Friday, June 10, 2011

एक secular चित्रकार को ......श्रद्धांजलि

कल खबर आयी कि मकबूल फ़िदा हुसैन का देहांत हो गया ............अब मैं आपके सामने झूठ मूठ का शिष्टा चार नहीं बघारना चाहता .....जैसा कि परंपरा है कि कम से कम मरे हुए आदमी को तो इज्ज़त बक्श दो ........मेरी पहली प्रतिक्रिया यही थी कि चलो धरती से कुछ बोझ तो कम हुआ ....एक दुष्ट आत्मा का बोझ अब इस बेचारी धरती को कम ढोना पड़ेगा ........पर ध्यान दीजिये कि मैं ये मानता हूँ कि वो एक बहुत अच्छे या बहुत नामी गिरामी ...पेंटर थे ......हम गंवार लोग क्या जानें कि कला क्या होती है ......और ये भी कि मेरी उनसे कोई जाती दुश्मनी भी नहीं थी .मैंने सिर्फ उनके बारे में पढ़ा था कि वो देवी देवताओं की nude पेंटिंग्स बनाते थे .......मुझे याद है की पहली बार जब मैंने ये पढ़ा तो मुझे गुस्सा तो नहीं आया था पर अजीब सा ज़रूर लगा था .....गुस्सा तब आया जब ये पता लगा कि सिर्फ हिन्दू देवी देवताओं की पेंटिंग्स ही nude बनाते थे ........भारत माता ,दुर्गा ,पार्वती और सरस्वती की nudes बनाये उन्होंने ......पर अपनी माँ की पेंटिंग एकदम पूरी तरह ऊपर से नीचे तक कपड़ों से ढकी हुई बनाई है ....मदर टेरेसा की पेंटिंग भी इसी तरह पूरे कपड़ों में है ..........अब पता नहीं कौन सी मानसिकता है ये ..........पर समस्या ये नहीं है कि उन्होंने पेंटिंग बनाई .........आम तौर पर हिन्दू प्राचीन काल से ही इन सब मामलों में बहुत सहिष्णु रहा है ......बहुसंख्य लोग कोई बहुत उग्र प्रतिक्रिया नहीं देते .....पर भैया अगर मान लो कि कुछ लोगों को ये बुरा लगा तो इसमें इतना नाराज़ आप लोग क्यों होते हो ........कुछ लोगों को बुरा लगा और वो नाराज़ हुए ...........तो शुरू हो गया हमारा तथाकथित सेकुलर समाज , progressive सोच वाला समाज .........हमारा secularism का झंडाबरदार मीडिया ....कि देखो साले कितने जाहिल हैं ये सब ......इस बेचारे चित्रकार ने इनकी माँ की नंगी पेंटिंग बना दी तो इतना बुरा लग रहा हैं इन मूढ़ मति जाहिलों को .........साले देश को मध्य युग में ले जाना चाहते हैं ........बेचारे चित्रकार की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता छीन रहे हैं ........हाँ हमारी माँ बहन की नंगी फोटो बनाना उसका जन्म सिद्ध अधिकार है ........हमें विरोध करने का कोई अधिकार नहीं है .........
अब कुछ जाहिल , मूढ़ मत बेवक़ूफ़ हिन्दुओं ने श्रीमान जी का विरोध किया .....उनकी एक exhibition में कुछ तोड़ फोड़ भी की शायद .....तो श्रीमान जी हमेशा के लिए देश छोड़ कर चले गए .......क़तर में रहने लगे ........बड़ा अहसान किया इस भारत देश पर ........मीडिया और बुद्धिजीवी (हम तो भाई बुद्धिहीन हैं ) फिर रोये ....देखो बेचारे चित्रकार को देश छोड़ने पर मजबूर कर दिया .........अब कल मर गए ....तो एक anchor कल रो रहा था ...टीवी पर ....दो गज जमीं भी मिल न सकी कुए यार में .......इतना बड़ा भी कोई जान का खतरा नहीं था यहाँ पर .........बहुसंख्यक समाज की भावनाओं का ध्यान रखते हुए एक बार अफ़सोस प्रकट कर देते ....दिल से ........ पर उन्हें कोई अफ़सोस कभी हुआ ही नहीं....... तभी तो वहां इतने साल तान तोड़ते रहे ....क़तर में बैठे ...हम लोगों पर .......अब मुझे ये तो नहीं पता कि उन्होंने वहां कोई nude पेंटिंग .......किसी मुस्लिम महापुरुष की ...........बनायी ya नहीं .......कलाकार तो वो थे बहुत बड़े पर उनकी कलाकारी की उड़ान इतनी उँची भी नहीं थी कि किसी मुस्लिम महापुरुष की nude बना पाते.....यहाँ तो सिर्फ विरोध हुआ था ...एकाध शीशा तोड़ दिया था इनकी exhibition में ...वहां ऐसी हिमाकत करते तो बोटी बोटी नोच लेते वो सब ......
दुःख इस बात का है की इस गंदे घटिया आदमी ने ता उम्र तो हम बहुसंख्यक हिन्दुस्तानियों की बे इज्ज़ती की ही ......मरते मरते भी कर गया कमबख्त .....बहर हाल सुनते हैं की अच्छा आर्टिस्ट था ....भारत का पिकासो था ....अल्लाह करे ज़न्नत नसीब हो ........मरने के बाद माफ़ किया उसे ....जैस भी था, था तो हिन्दुस्तानी ही.

saraswati


lakshmi





durga

parvati






mother teresa fully clothed

his own mother ....fully clothed




मेरा गला मत घोटो ...मुझे बोलने दो....क्योंकि ये मेरा मूल अधिकार है

                            
                                                   दोस्तों हालात अच्छे नहीं हैं  .....पिछले कुछ महीनों से सरकार का आचरण ठीक नहीं है ......नागरिक समाज आन्दोलन की राह पर चल रहा है ........धरना ....प्रदर्शन ....हड़ताल  ......अनशन ....परन्तु इसकी प्रतिक्रिया जो सरकारों की तरफ  से आ रही है वो ठीक नहीं है .....अगर आपको याद हो तो पिछले महीनों में उत्तर भारत में जाटों और गुर्जरों ने सरकारी नौकरियों में आरक्षण की मांग को ले कर पूरा हरियाणा  राजस्थान  ही ठप्प कर दिया था ...रेलें बंद थीं .....रास्ते बंद थे .....सब कुछ ठप्प था .....पर सरकार की हिम्मत नहीं हुई की उन आन्दोलन कारियों को रोक सके ....कोई कार्यवाही करना तो दूर ,इतनी हिम्मत नहीं जुटा पाई की उन्हें सख्ती से एक वार्निंग दे सके ......अब रामदेव  और अन्ना आन्दोलन कर रहे हैं ......सरकार बर्बर दमन पर उतर आयी  है .....यहाँ आन्दोलनकारी एकदम शांति से बैठे हैं ,समाज को उन्होंने बंधक नहीं बनाया हुआ .......कोई चक्का जाम नहीं ...कोई रेल रोको नहीं ......पर सरकार लाठियों से पीट रही है ,144 लगा रही है ......बाबा के चरित्र  हनन पर उतर आयी  है ....बेशर्मी से बाबा का character assasination कर रही है ........सिर्फ आरोप लगा रही है ....सोचने वाली बात है की बाबा 17 साल से काम कर रहा है ....पर उसके खिलाफ जांच आज ही क्यों शुरू हुई .......5 साल पहले क्यों नहीं ......सरकार कह रही है की जो सर उठाएगा ...कुचल देंगे .......भ्रष्टाचार  के खिलाफ सत्याग्रह ??????  नहीं होने देगी .......जंतर मंतर पर प्रदर्शन ....नहीं होने देगी ........कहती है की इन सत्याग्रह से क्या होता है ......भूख हड़ताल से क्या होता है .........शर्म आती है ये सोच कर कि गाँधी की पार्टी कह रही है कि सत्याग्रह और अनशन से कोई समस्या हल नहीं होगी ....उस गाँधी की पार्टी जिसका सारा जीवन ही सत्याग्रह और अनशन करते बीता ......जिसके अनशन ने ब्रिटिश सरकार के घुटने टिकवा दिए ......उन्हें भारत छोड़ कर भागना पड़ा ......ये सरकार भूल गयी है कि सत्याग्रह में कितनी ताकत होती है ..........
                                                 दोस्तों .....सावधान .....हमारे मूल अधिकारों का हनन हो रहा है .....संविधान कहता है की भारत के नागरिक अपना विरोध प्रकट करने के लिए किसी भी सार्वजनिक स्थल पर ....किसी भी समय  .........कितनी भी संख्या में ....इकट्ठे हो कर शांति पूर्वक प्रदर्शन कर सकते हैं ...सत्याग्रह कर सकते हैं ....सूचने दे कर उपवास कर सकते हैं .....आमरण अनशन पर बैठ सकते हैं ...........कोई भी आदमी कर सकता है ........1)   चाहे वो rss से सम्बद्ध हो  2) चाहे वो 20 साल पहले साइकल पर चलता था और अब charterd jet से चलता हो ....3)...चाहे  उसकी 35 कम्पनियां हों दवा बनाने की ...4)   चाहे वो 2 रूपये की पुडिया 150रु में बेचता हो ........5 ) चाहे उसके ट्रस्ट की कुल संपत्ति 1177 करोड़ हो या  वो भिखारी हो ........ 6) वो चाहे सन्यासी हो या सजायाफ्ता कैदी .....जी हाँ एक सजा याफ्ता कैदी को भी अपनी बात कहने का और अनशन ...सत्याग्रह का हक़ है .....याद है भगत सिंह की जेल में की गयी भूख हडताल  ......पर सरकार कह रही  है की बाबा और उसके साथियों को सत्याग्रह का अधिकार ही नहीं है .....
                                                    चलो बाबा को न सही ....मुझे तो है ......मैं वहां रामलीला मैदान में सत्याग्रह कर रहा था .....मुझे क्यों भगाया ..वहां से ....लाठियों से पीट के .........रात को 2 बजे ......ऊपर से मुझे शिक्षा दी जा रही है की सत्याग्रह से कुछ नहीं होने वाला .....मेरा वहां आने का मकसद राजनीती है ....मैं RSS से सम्बद्ध हूँ .......और RSS को क्या हक़ नहीं है ......भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाने का ......
                                                    एक बात और जो मुझे  लगातार  परेशान  कर रही है .......अगर पुलिस के लाठी चार्ज के मकसद मुझे भगाना था तो हम तो पहली लाठी पड़ते ही भाग लिए थे ( मुझे रात 4 बजे कनाट प्लेस के पास सड़क पर पीटा जब हम जलूस बना के जंतर मंतर जा रहे थे ) फिर भी वो पुलिस वाले हमें एक किलोमीटर तक दौड़ा दौड़ा कर पीटते रहे .......जैसे हम उनके दुश्मन हों .......अक्सर लाठी चार्ज में पुलिस आपे से बाहर हो जाती है ....पर तब जब लोग हिंसक हों ...और पुलिस पर वार कर रहे हों ....पर हम तो एकदम निहत्थे और शांत थे .......फिर पुलिस का ये रवैया .......मुझे लगा की वो पुलिस वाला मुझे अपने दुश्मन की तरह देख रहा था ....क्योंकि वो भी तो रोज़  हज़ार दो हज़ार रूपये बनाता  है लूट के ....और हम उस लूट के खिलाफ बोल रहे हैं .......सलमान खान और शाहरूख खान विरोध कर रहे हैं .....क्योंकि इनका भी तो जमा होगा वहां स्विस बैंक  में ....सचिन ,धोनी और अमिताभ बच्चन जैसे लोग चुप हैं .....क्योंकि इनका भी तो जमा है वहां ....और हमारे इस आन्दोलन से उसके मिटटी  हो जाने  का खतरा है ......इसलिए हम तो मान के चल रहे हैं की इन तथा कथित बड़े लोगों और स्टार्स का समर्थन  तो नहीं मिलने वाला ......आम आदमी खड़ा होगा हमारे साथ ...सो सरकार की strategy है की आन्दोलन को बदनाम कर दो ....RSS   से जोड़ दो,सांप्रदायिक बता दो  ....मुसलमान कट जायेगा .....बाबा को ठग ...चोर बता दो .....आम आदमी कट जाएगा ......इसे पूँजी पति बता दो ....गरीब कट जायेगा ......जनता के  आन्दोलन को जनता के बीच बदनाम कर रही है सरकार ......
                                                  बाबा के ट्रस्ट और कम्पनियां 20 साल से हैं ....अगर कुछ गलत  है तो जांच 20 साल पहले से शुरू होनी चाहिए थी ...आज क्यों शुरू हो रही है .....दोस्तों बाबा का जीवन खुली किताब है ........20 साल पहले साईकिल पे चलता था .......11000 रु  से ट्रस्ट शुरू किया था   आज 1200 करोड़ का है....ये पैसा आपके मेरे जैसों ने ही दिया है .....11 रु से ले कर करोड़ रु तक का चंदा लेता है बाबा .......खुले  आम मांगता है  ......पर उसके सेवा कार्यों को देखिये .......दुनिया का सबसे बड़ा आयुर्वेदिक हॉस्पिटल .......सबसे बड़ा naturopathy hospital ....एकदम फ्री सेवा .....आयुर्वेदिक कॉलेज .....योग  research सेण्टर..... गरीब मरीजों के लिए फ्री रहना खाना .........200 से ज्यादा आयुर्वेदिक दवाइयां .....cosmetics ......एवं साबुन से ले के पेस्ट ...biscuit तक .....जी हाँ बाबा बिस्किट भी बनाता  है ....पूरी दुनिया मैं मैदे का बिस्किट बनता है पर बाबा का बिस्किट आटे और अन्य 6 मोटे अनाजों का है और उसमे मेथी दाना है ......साबुन में जड़ी बूटियाँ और मुल्तानी मिटटी है ......अगर बाबा के प्रयासों से आयुर्वेद पुनः समाज में जीवित हो रहा है तो उसकी सराहना होनी चाहिए न की निंदा .........और जहाँ  तक योग की बात है .....मेरा स्वयं का अनुभव है .....मैं अपने बढ़ते वज़न से परेशान था 80 किलो से बढ़ता हुआ 101 तक जा पहुंचा ....सब कोशिश की ...dieting की ...कम नहीं हुआ .....घुटनों में दर्द शुरू हो गया .....मुझे रात में सांस आने में दिक्कत होने लगी ....जोर जोर से खर्राटे लेता था ........साथ सोने वाला का सोना दूभर हो जाता था ........पतंजलि में मैंने 7 मई से योग शुरू किया रोज़ सुबह एक घंटा .......वो भी सिर्फ प्राणायाम .....कपाल भाति ...अनुलोम विलोम ......एवं उज्जायी ........3 हफ्ते में मेरा वज़न 6 किलो कम हुआ ....बिना किसी dieting के .....कल मेरी पत्नी मुझे देख के दंग रह गयी  .........आज सुबह उसने मुझे बताया कि मेरे  खर्राटे बिलकुल बंद हो गए हैं .......सिर्फ 3 हफ्ते में मेरा कायाकल्प हो गया है .......योग जो इस देश से तो लुप्त हो गया था उसे बाबा ने पूरे विश्व में पुनर्स्थापित किया है .....और उसे ये देश गरिया रहा है की बाबा चोर है ....ठग है .....अरे भाई बाबा अपने लिए कुछ नहीं मांग रहा ....वो  बाहर जमा पैसा वापस लाने की बात कर रहा है .....आपका पैसा ...मेरा पैसा ......हमारे हिस्से का पैसा जिसे इन चोरों ने लूट लिया ......

           आपने कहा की मैं चोर हूँ ,ठग हूँ .......ठीक है ....संवैधानिक तरीके से जांच कराओ ....मामला बनता है तो मुकदमा चलाओ    ...और मुझे फांसी पे चढाओ ...........पर वहां सूली पे लटकाने से पहले .....मेरा गला मत घोटो ........मेरी आवाज़ को मत दबाओ ........क्योंकि बोलने का हक़ है मुझे...ये मेरा मूल अधिकार है

Wednesday, June 8, 2011

बाबा ने बाँध लिया है सर पे कफ़न .........

उत्तर प्रदेश में scholarship घोटाला चल रहा है कई साल से ..........मैं काफी समय से उस पर काम कर रहा हूँ .....सरकार छात्रों को वजीफा देती है कि वो पढ़ सकें ..........350 रु पांचवीं तक के बच्चों को .......440 रु आठवीं तक और 720 रु 9th और 10th वालों को ......पिछले तीन साल में 7200 करोड़ रु बांटे हैं सरकार ने .......इसमें लगभग 5000 करोड़ का गबन हुआ है ........हमारे जिले गाजीपुर में एक विकास खंड के तीन गावों में एक आदमी ने 26 फर्जी स्कूल खोल रखे है जो सिर्फ कागजों पर चलते हैं ......उसमे एक एक स्कूल में 9th और 10th क्लास में 1500 बच्चे दर्ज हैं .....जी हाँ एक स्कूल में 1500 ..........सरकार ने उस स्कूल को 15 लाख रु दे दिए हैं ....ऐसे उस अकेले आदमी ने उन 26 स्कूलों के मार्फ़त पिछले 4 सालों में 3 लारोड़ से ज्यादा लूटा है ......सरकार के 7 विभाग इसमें शामिल हैं और एक बैंक और उस गाँव का प्रधान ........ऐसे हमारे जिले में हज़ारों स्कूल हैं और सैकड़ों लोग ( माफिया ) शामिल हैं .... इस लूट में .....एक जिला विद्यालय निरीक्षक है जो 6 साल से उस जिले में जमा हुआ है ........उसके कार्यकाल में 200 करोड़ से ज्यादा का गबन है सोच लीजिये उसका हिस्सा कितना होगा .........मैंने RTI के तहत applications डाली हैं ...अब तक कोई जवाब नहीं आया है ........डीएम भी चुप बैठा है ........मामला गाजीपुर का है और मैं यहाँ हरिद्वार और जालंधर से बैठ के लड़ रहा हूँ .........अप्रैल में घर गया था ....एक मित्र आये थे ....समझाने लगे ....क्या रखा है .......कुछ ले दे के बैठ जाओ ........ये लोग बहुत गंदे लोग हैं ....बहुत powerful भी हैं .........इनका कुछ नहीं बिगड़ेगा .........लगे आंकड़े गिनाने ...एक अमित जेठवा था ...गुजरात में ......तुम्हारी तरह RTI एक्टिविस्ट .....मरवा दिया ....अब तक कुल 12 मारे जा चुके हैं ........कौन सा मरणोपरांत परम वीर चक्र मिल गया उन्हें .........और फिर इसमें तो खुद मुख्तार अंसारी involved है ......मुख्तार अंसारी का नाम सुन के हड्डियों में खून जम जाता है गाजीपुर में .......पूर्वांचल में 200 रु में लड़के murder करते हैं ......मेरे जैसे अदना से आदमी की सुपारी का रेट दस हज़ार रु है .......ये सब बातें मैं खूब जानता हूँ ........
अब ये किसी फिल्म का सीन होता तो हीरो एक लंबा सा देशभक्ति पूर्ण डायलोग मारता ....उस आदमी को 2 झापड़ मारता और फिर हेरोइन के साथ पेड़ के इर्द गिर्द नाचने गाने लगता ........पर वास्तविकता ये है भाइयों की उस दिन मेरी pant खराब हो गयी थी .......सांस अटक गयी थी सीने में .......हलक सूख गया था ....और तीन दिन लगे थे मुझे उस सदमे से उबरने में .........और फिर वो फाइल उठाने की हिम्मत मैं यहाँ पतंजलि में आ के ही जुटा पाया था .......अब ये हिम्मत कितने दिन कायम रहेगी मैं कह नहीं सकता ...परिवार है मेरा .......अगर कोई सचमुच मेरे बच्चे के पास आ के खड़ा भी हो गया तो मैं मूत दूंगा .......और एक बात और है ....कि इस पूरे केस में 10 -20 लाख बनाया भी जा सकता है ....और फिर यहाँ से आदर्शवाद के ब्लॉग लिखना बदस्तूर जारी रहेगा .........मेरे सामने ये कुछ options हैं
1) लड़ाई जारी रखूँ .......चाहे शहीद हो जाऊं .....इस बात की परवाह किये बगैर ......कि इसका कोई फल मेरी शहादत के बाद निकलेगा भी या नहीं ....कि वो सारा पैसा उन लोगों से वसूल होगा ...और वो जेल जायेंगे और ये कि आगे ये लूट बंद हो जायेगी .......
2) कुछ दिन ये नाटक जारी रख के फिर समझौता कर लूं ......इसमें मेरे जैसा टुच्चा आदमी भी 20-25 लाख तो बना ही लेगा ....और ये केस अगर वीर संघवी या बरखा दत्त के पास हो तो वो तो 2-400 करोड़ बना लेंगे ........सीधे मायावती से बात कर के .......
३) इन पंगों में न पडूं ....चुप चाप खा कमा लूँ ...किसी कोने में ...अपने बच्चे पाल लूं .......और शाम को आराम से राग दरबारी सुनूं .......भीम सेन जोशी का ......

प्यारे दोस्तों ...माफ़ी चाहता हूँ ...अगर मैंने आपका दिल तोडा हो ये घटिया लेख लिख के .....ये तथा कथित कायरता पूर्ण बाते कर के ......आपके फ़िल्मी आदर्शवाद को ठेस पहंचा के .....पर सच्चाई बहुत कडवी होती है मेरे दोस्त ....यथार्थ का धरातल बहुत कठोर होता है .........
अब ज़रा कहानी का पात्र बदल देता हूँ .......बाबा रामदेव 12 घंटे पुलिस की हिरासत में रहे .......12 घंटे में पुलिस .......या ये तंत्र ....बिना कुछ समझाए आपको क्या कुछ समझा सकता है ............क्या आपको इसका अंदाजा है ........जो आदमी एक देश की सरकार से लड़ रहा हो ....और उसकी लड़ाई से इतने बड़े नेताओं ....अधिकारियों .......पूँजी पतियों ...अपराधियों ......मल्टी नेशनल कम्पनियों ...दलालों ......पुलिस अफसरों की आज तक की सारी काली कमाई जब्त हो जाने और आगे का सारा जीवन जेल में बीतने का खतरा पैदा हो जा रहा हो .....उसे ये लोग अपने रास्ते से हटाने के लिए क्या कुछ कर सकते हैं ...बताने की ज़रुरत नहीं है ........पेप्सी और coke जैसी कम्पनियां .........जो चाहें तो पूरी की पूरी सरकार को खरीद सकती हैं ........हसन अली जैसे माफिया .........लालू और शरद पवार जैसे नेता .......और ये इतने बड़े बड़े international banks ...इनसे पंगा ले रहा है बाबा .........आम तौर पर लोगों को आतंकवादियों से खतरा होता है ....पर बाबा के तो हज़ार दुश्मन हैं .......गिनवाऊँ ??? आतंकवादी ......ये सत्ता के दलाल ,ये टैक्स चोर , ये नेता , ये MNCs , ये multi national banks , खुद अपनी सरकार ........
बाबा के सामने भी 3 options हैं ..........पतंजलि में बैठ के पैर पुजवाए ............चुप चाप हज़ार दो हज़ार करोड़ या शायद 1-2 लाख करोड़ ले के बैठ जाए और मौज करे .........या फिर भिड़ जाए सर पे कफ़न बाँध के ......अबे तेरे आगे पीछे रोने वाला कौन है .......क्यों डर रहा है .........पर आज के बयान पर ज़रा ध्यान दीजियेगा .......बाबा ने कहा है कि अपनी सेना बनाऊंगा ....और उन्हें शाश्त्र और शस्त्र ....दोनों की ट्रेनिंग दूंगा ........एक डरे हुए बाबा ने ...एक बार तो जिसकी धोती खराब हो गयी थी ....जिसका अपनी सरकार से भरोसा उठ गया है .........उसने सर पे कफ़न बाँध लिया है .......ये अपनी सेना बना के उसे शस्त्र की ट्रेनिंग देने का बयान उसी डर ...हताशा और संकल्प की उपज है ..........
अब आप बताइए ...कहानी के इन दोनों पात्रों को क्या करना चाहिए .........कौन सा option चुनना चाहिए ..........पर ध्यान रहे सुझाव फ़िल्मी आदर्शवाद की उड़ान पर बैठ के नहीं ......वास्तविकता के ठोस धरातल पे बैठ के दीजियेगा .......मुझे आपके comments का इंतज़ार है ....

एक नवजात शिशु चाहिए ...भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने के लिए

आज़ाद भारत के मेरे प्यारे दोस्तों ......कल देर शाम दिल्ली से हरिद्वार पहुंचा .......दायें हाथ की दो उंगलियों में fracture है ......सूजन अब कम हो गयी है ....पर अपन ने भी सोच लिया है .....प्लास्टर नहीं लगवाऊंगा .....ज़रा सा भी हाथ इधर उधर लग जाता है तो दर्द होता है .......और वो ये याद दिलाता है की अपने बेहद इमानदार प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह और त्याग की प्रतिमूर्ति सोनिया जी की तरफ से तोहफा है ....जो उस रात 4 बजे मिला जब हम रामलीला मैदान से खदेड़े जाने के बाद अपना आक्रोश प्रकट करने जंतर मंतर जा रहे थे .....हम ये कहना चाहते थे की इस देश में लूट और भ्रष्टाचार के खिलाफ शांतिपूर्ण ढंग से आवाज़ उठाना हमारा संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकार है ........आज सुना है की केंद्र सरकार ने जंतर मंतर पर धारा 144 लगा कर अन्ना को वहां उपवास और आक्रोश प्रदर्शन से रोक दिया है ........दोस्तों फिर कह रहा हूँ ...ये हमारा मूल अधिकार है ......शांतिपूर्वक विरोध प्रकट करने का ...और इसे धारा 144 लगा कर नहीं रोका जा सकता ......ये असंवैधानिक है ...लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है ........सरकार कहती है की बाबा लोकतंत्र को कमज़ोर कर रहा है .......जिस देश में विरोधियों का मुह इस तरह लाठियों से और धारा 144 से बंद किया जाए वहां लोकतंत्र की farewell party की तैयारी कर लेनी चाहिए .........1975 ......का इतिहास दोहराया जा रहा है .....तब भी मैंने सुना है कि सारी गिरफ्तारियां रात में ही होती थीं .....सबको जेल में ठूंस दिया था ...प्रेस का गला घोट दिया था ..........ओह याद आया प्रेस का गला तो आज भी घोटा जा रहा है ......हाँ तरीका कुछ अलग है ...आप लोगों ने अगर ध्यान दिया हो तो कल से news chanells पे mid day meals के सरकारी विज्ञापन आने शुरू हो गए हैं ....कुत्तों को हड्डी दाल दी है सरकार ने ......जैसे बोल रही हो कि ...अबे क्या भोंक रहा है ...ये ले हड्डी चूस ......और अब जरा राम देव की तरफ मुह कर के भोंक ......
दूसरी तरफ सरकार ने बाबा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है ........ED ,income tax , DRI ......सारे घोड़े खोल दिए हैं ....कहा है कि सारे कागज़ खंगालो ....कहीं तो फंसेगा ......कुछ भी निकालो ......नंगा कर के तालाशी लो ...कुछ तो निकलेगा .....फिर कहंगे ...अरे ये तो खुद चोर है ...ये हमारे ऊपर क्या भोंक रहा है .......दूसरा बाबा तो नेपाली है .......ये नेपाली हमें कैसे चोर कह गया .....अगर बाल कृष्ण जी नेपाली हैं तो मेरी नज़रों में उनका सम्मान और बढ़ गया आज ........कि एक नेपाली हो के भी इतने निष्काम भाव से भारत मां के बच्चों की सेवा कर रहा है ये आदमी ....अरे तुम डाकुओं से तो अच्छा है ......
बाबा ने आज घोषणा कर दी है कि कभी कोई चुनाव नहीं लड़ेंगे....कोई राजनैतिक पद ग्रहण नहीं करेंगे ........हमारा कोई राजनैतिक या साम्प्रदायिक agenda नहीं है ....कोई छिपा हुआ agenda नहीं है ....हमारी लड़ाई सत्ता परिवर्तन के लिए नहीं व्यवस्था परिवर्तन के लिए है ........काले धन और भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई में जो भी हमारा साथ देगा हम उसका साथ देंगे ....कोई भी ......और आज की press conference की शुरुआत की ....सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में हैं .........इस गाने से ....बाबा ने बगावत कर दी है ...इस सड़ी गली व्यवस्था के खिलाफ ......
उधर सरकार ने भी ठान लिया है ...कि भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ इस मुहिम को कुचल देगी ........बाबा को चोर ठग बना के .... बाल कृष्ण जी को नेपाली बना के ....पासपोर्ट एक्ट में ....आर्म्स एक्ट में ...चाहे जैसे ....जो भी सर उठाएगा ...कुचल दिया जाएगा .......अब तो इस सरकार के खिलाफ वही बोल सकता है जो खुद एकदम दूध का धुला हो ...एक दम सच्चा सुच्चा ...पवित्र ............ऐसे तो बच्चे ही हो सकते है ...सिर्फ नवजात शिशु ही इतना पवित्र होता है .........

Monday, June 6, 2011

आठवीं फेल बाबा और ये पढ़े लिखे. लोग ......

इधर रामदेव और उनके आन्दोलन पे काफी कुछ लिखा जा रहा है ....एक बात पे सभी लेखक सहमत है ...फिर वो चाहे अंग्रेजी के हों या हिंदी के .....कि बाबा आठवीं फेल है ......8th drop out .....अब मैं आपको बता दूं कि बाबा ने स्कूल ( अगर आप उसे स्कूल मानें तो ) आठवीं में छोड़ दिया और गुरुकुल खानपुर चले गए ......... फिर वहां 20 साल तक उन्होंने संस्कृत का व्याकरण , litrature और दर्शन शास्त्र ...philosophy पढ़ा .......संस्कृत की पढ़ाई अष्टाध्यायी से शुरू होती है और महाभाष्य पे ख़तम पे होती है .इसमें बेहद brilliant students भी कम से कम दस साल लगाते है ..वैसे महाभाष्य के लिए तो सुना है की 20 साल भी कम हैं .....और महाभाष्य पढ़े student के सामने ये PhD लोग बच्चे लगते हैं ......अब हमारे मीडिया के ये पढ़े लिखे ( BA ) भाई लोग अगर बाबा को आठवीं फेल लिखते हैं अगर ,तो उनकी बुद्धि पर तरस आता है मुझे ......बीस साल तक संस्कृत litrature और grammar पढ़ा लिखा आदमी ....उसे ये लोग 8th dropout लिखते हैं ......यानि संस्कृत कोई subject ही नहीं और पढ़ा लिखा वो जो कॉलेज से BA की डिग्री ले ........और एक बात बता दूं आप लोगों को ...पिछले ,महीने मुझे एक हफ्ता एक गुरुकुल में रहने का मौका मिला ...वहां का स्टुडेंट रोज़ सुबह 3 .45 पे उठता है .........और कोई उठाता नहीं है जनाब ....अपने से उठता है ......रोज़ 8 से 10 घंटे स्वाध्याय करता है .....10 साल तक .......exam गुरु जी लेते हैं..... कहीं से कोई question पेपर नहीं आता .......नक़ल मार के कॉपी नहीं भरता है .......और संस्कृत litrature और philosophy पढने के लिए तो 50 साल भी कम हैं .
जहाँ तक बात योग की है तो योग मात्र चार आसन और deep breathing मात्र नहीं है ......ये एक जीवन दर्शन है ........यानि एक संपूर्ण जीवन शैली है ....जो आपके thought process और stress level को regulate करती है ...आपके life style में changes लाती है .......अब आपकी पूरी medical science खुद कहती है की सारी problems की जड़ ये stress और life style ही है .....इसे योग से ठीक किया जा सकता है ........योग को इस से सरल भाषा में नहीं समझाया जा सकता .......पर इसे फील करने के लिए आपको इसे करना पड़ेगा ....इस से पहले मैं भी ये सारी बातें सिर्फ सुनता था .......पिछले एक महीने से योग कर रहा हूँ ....6 किलो वज़न कम हो चुका है ....बिना किसी dieting के.........स्ट्रेस गायब है जिंदगी से ........मैं अपने जीवन में आनंद महसूस कर रहा हूँ ...वैसे मैंने सुना है की आनंद की अनुभूति कोकीन का shot लेने के बाद भी होती है .......अब ये आप को decide करना है कि आपको कौन सा आनंद चाहिए ......किसी आदमी के लिए कुटिया में भी आनंद ही आनंद है और अपने मुकेश भाई अम्बानी को अपने उस 23 मंजिला घर में भी आनंद मिला या नहीं मैं कह नहीं सकता ........और आज मुझे ये भी पढने को मिला कि बाबा के ज़्यादातर समर्थक intellectually challenged lower middle class लोग हैं ......मैं इस बात से पूरी तरह सहमत हूँ .....की हम सब लोग जो उस दिन रामलीला मैदान में भूखे प्यासे बैठे
थे ...रात भर पुलिस से पिटते रहे ......अगले दिन धूप में...... 41 डिग्री में ....सारा दिन अपने दोस्तों को ढूंढते रहे ........( तकरीबन सबके फोन बंद हो चुके थे ..चार्ज न होने के कारण ) हम लोग वाकई intellectuals नहीं है ....intellectual होते तो अपने बेडरूम में ac 16 डिग्री पे चला के सोते ...देश तो जैसे तैसे चल ही रहा है .......intellectual वो होता है जो morning walk पे भी अपनी SUV में जाता है .......जिसकी लड़की की शादी में 850 dishes serve होती हैं जिसमे 25 किस्म के तो पुलाव होते हैं .......हम दाल भात खाने वाले लोग ........हमें बात बात में कंधे उचका के oh noooo ....oh shit कहना तक नहीं आता .......हम भोजपुरी और हरयाणवी में बात करने वाले लोग .......हम कहाँ के intellectual .....

ये भी कहा जा रहा है की बाबा को अपना काम करना चाहिए ........जिसका जो काम है उसे वो करना चाहिए ......सबको सिर्फ अपना काम करना चाहिए ......बात भी सही है .......बाबा को योग सिखाना चाहिए ....चंदा बटोर के बड़ा सा AC आश्रम बना के अपने भक्तों से चरण पुजवाने चाहिए ..........किसान खेती करे ...student पढ़ाई करे ...दुकानदार दुकान चलाये ....... गृहणी घर का झाड़ू पोंछा करे ......अभिनेता फिल्म बनाए ...लोगों की शादी में नाचे और पेप्सी बेचे ......हम अखबार और चैनल चलायें .....नेता देश चलायें .......सही बात है ..हम साले दो कौड़ी के लोग ...खेती बाड़ी छोड़ के यहाँ क्या कर रहे हैं, दिल्ली में .......हम अनशन करेंगे तो इनकी बेटी की शादी में 850 dishes बनाने के लिए अन्न कौन उगाएगा .......हमारा बाप ???????? ऊपर से हमें मालूम ही क्या है काले धन की इन कानूनी पेचीदगियों का ......अंतरराष्ट्रीय कानूनों का ...अर्थशास्त्र का .....हमें जा के अपना काम करना चाहिए ......हमने क्या ठेका ले रखा है देश का ....country will be run by these generals of democracy .........ये काम हमें कपिल सिब्बल ,चिदंबरम .मोंटेक .और मनमोहन सिंह,बरखा दत्त और वीर संघवी और cp surendran के लिए छोड़ देना चाहिए .......ये सब विद्वान् ...पढ़े लिखे लोग हैं ....सम्हाल लेंगे ......
सुना है कि अनशन और सत्याग्रह से कोई समस्या हल नहीं होती है ....समाज चलाना ये संतों साधू सन्यासियों का काम नहीं ..........पर मेरे भाई जरा पीछे नज़र तो मारो ...ये देश जो आज थोडा बहुत कुछ है इसमें ,दयानंद ,विवेकानंद ,राम मोहन रॉय ,इश्वर चन्द्र विद्यासागर ,गाँधी और विनोबा जैसे संतों की ही देन है .............समाज को इन्ही लोगों ने सुधारा ......जात पात ,छुआ छूत ,बाल विवाह ,सती प्रथा , स्त्री शिक्षा , बंटे हुए समाज को जोड़ने का काम किया .......पर इन democratic generals ने ???????? . जो जात पात इस देश से जा रहा था उसे पुनर्स्थापित किया ......मंडल कमीशन ....वी पी सिंह ,आरक्षण की राज नीति , जाट आन्दोलन ,गुर्जर आन्दोलन , विकराल भ्रष्टाचार , regionalism , भाषा की लड़ाई .....ये सब किसकी देन है ....... democracy के इन genrals की .....अब इसे ठीक कौन करेगा ...ये लोग ....जी नहीं .......इन संतों के नेतृत्व में ...आप और मैं .......

हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए
आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी,
शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए
हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में
हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए
सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,
सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए
मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही
हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।
- दुष्यन्त कुमार












Sunday, June 5, 2011

सरफरोशी की तमन्ना .........

                                                                         दोस्तों आज का दिन बड़ा ही संघर्ष  पूर्ण रहा ....हमारे  4 साथी  icu में admit हैं ........32 गंभीर रूप से घायल हैं ....बहुत से अपने groups से बिछुड़ गए हैं .........महिलायें और बच्चे भटक गए हैं ........ज़्यादातर लोग अपने घर जा रहे हैं ........बाबाजी हरिद्वार  पहुँच चुके हैं...... उन्होंने अपना व्रत नहीं तोडा है ........सिर्फ venue बदल गया है ....संघर्ष अनवरत चल रहा है ........चलता रहेगा ............मैं बाबा राम देव जी का भक्त  नहीं हूँ ........व्यक्ति पूजा से मुझे सख्त नफरत है .......और न मै बाबा के साथ हूँ ........मैं तो उस cause के साथ हूँ ..... i support the cause ......जब अन्ना ने सत्याग्रह किया तो मैं उन दिनों गाजीपुर में  था ............तब भी मैं उपवास पर बैठा था ........भक्त मैं उनका भी नहीं हूँ ......पर मैं उस मुद्दे का समर्थन करता हूँ जो उन्होंने उठाया ..........इसलिए उनके साथ हूं ........दोस्तों मैं कोई निठल्ला आदमी नहीं हूं ......बहुत काम है मेरे जिम्मे .........आज मेरी 19 साल की बेटी जो इस समय जालंधर में अकेली है ....पूछ रही थी ....पापा कब आयेंगे .....मैंने उस से कहा है ...बेटा अपना ख्याल रखना........पर इस वक़्त देश को मेरी ज्यादा ज़रुरत है ........तुम अपना ख्याल रख सकती हो .....देश का तो मुझे रखना पड़ेगा .....मेरे बेटा पूछ रहा था ....पापा किन चक्करों में फस गया यार ......भगत सिंह मत बन .........मैंने उसे कहा हाँ भगत   सिंह  तो चाहिए इस देश को ...पर वो भगत सिंह पडोसी के घर में पैदा  होना चाहिए .....हमारे घर में नहीं .....हम सब लोग अपने अपने कामों में busy हैं .....अपनी अपनी व्यस्तताएं हैं सबकी ...........पर फिर भी चाहे एक मिनट ही सही ...देश के लिए निकालिए .......अपने घर के आगे एक काला कपडा तो लटका ही सकते है ....हाथ से ही लिख दीजिये ...chalk से ....i protest .........
                                                           आज लालू जी TV पर ललकार रहे थे ....मैं देखूंगा की कैसे ये बिल संसद में पास होगा .........कौन सा बिल ???????? यही की विदेशों में जमा काले धन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित किया जाए .....वाह रे लालू जी ....वो कितने दृढ हैं अपने संकल्प में ........एक पूरी की पूरी जमात इसका विरोध कर रही है ........पर हम लोगों का भी दृढ संकल्प है....... और राष्ट्र हित में है  ............आइये आप भी इस मुहिम से जुड़िये ......एक आहुति आपकी भी होनी चाहिए इस महा यज्ञ में ........
                                   सुना था की लोग शहीद हो गए देश के लिए ....स्वतंत्रता संग्राम में लोगों ने लाठियां खाई ...........कल रात 3 .30 बजे ...दिल्ली में कनाट प्लेस के पास......... हम लोग भाग रहे थे आगे आगे .......पुलिस दौड़ा रही थी पीछे से .......मै तो कायरता पूर्वक दो बुज़ुर्ग औरतों के बीच घुस गया ...शायद   इसी लिए बच भी गया ...पर मुझे याद है वो लड़का .......न भागा ......न डरा ...चुप चाप खड़ा हो के मार  खाता रहा .........तब तक जब तक की गिर नहीं गया ....पर भागा नहीं ......अब भर्ती है अस्पताल में ......पर इस सब के बीच स्वतंत्रता संग्राम की बातें याद आ गयी ....पढ़ा करते थे किताबों में .......कल कुछ कुछ वैसा ही महसूस हुआ .........


सरफरोशी  की तमन्ना .........                                                  

बाबा गिरफ्तार......... बर्बर lathicharge

दोस्तों एकदम शांतिपूर्ण सत्याग्रह को जिस तरह बर्बरता से पोलिस और भारत सरकार ने बल प्रयोग कर के हटाया ....अंग्रेजी शासन की यादें ताज़ा हो जाती हैं ........रात को १ बजे सोए हुए लोगों ...महिलाओं और सत्याग्रहियों पर सरकार का कहर टूटा ........वो आजाद भारत के इतिहास में दर्ज होगी ........रात में 3.30 बजे जब हम लोग जंतर मंतर की तरफ कूच कर रहे थे तो कनाट प्लेस के पास हम लोगों पर बार्रबार लाठी चार्ज हुआ .....मीडिया था नहीं इसलिए पुलिस ने महिलाओं को भी नहीं बक्शा ....एक लड़के को तो कम से कम 100 लाठी मारी होगी .........मुझे 4 लाठी लगी है दायें हाथ की दो उँगलियों में fracture है .......एक महिला जो भागते हुए गिर गयी थी उसे भी पीटा गया ......
मनमोहन सिंह जी ...आपको तहरीर चौक याद है न ???????इस देश में लाखों तहरीर चौक बनते देर नहीं लगेगी .......गद्दाफी बनने की कोशिश न करें ....इस देश का बच्चा बच्चा रामदेव है ..........बच्चा बच्चा भगत सिंह है .......
दिल्ली में बैठे जनरल डायर को सुन लेना चाहिए .........

Saturday, June 4, 2011

राम लीला मैदान के 5 स्टार पंडाल से .........

दोस्तों रामलीला मैदान के 5 स्टार पंडाल से मै अजीत सिंह ......एकदम ताज़ा और सच्ची खबर के साथ ....और कोई सुनी सुनाई बात नहीं ........first hand experience .......वाकई पंडाल बहुत बड़ा है ........बहुत बड़ा ....पर अफ़सोस कि छोटा पड़ गया ....बहुत छोटा ........आज सुबह 11 बजे तक पूरा पंडाल पूरी तरह भर गया था .........जबकि लोग तो बस अभी आना शुरू ही हुए थे ........और धीरे धीर लोगों का दबाव जब बढ़ने लगा तो police एवं स्वयंसेवकों ने लोगों को आगे बढ़ने से रोकना शुरू कर दिया ........एक बार तो ऐसा लगा की barricading टूट जाएगी .........और भगदड़ मचने की नौबत आ गयी ........सब लोग मुख्य पंडाल में आना चाहते हैं ........मुख्य पंडाल मतलब ........जी हाँ एक मुख्या पंडाल बना है जिसे तथा कथित 5 स्टार कहा जा रहा है ....आखिर क्या है उसमे 5 स्टार ......बस सिर्फ ये की उसमें वाटर प्रूफिंग के लिए एक एक्स्ट्रा layer लगी है जिसकी वजह से वो थोडा ठंडा है ...और उस पंडाल में मुख्यतया उन लोगों ने डेरा जमा रखा है जो अनशन पर पूरे समय रहेंगे इसलिए उन्हें एक दरी बिछाने भर जगह मिल गयी है ...पर उसमे बमुश्किल 5000 लोगों लायक ही जगह है ........तो जो लोग पहले आ गए उन्हें तो जगह मिल गयी ...बाकि लोग बाहर के simple पंडालों में हैं जहाँ सिर्फ एक layer है ऊपर ...पतली सी ...इसलिए बेहद गर्मी है ......बैठना मुश्किल है ....बेशक पंखे लगे हैं ...पर इतनी गर्मी में ......क्या करेगा पंखा ....इसी लिए लोग मुख्य पंडाल में घुसने की कोशिश कर रहे हैं ..........खाने की व्यवस्था है पर लाइन इतनी लम्बी है की 2 घंटे में भी नंबर ना आये .........शौचालय भी बने हैं पर ...650.....पर वहां भी लम्बी लाइन .......सब लोग उपवास पर बैठना चाहते हैं पर उपवास करने वाले को लेटने भर जगह तो चाहिए भैया ......यहाँ तो बैठने की जगह मुश्किल से मिल पा रही है .........हाँ पीने का साफ़ RO फिल्टर पानी आराम से मिल रहा है ...........मंच भी मुख्य पंडाल में है ......जहाँ सिर्फ पंखे लगे हैं .......कोई विशेष व्यवस्था नहीं ........ स्वामी जी रात मंच पर ही सोये थे........ पंखा चला के .......हाँ एक मेडिकल सेण्टर बनाया गया है .....आपात सेवाओं के लिए .......सिर्फ उसमे ac है ........
पता चला की मीडिया के भाई लिख रहे हैं की 5 स्टार सत्याग्रह चल रहा है ......आज एक मीडिया वाले भाई साहब अपने रुमाल से पसीना पोंछ रहे थे ....तो मैंने बस यूँ ही पूछ लिया ......क्यों 5 स्टार पंडाल में भी आपको इतनी दिक्कत हो रही है ? उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया और कट लिए .......आमरण अनशन पर बैठने का इरादा तो अपना भी था ...पर बदकिस्मती से पूरे पांडाल में लेटना तो दूर बैठने भर जगह भी न मिली ...अब खड़े खड़े क्या ख़ाक अनशन होगा .......सो अनशन का आईडिया तो ड्रॉप कर देना पड़ा ..........अब बाहर के ढाबों पर दाल रोटी खा रहे हैं और भाषण सुन रहे हैं .........सुबह लोग शौच हेतु नई दिल्ली रेलवे स्टेशन तक पहुंचे हुए थे ...........वहां भी लम्बी लाइन थी .......
तो ये है भैया हमारे 5 स्टार सत्याग्रह का आँखों देखा और स्वयं भोगा हाल .......बाकी उत्साह से भरे हैं सब लोग....... कोई गिला नहीं कोई शिकवा शिकायत नहीं .........अनशन चालु आहे ......

Thursday, June 2, 2011

माल गाड़ी में .....बनारस तक

                                      एक बार की बात है ...हम दोनों मियां बीवी को सैदपुर से बनारस किसी काम से जाना था .......दूरी है यही कोई 40 किलोमीटर ......और हमारे यहाँ उस route पर बस सेवा बहुत अच्छी है ...हर पांच मिनट में बस है ..पर बस की यात्रा बहुत नीरस होती है ...ट्रेन की यात्रा में जो मज़ा है .....जो रोमांच है ......वो बस या कार में कहा .....ट्रेन से भी अच्छी यात्रा अगर कोई है तो वो bike पे ...वरना ट्रेन इस द बेस्ट ......सो हम लोग भैया  स्टेशन पहुंचे तो पता लगा की शाम तक कोई गाड़ी नहीं है ........अब  ????  तभी एक परिचित मिल गए ...वो वहीँ उसी रेलवे स्टेशन पर किसी विभाग में तैनात थे ...दुआ सलाम के बाद उन्होंने बताया की गाडी तो कोई नहीं है ....हाँ ये जो माल गाडी खड़ी है ये जायेगी थोड़ी देर में ....पर फिर उन्होंने मैडम को देखा और सकपका गए ...... हमने उन्हें ढाढस बधाया और कहा की परेशान न हों ...इन्हें मालगाड़ी की यात्रा से कोई परहेज़ नहीं है ......बल्कि  इनको तो अगर option दे दिया जाए की मालगाड़ी में चलना है या passenger ट्रेन में, तो ये शायद माल गाड़ी को ही prefer करेंगी  ......ये सुन के उन्हें भी संतोष हुआ और हम लोग हो गए सवार.... पीछे गार्ड के डिब्बे में ...  ( मेरी बीवी की ये खासियत है की उसने हर अच्छे और बुरे काम में मेरा भरपूर साथ दिया है ...जैसे की मैं जब भी रेड लाइट jump करता हूँ तो इसके पीछे उसी की प्रेरणा  होती है)  ......और हमारे बैठते ही माल गाडी चल पड़ी ....और चली भी धुआंधार......दो स्टेशन तो वो नॉन स्टॉप गयी ....और गार्ड का डब्बा भी क्या हिचकोले खाता है ....जब गाड़ी चलती है फुल स्पीड से .......तब तक गार्ड साहब से दोस्ती हो ही गयी थी ...वो भी अपने आप को धन्य समझ रहे थे हमें लिफ्ट दे के .......और हमने भी उस यात्रा में खूब अपना GK बढ़ाया ...और रेलवे का आधा ज्ञान तो अर्जित कर ही लिया उस दिन ........गाडी दो स्टेशन बाद जा के रुक गयी  ...चलो भैया ....crossing .......गार्ड साहब ने वाकी  टाकी पर संपर्क कर के बताया की दो गाड़ियाँ cross होंगी तब अपनी गाडी चलेगी यानी कम से कम आधा घंटा .....तो हमने सुझाव दिया की चल के चाय पी जाए ....गाडी एक बहुत छोटे से स्टेशन पर खड़ी थी ....जहाँ एक छोटी सी दुकान थी ....उसने चने की घुघनी बना रखी थी ....ये एक ऐसी dish है जो पूर्वांचल की हर दुकान पे सुबह सुबह मिल ही जाती है ........घुघनी  यानि भीगे चने  थोड़े से तेल में प्याज और हरी मिर्च के साथ भून दिए जाते हैं कडाही में .....एकदम देसी और मस्त .....फिर हमने सिफारिश कर दी की भैया मकुनी बनाओ ......वो भी तकरीबन हर चाय की दुकान पर बनती ही है ....दुकान दार ने फट से कडाही चढ़ाई और ताज़ी ताज़ी मकुनी गढ़ दी ....मकुनी means ......आटे में सत्तू की filling ...... सत्तू mixed with प्याज ....and different masalas ...and deep fried ....eaten with चटनी  .......   दो रूपये की एक ..सस्ती सुन्दर ..टिकाऊ .......इस मस्त नाश्ते के दौरान ही स्टेशन मास्टर का मेसेज आ गया गार्ड साहब को की भैया जल्दी करो लाइन clear दे रहा हूँ ...... हम लोग भाग के अपने डब्बे में पहुंचे और चल पड़ी गाडी ......तभी धर्मपत्नी को ध्यान आया की उन्होंने बचपन में किसी क्लास में पढ़ा था की चलती गाडी में पत्थर उछालो तो वो पीछे नहीं छूट  जाता बल्कि आपके साथ साथ ही चलता  है और वापस हाथ में ही आता है .......पर ये तो सिर्फ theory में पढ़ा था ...प्रैक्टिकल  थोड़े ही किया था .......सो आज मौका मिल गया था इस theory की सत्यता को जांचने का .......पर पत्थर कहाँ से आये ...चलती गाड़ी में ........चलो पत्थर न सही ...पेन ही सही .......तो साहब हम लोग लगे पेन उछाल उछाल के catch करने ....पर अभी थोड़ा थोड़ा उछाल रहे थे .....सबने बारी बारी try किया और theory प्रथम द्रष्टया तो  सही पायी गयी  .....गार्ड साहब भी हमारे साथ शामिल हो गए ........जबकि मैंने उन्हें बहुत समझाया की भैया ...तुम हमारे चक्कर में मत पड़ो ...चुप चाप गाडी चला लो अपनी ...वरना बाद में ये मत कहना की इन लोगों  के चक्कर में नौकरी चली गयी मेरी ......पर उन्होंने भी अपनी नौकरी की परवाह नहीं की और इस खेल में शामिल हो गए ....पर अभी इस theory के और ज्यादा trials बाकी थे और उसके लिए पत्थरों की सख्त दरकार थी ....अब पत्थर  तो तभी मिलेंगे जब गाड़ी रुकेगी .....सो हम लोग मनाने लगे की गाड़ी किसी तरह रुक जाए पर वो कमबख्त दो स्टेशन फिर nonstop पार कर गयी ......पर उस दिन भगवान् जीवन में पहली बार academically हमारे favour में था और वो भी चाहता था की ये बच्चे physics के इस सिद्धांत में पारंगत हो जाएँ सो अगले स्टेशन के outer पे जा के गाडी खड़ी हो गयी. हमलोगों ने जल्दी से 10 -15 पत्थर उठा लिए पटरी से ........और भैया जब मालगाड़ी फिर से चली तो लगे ऊंचा ऊंचा उछाल के देखने .......पहले थोड़ा ऊंचा...... फिर और ज्यादा ...फिर उससे भी ज्यादा ......और यकीन मानिए .....हर बार पत्थर वापस हाथ में ही आता था ........और ये की  वो गार्ड साहब सबसे अच्छा उछालते और catch करते थे .........बहुत ऊंचा उछालने की वजह से कुछ पत्थर ज्यादा दूर चले गए ...और वापस हाथ नहीं आये और सबसे ज्यादा पत्थरों का loss श्रीमती जी ने किया .........पर उस दिन ये prove हो गया की ये theory बिलकुल सही है और हमें physics के सभी सिद्धांतों में अटूट श्रद्दा हो गयी  ........चाहे कुछ हो जाये physics की book में कुछ गलत नहीं लिखा हो सकता ......खैर रुकते रुकाते वो मालगाड़ी जब बनारस पहुंची तो दिन के डेढ़  बज रहे थे ....यानी 40 किलोमीटर की यात्रा पूरे 4 घंटे में ......थोड़ी धीमी थी पर यकीन मानिए मज़ा बहुत आया उस यात्रा में ....ये बात दीगर है की जिस काम के लिए बनारस गए थे वो नहीं हुआ क्योकि लेट हो गए थे ...........और उस दिन एक और बात ये सीखने को मिली की यात्रा मालगाड़ी की भी..... खराब नहीं होती ........

कुत्ते को कभी मुर्गी पकड़ना मत सिखाओ

                                          दोस्तों ज्यादा पुरानी बात नहीं  है ....दो भाई थे ...लम्बे समय से साथ साथ रह रहे  थे एक ही घर में .....थोड़ी बहुत हूँ टूं तो लगी ही रहती है .......पर फिर भी सब ठीक ही चल रहा था .......कट रही थी .......जो छोटी मोटी समस्याएं आती थीं बुज़ुर्ग आपस में दोनों को बैठा के सुलझा लिया करते थे ......पर फिर धीरे धीरे माहौल खराब होने लगा ....और अंत में छोटे ने कह दिया की मैं तेरे साथ नहीं रह सकता ...........रोज़ रोज़ लड़ाइयाँ होने लगीं ....मारपीट लाठी डंडा .......बुजुर्गों ने बहुत कोशिश की समझाने की ......और गाँव में कुछ और लोग भी थे भड़काने वाले ............सो बुजुर्गों की एक न चली ..........और एक दिन दोनों अलग हो ही गए ............घर में दीवार खिच गयी ....चूल्हे अलग हो गए ........चूल्हे तो अलग हुए सो हुए, दिल अलग हो गए थे .......कुछ दिन  बड़ा खराब समय बीता ........पर समय हर घाव को भर ही देता है ......दोनों खाने कमाने लगे ......पर छोटे के दिल में हमेशा एक टीस रहती थी ...एक जलन थी ....उसे हमेशा लगता की उसके साथ नाइंसाफी हुई है .....और वो इसी जलन में हमेशा जलता भुनता रहता था ........बड़ा मस्त था ....वो मेहनत से खा कमा रहा था  .....सो वो धीरे धीरे सम्पन्न होता चला गया ...और छोटा अपने अंतर्द्वंदों से ही जूझता रह गया ......अब छोटे से बड़े की सम्पन्नता और सुख देखा न जाता था ..............वो हमेशा बदला लेने की फ़िराक में ही रहता था ...सो उसने दो एक बार धावा बोल दिया बड़े पर ....पर बड़ा तगड़ा ठहरा सो उसने पीट दिया बुरी तरह .......अब छोटे को समझ में आ गया की लड़ाई में तो वो जीत नहीं सकता ...सो उसने कोई दूसरा तरीका निकालने की ठानी .......और फिर पता नहीं कहाँ से उसके दिमाग में आया की उसने एक कुत्ता पाल लिया .........और लगा उस कुत्ते को मुर्गी  पकड़ना  सिखाने .......कुत्ता तो कुत्ता ठहरा .....वो बहुत जल्दी सीख गया ........अब छोटे ने उस कुत्ते को छोड़ दिया ....और वो कुत्ता रोज़ बड़े की एकाध मुर्गी पकड़ लेता था .......बड़ा अब बहुत परेशान .....और छोटे को बहुत मज़ा आने लगा ....जब भी उसका कुत्ता बड़े की मुर्गी मार देता तो छोटा वहां अपने घर में बैठ के मज़े लेता और मंद मंद मुस्कुराता ......वाह ये बात हुई ...अब आएगा मज़ा ........ उसने सोचा की एक कुत्ते से काम नहीं चलेगा ......दो चार कुत्ते और पालो ....सो उसने 4 -5 कुत्ते और पाल लिए ......उनको भी मुर्गी पकड़ने की ट्रेनिंग दे के छोड़ दिया ...अब वो सब मिल के लगे बड़े को परेशान करने ............रोज़ ही उसकी 2 -4 मुर्गियां मारने लगे .......बड़ा बहुत परेशान हो गया. अब वो बेचारा सारे काम धंधे छोड़ के लगा अपनी मुर्गियां अगोरने ...उन कुत्तों से ........उसने छोटे को समझाने की कोशिश की पर छोटा कहाँ सुनने को तैयार था ....उसे तो मज़ा आ रहा था ......उसे तो अब मौका मिला था सारे बदले लेने का ....सो उसने कहा की और कुत्ते पालो ....और  उसने अपने पूरे घर को ही लगा दिया ........की कुत्ते पालो ...उनको ....ट्रेनिंग दो और छोड़ दो बाहर ....अब तो उसके यहाँ कुत्तों का ट्रेनिंग स्कूल ही खुल गया .......सारे गाँव में बात फ़ैल गयी की भैया इस घर में कुत्तों की बड़ी इज्ज़त है ...सो सारे गाँव के कुत्ते वहीं , छोटे के यहाँ जमा होने लगे ......छोटे की भी मौज और कुत्तों की भी मौज ....बनने लगी रोज़ बिरयानी  कुत्तों के लिए .....बड़े के लिए अब रहना दूभर हो गया था ...कुत्ते रोज़ धावा बोल देते थे.....सो उसने भी काम धंधा छोड़ के पहले इसी का उपाय करने का निश्चय किया ......घर के चारों तरफ चारदीवारी बनाई .........मुर्गियों को अन्दर दडबे में बंद किया ......बंदूकें लाया ...चौकीदार बैठाए ...सिक्यूरिटी tight की..... और दौड़ा दौड़ा के कुत्तों को मारना  शुरू किया .....अब कुत्ते दुबक गए .......अपने घर में ही रहने लगे क्योंकि पडोसी ने तो काम tight कर दिया था .....पर यहीं गड़बड़ हो गयी ......chhote ने कुत्तों को ये सिखा दिया  की मुर्गी न मिले तो आदमी को ही पकड़ लो .....उनको तो मुर्गी पकड़ने की और रोज़ मुर्गी खाने की आदत पड़ गयी थी ...सो उन्होंने .....मोहल्ले के और दूसरे घरों में घुसना शुरू कर दिया ......मुर्गी न मिले तो आदमी ही सही ...अब जब गाँव भर  ने छोटे को उलाहना दिया ,डराया धमकाया तो उसने इन कुत्तों को मना  किया .......डांटा फटकारा भी ....एक दो को दो चार डंडे मार भी दिए .....अब कुत्ते बिगड़ गए ....उन्होंने मालिक को दी दौड़ा लिया ......उन्हें तो मुर्गी पकड़ने की आदत थी ...अब वो लगे अपने घर की ही मुर्गियां पकड़ने ........अब बहार  वालों के लिए तो आप चारदीवारी बना सकते हैं पर अपने घर वालों के लिए क्या करेंगे .......उसने कुत्तों को रोकने की कोशिश की ....नहीं माने तो दो चार को गोली मार दी .....पर इस से बात और बिगड़ गयी .....अब कुत्ते पागल हो गए थे .......लगे मालिक को ही दौड़ा दौड़ा के काटने .....पूरे घर पे उन्होंने कब्ज़ा कर लिया ....अब छोटा खाली नाम मात्र का ही मालिक था ...असली हुकूमत तो कुत्तों की थी ......छोटा आजकल बेचारा बड़ा परेशान है ......कुत्ते जब देखो तब काट लेते हैं ......पट्टियाँ बांध के घूम रहा है ..... फिर भी अक्ल नहीं आयी  है अब तक ......अब भी कहता है की बड़ा ही मेरा सबसे बड़ा दुश्मन है ....... बड़े से बदला ले के रहूँगा .....बच्चे भूखे मर रहे हैं ....कुत्ते बिरयानी खा रहे हैं ......
आज गाँव भर के नामी कटखने पागल कुत्ते छोटे के घर में बिरयानी खा रहे है ....सारा गाँव जनता है ....पर छोटा कहता है ....प्रूफ दिखाओ ....मेरे यहाँ कोई कुत्ता नहीं है ....एक दिन गाँव के एक दबंग ने छोटे के घर में घुस के एक बड़ा नामी कुत्ता मार दिया ......छोटा कुछ दिन तो मुह छिपाता फिर ....फिर बोला की गाँव वालों की ही गलती है ....कुत्ता अगर मेरे घर में था तो तुम लोग आज तक ढूंढ क्यों नहीं पाए .......और खबरदार .....आज के बाद कोई मेरे घर में घुस के कुत्ता मारने की कोशिश न करे....इतना सब कुछ हो गया पर छोटा अब भी समझ नहीं रहा है  ...........और समझे भी क्या ...छोटे के घर के सब लोग कुत्तों के शौक़ीन हैं .....वो सब चाहते हैं की कुत्ते घर में ही रहें ...... छोटे के घर एक समझदार आदमी था .....वो कहता फिरता था की ये क्या कर रहे हो भाई ...ये तो  गलत है .......सो एक दिन एक कुत्ता उसे मार के खा गया .......तो लो भैया सारे घर के लोग लगे मिल के उस कुत्ते की जय जय कार  करने ......उसे हीरो बना दिया ...अब बताओ भैया सारा घर ही अगर कुत्तों का हिमायती  हो जाये तो क्या बनेगा घर का ........पर छोटे को ये बात समझ नहीं आ  रही  ....
                                       बड़े के घर में भी कुछ लोग हैं जो कहते हैं की अगर उसने कुत्ते पाल रखे हैं तो हम भी पाल लेते है ..... पर बड़ा समझदार है ...होना भी चाहिए ....वो समझता है की कुत्ते को कभी मुस्गी पकड़ना नहीं सिखाना चाहिए ......आज पडोसी की पकड़ेगा ....पर ध्यान रखना ....कल को अपने घर की ही पकड़ने लगेगा ....बड़ा कहता है की चलो ...जो भी है जैसा भी है ....है तो मेरा  भाई  ही ....सगा भाई है ...एक ही बाप की तो औलाद हैं हम दोनों ......इश्वर छोटे को सद्बुद्धि दे .......आखिर लड़ झगड़ के किसी समस्या का कोई हल निकला है क्या आज तक .....समस्याएं तो आखिर प्रेम से बातचीत कर के ही हल होंगी .......ॐ शांतिः शांतिः शांतिः ...ॐ