ समझने लगी हैं।

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  5. आजकल जो एकल परिवार हो गए हैं हमारे समाज में वो इस सबके के पीछे एक बहुत बड़ा कारण हैं।नई जनरेशन अपने से बड़ो को बोझ समझने लगी हैं।

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  6. दद्दा आप हमेशा ही सही हो.

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  7. बहुत ही बढ़िया चित्रण .....दादी व् पोते के बीच के सम्बन्ध का ....वाकई मेरी भी दादी का स्वभाव मेरे प्रति अपने पुत्र से कम नहीं था.....!!!

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  8. वृद्धावस्था वाली दादी से कोई चूक तो नहीं हो गई... ये लाइन गले नहीं उतरी...

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  9. दद्दा आप हमेशा ही सही हो.

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  10. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (19-04-2016) को "दिन गरमी के आ गए" (चर्चा अंक-2317) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  11. Sir when I read it I felt like this post is a mandatory post for the present time. I'm going through this same situation where My-in-law don't even touch my son in any condition even when he is sick. Keeps on complaining that he is very naughty. Throughout day they watch TV n no help in house at all n expect me serve them like a loyal servant who keeps on standing with folding hands near by them morning to evening. When My son try to play with them they close the door of their room by saying he is disturbing them. Whatever happens they don't miss their TV serials. If we will say something to them they threaten to go somewhere else n mother in law goes in depression. Story is endless but we do everything silently for them as they r parents but how come my son will be attached to Dada or Dadi? How it is the fault of nuclear family? How come a bahu is responsible for this?

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  12. एकाकी परिवार में रहना पसन्द करने वाले अक्षर बुढापे में इस तरह ही समस्याओ से जूझते है ,हम गांव वाले इस मामले में खुशनसीब है दद्दा .
    मेरे दो बच्चे है जुड़वा है एक नानी के पास रहा और दूसरा दादी के पास जन्म के एक महीने बाद से ही अभी 3 साल के हो गए है दोनों पर खाना पीना सोना सब उन्ही के साथ होता है उनका ,हम मियां बीवी तो बस खाली समय के टाइम पास है उन दोनों के लिए :)

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